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दिल साफ होना चाहिए बस - गंदे रूम पर ट्रोल हुईं तो श्रद्धा कपूर ने दिया जवाब, क्या सच में कमरा गंदा रखना कोई बड़ी बात नहीं?

Shraddha Kapoor Trolled for Messy Room: गंदे रूम का बचाव करते हुए श्रद्धा ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा- रूम जैसा भी हो, दिल साफ होना चाहिए।

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गंदे कमरे के लिए ट्रोल हुईं श्रद्धा कपूर (Photo: Instagram)

Shraddha Kapoor Trolled for Messy Room: हाल ही में श्रद्धा कपूर ने सोशल मीडिया पर एक डांस वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में श्रद्धा का डांस तो लोगों को पसंद आया लेकिन जिस रूम में वह डांस कर रही थीं उसने उन्हें ट्रोल करवा दिया। कमरा काफी अस्तव्यस्त नजर आ रहा था। चीजें इधर उधर फैली थीं। इसपर लोगों ने ट्रोल करते हुए लिखा कि ये रूम जिसका भी हो बहुत साफ सफाई की जरूरत है। इसी तरह के कमेंट्स से लोगों ने श्रद्धा को खूब ट्रोल किया।

श्रद्धा ने ट्रोल्स को जवाब दिया है। गंदे रूम का बचाव करते हुए श्रद्धा ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा- रूम जैसा भी हो, दिल साफ होना चाहिए। श्रद्धा के जवाब के बाद ट्रोलिंग तो रुक गई लेकिन यहां एक सवाल जरूर खड़ा होता है। सवाल ये कि क्या सही में जिस कमरे में आप रहते हैं उसको गंदा रखने में कोई बुराई नहीं है? क्या सच में गंदा कमरा रखना कोई बड़ी बात नहीं है?

रूम की साफ सफाई को लेकर इंटरनेट पर तमाम एक्सपरट्स और मनोवैज्ञानिकों की राय मौजूद है। उन्हीं के आधार पर हम आपको बता रहे हैं कि जब अस्त-व्यस्त और गंदे कमरे में रहने लगते हैं तो क्या असर पड़ता है:

सच यह है कि गंदा और अस्त-व्यस्त कमरा हमारी मानसिक और शारीरिक सेहत पर गहरा असर डालता है। जिस जगह हम सबसे ज्यादा समय बिताते हैं, उसका माहौल हमारे मूड, सोच और लाइफस्टाइल को प्रभावित करता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ साफ और व्यवस्थित वातावरण को स्वस्थ जीवन के लिए बेहद जरूरी मानते हैं।

1. मेंटल स्ट्रेस और बेचैनी बढ़ाता है गंदा कमरा

जब कमरे में हर तरफ बिखरा सामान और गंदगी होती है, तो दिमाग लगातार उस अव्यवस्था को महसूस करता रहता है। इससे मानसिक दबाव बढ़ने लगता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, गंदगी और बिखराव स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल का लेवल बढ़ा सकते हैं, जिससे इंसान जल्दी चिड़चिड़ा और परेशान महसूस करने लगता है।

2. घटती है क्रिएटिविटी

जब कमरा गंदा होता है तो उस माहौल में ध्यान केंद्रित करना भी मुश्किल हो जाता है। पढ़ाई, काम या किसी भी रचनात्मक कार्य में मन कम लगता है और उत्पादकता प्रभावित होने लगती है।

3. नींद होती है डिस्टर्ब

अव्यवस्थित कमरा दिमाग को शांति महसूस नहीं होने देता। जब सोने की जगह साफ और सुकूनभरी न हो, तो दिमाग पूरी तरह रिलैक्स नहीं कर पाता। इससे गहरी नींद में रुकावट आ सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार गंदे माहौल में रहने से अनिद्रा और थकान जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।

4. बीमारियों का बढ़ जाता है खतरा

धूल, मिट्टी और नमी वाले कमरों में बैक्टीरिया, फंगस और कीटाणु तेजी से पनपते हैं। इससे एलर्जी, अस्थमा और सांस से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। अगर बिस्तर, तकिए या चादर लंबे समय तक साफ न किए जाएं, तो त्वचा संक्रमण और खुजली जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। गर्मियों और बारिश के मौसम में यह समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है।

5. वास्तु के अनुसार भी माना जाता है अशुभ

वास्तु शास्त्र में भी घर की साफ-सफाई को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि गंदगी और अव्यवस्था नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती है। कई लोग इसे राहु दोष और आर्थिक परेशानियों से भी जोड़कर देखते हैं। हालांकि यह आस्था का विषय हो सकता है, लेकिन साफ वातावरण सकारात्मक महसूस कराने में जरूर मदद करता है।

अगर कमरा बहुत गंदा है तो क्या करें?

कमरे को रोज थोड़ा-थोड़ा व्यवस्थित रखने की आदत डालें। खिड़कियां खोलकर ताजी हवा आने दें, अनावश्यक सामान हटाएं और नियमित सफाई करें।

साफ और व्यवस्थित कमरा केवल देखने में अच्छा नहीं लगता, यह मानसिक शांति, बेहतर स्वास्थ्य और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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