Aaj ki Shayari: अपनों से मिले धोखे के दर्द को बेहद खूबसूरती से बयां करता है शकील बदायूंनी का यह शेर
- Authored by: Suneet Singh
- Updated Dec 21, 2025, 10:43 AM IST
आज की शायरी (Aaj ki Shayari): शकील बदायूंनी के इस शेर का असल भाव यह है कि सबसे बड़ा जख्म वही होता है जो अपने देते हैं। यह शेर इश्क की थकान, टूटे भरोसे और प्यार में मिलने वाले दर्द को बेहद सादगी से सामने रखता है।
आज की शायरी में शकील बदायूंनी का मशहूर शेर
Shayari of The Day (आज की शायरी): शकील बदायूंनी का नाम उर्दू और हिंदी के महानतम शायरों में शुमार है। उन्होंने फिल्मों के लिए भी खूब गीत लिखे। उनकी कलम से निकले शब्द आज भी लोगों के एहसास को हिलकर रख देने का का करते हैं। 3 अगस्त 1916 को बदायूं, उत्तर प्रदेश में जन्मे शकील बदायूंनी को खास तौर पर दर्द, मोहब्बत और इंसानी भावनाओं को सादगी से पेश करने के लिए जाना जाता है। उन्होंने ऐसे-ऐसे शेर लिखे जो आम आदमी की भावनाओं से सीधे जुड़ते थे। 1970 में उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी शायरी आज भी मोहब्बत और संवेदना की जुबान बनी हुई है। आज की शायरी में पढ़ें शकील बदायूंनी का मशहूर शेर:
मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे
मैं हूं दर्द-ए-इश्क़ से जां-ब-लब मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे
शकील बदायूंनी का यह शेर इश्क की उस नाजुक और तकलीफदेह स्थिति को बयां करता है, जहां प्रेमी भीतर से पूरी तरह टूट चुका है। यहां शायर अपने प्रिय से, जो उसका हम-नफस (सांसों का साथी) और हम-नवा (दिल की आवाज समझने वाला) है, बेहद विनम्र लेकिन गहरी पीड़ा के साथ बात कर रहा है।
मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे
शकील बदायूंनी इस शेर के पहले मिसरे में कहते हैं कि, तुम मेरे इतने करीब हो कि मेरी सांसों और मेरी भावनाओं से जुड़े हो। ऐसे में अगर तुम धोखा दोगे, तो वह साधारण धोखा नहीं होगा, वह अंदर तक तोड़ देने वाला विश्वासघात होगा। यहां दोस्त बन के दगा का अर्थ है अपनापन दिखाकर, भरोसा दिलाकर विश्वासघात करना। शायर को दुश्मन से नहीं, बल्कि अपने ही करीबी से चोट लगने का डर है।
मैं हूं दर्द-ए-इश्क़ से जां-ब-लब मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे
शेर के दूसरे मिसरे में जां-ब-लब का अर्थ है दम तोड़ने की कगार पर। शायर कहता है कि मैं इश्क के दर्द से इतना टूट चुका हूं कि अब जीने की इच्छा भी नहीं बची। ऐसे में मुझे जिंदगी की दुआ मत दो, यानी मुझे यह मत समझाओ कि सब ठीक हो जाएगा, जीना जरूरी है। क्योंकि जब दर्द हद से गुजर जाए, तब दिल को दिलासा भी बोझ लगने लगता है।
शकील बदायूंनी के इस शेर का असल भाव यह है कि सबसे बड़ा जख्म वही होता है जो अपने देते हैं। यह शेर इश्क की थकान, टूटे भरोसे और प्यार में मिलने वाले दर्द को बेहद सादगी से सामने रखता है।
शकील बदायूंनी के ऐसे ही तमाम शेर आज भी खूब सुने और सुनाए जाते हैं। आइए पढ़ते हैं उनकी कलम से निकले कुछ यादगार शेर जिन्हें पढ़ने वालों को लगता है कि शायद यह शेर उनके लिए ही लिखा गया है। यही तो शकील बदायूंनी की शायरी का जादू था:
1. कल रात जिंदगी से मुलाकात हो गई
लब थरथरा रहे थे मगर बात हो गई
2. ये दाग, दाग की खातिर मिटा के छोड़ेंगे
नए अदब को फसाना बना के छोडेंगे
3. वो आंख तो दिल लेने तक बस दिल की साथी होती है,
फिर लेकर रखना क्या जाने दिल लेती है और दिल खोती है
4. लम्हे उदास उदास फजाएं घुटी घुटी
दुनिया अगर यही है तो दुनिया से बच के चल
5. इक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताजमहल
सारी दुनिया को मोहब्बत की निशानी दी है
6. यूं तो हर शाम उमीदों में गुजर जाती है
आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया
7. ऐ इश्क ये सब दुनिया वाले बेकार की बातें करते हैं
पायल के गमों का इल्म नहीं, झंकार की बातें करते हैं
8. गुलशन हो निगाहों में तो जन्नत न समझना
दम-भर की इनायत को मोहब्बत न समझना
9. मुझे तो कैद-ए-मोहब्बत अजीज थी लेकिन
किसी ने मुझ को गिरफ्तार कर के छोड़ दिया
10. ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया
जाने क्यूं आज तिरे नाम पे रोना आया
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