Shayari on Rose in Hindi (गुलाब पर शायरी): यूं तो हाल-ए-दिल बयां करने के लिए किसी चीज की जरूरत नहीं होती। आंखें ही दिल की जुबां होती हैं। फिर भी कई बार अपने इश्क का इज़हार करना जरूरी हो जाता है। अपने प्यार के इजहार के यूं तो हजारों तरीके हैं लेकिन वह फूल ही है जिसके चलते इजहार-ए-इश्क थोड़ा और आसान हो जाता है। एक फूल देकर दिल का हाल आसानी से बताया जा सकता है। अगर यह फूल गुलाब का हो तो फिर क्या ही कहने। लेकिन इस गुलाब के फूल के साथ अगर कोई अच्छी सी शायरी कह दी जाए तो काम और आसान होना तय है। गुलाब को एहसास-ए-इश्क का इत्र बना कई शायरों ने अपनी नज़्मों से मोहब्बत की खुशबू बिखेरी है। आइए पढ़ते हैं गुलाब पर लिखे कुछ चुनिंदा शेर:
Shayari on rose in Urdu text
1. मैं चाहता था कि उस को गुलाब पेश करूं
वो ख़ुद गुलाब था उस को गुलाब क्या देता
- अफ़ज़ल इलाहाबादी
2. भरी बहार में इक शाख़ पर खिला है गुलाब
कि जैसे तू ने हथेली पे गाल रक्खा है
- अहमद फ़राज़
3. बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से
चमन में आ के भी काँटा गुलाब हो न सका
- आरज़ू लखनवी
4. नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है
- मीर तक़ी मीर
Shayari on rose for Instagram
5. कभी गुलाब से आने लगी महक उस की
कभी वो अंजुम ओ महताब से निकल आया
- महबूब ज़फ़र
7. नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं
ये मोहब्बतों के चराग़ हैं इन्हें नफ़रतों की हवा न दे
- बशीर बद्र
8. सुनो कि अब हम गुलाब देंगे गुलाब लेंगे
मोहब्बतों में कोई ख़सारा नहीं चलेगा
- जावेद अनवर
9. बिछे थे राहों में फूल कितने
जो भा गया वो गुलाब हो तुम
- साइमा नसीम बानो
10. फिर याद आ गए वही कॉलेज के दिन मुझे
सूखे गुलाब निकले पुरानी किताब से
- शायान क़ुरैशी
Shayari on rose love in Hindi
11. कहां चराग़ जलाएं कहां गुलाब रखें
छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता
- निदा फ़ाज़ली
12. फूलों की सेज पर ज़रा आराम क्या किया
उस गुल-बदन पे नक़्श उठ आए गुलाब के
- आदिल मंसूरी
13. दिन में आने लगे हैं ख़्वाब मुझे
उस ने भेजा है इक गुलाब मुझे
- इफ़्तिख़ार राग़िब
14. निकल गुलाब की मुट्ठी से और ख़ुशबू बन
मैं भागता हूं तिरे पीछे और तू जुगनू बन
- जावेद अनवर
Shayari on rose flower in Hindi
15. मैं ने भेजी थी गुलाबों की बशारत उस को
तोहफ़तन उस ने भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा भेजी है
- हामिद सरोश
16. बसी है सूखे गुलाबों की बात सांसों में
कोई ख़याल किसी याद के हिसार में है
- ख़ालिदा उज़्मा
17. आप से जो भी ख़ार खाते हैं
उन की ख़ातिर गुलाब ले जाओ
- मीनाक्षी जिजीविषा
18. किसी के लम्स की तासीर है कि बरसों बा'द
मिरी किताबों में अब भी गुलाब जागते हैं
- अख़लाक़ बन्दवी
19. उसे किसी से मोहब्बत न थी मगर उस ने
गुलाब तोड़ के दुनिया को शक में डाल दिया
- दिलावर अली आज़र
20. अब इत्र भी मलो तो तकल्लुफ़ की बू कहाँ
वो दिन हवा हुए जो पसीना गुलाब था
- लाला माधव राम जौहर
21. तिरे बदन की महक को गुलाब से तश्बीह
कि जैसे कोई दिखाए चराग़ सूरज को
- मारूफ़ रायबरेलवी
अगर आप किसी से इश्क करते हैं और उनसे अपने इश्क का इज़हार करना चाहते हैं तो ये जबरदस्त शेर आपकी मदद करेंगे। हाथ में गुलाब लिये आप उनके सामने ये शायरी बोल दें तो मुमकिन है कि वो हां कहे बिना आपके पास से जाएंगी ही नहीं।
