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44,800 में बिक रहा 200रु वाला Bandhani Skirt, गुजरात-जयपुर की सड़कों से हुआ कॉपी, विदेशी ब्रांड की पकड़ी गई चोरी

विदेशी ब्रांड द्वारा महंगी 'Bandhani-स्टाइल' स्कर्ट का लुक कॉपी कर महंगी कीमतों पर बेचने का आरोप लगा है। देखें क्या है पूरा मामला -

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Ralph Lauren Bandhani Skirt

फैशन की दुनिया में 'इंस्पिरेशन' और 'कॉपी' के बीच की लाइन हमेशा धुंधली रही है। लेकिन जब वही डिजाइन, जो भारत की गलियों और बाजारों में सस्ते दामों पर मिलता है, अचानक हजारों रुपये में बिकने लगे, तो सवाल उठना तय है। हाल ही में एक विदेशी लग्जरी ब्रांड की स्कर्ट (Bandhani Skirt) को लेकर ऐसा ही विवाद खड़ा हो गया है। दावा किया जा रहा है कि यह स्कर्ट भारत की पारंपरिक Bandhani कला से प्रेरित है, लेकिन इसे ₹44,800 की कीमत पर बेचा जा रहा है। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे भारतीय कारीगरों के काम की अनदेखी और डिजाइन चोरी तक बता दिया। यह मामला सिर्फ एक कपड़े की कीमत का नहीं, बल्कि उस पहचान और सम्मान का है, जो भारत की सदियों पुरानी कला को मिलना चाहिए।

बांधनी स्कर्ट से पहले भी इसी ब्रांड ने भारतीय स्टाइल के झुमकों का डिजाइन कॉपी किया था। जिसपर भी काफी विवाद हुआ था। आज के बदलते ग्लोबल फैशन वाले दौर में कई ऐसे मामले सामने आए हैं। जहां पर विदेशी ब्रांड्स से पारंपरिक भारतीय कला, कपड़ों से लेकर चप्पल, एक्सेसरीज तक का लुक हूबहू कॉपी किया है। न केवल कॉपी बल्कि कभी उस कला को रिकगनाइज भी नहीं किया गया।

क्या है मामला

रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेशी ब्रांड Ralph Lauren ने अपनी वेबसाइट पर Bandhani-स्टाइल की एक कॉटन रैप स्कर्ट लगभग ₹44,800 में बेची। हालांकि, इस स्कर्ट को 'Bandhani' नाम से नहीं बेचा गया, बल्कि इसे सिर्फ एक प्रिंटेड कॉटन का टाई एंड डाय डिजाइन बताया गया, जिससे विवाद और बढ़ गया।

Ralph Lauren Bandhani Skirt Price

Ralph Lauren Bandhani Skirt Price

इस तरह की स्कर्ट भारत के कई हिस्सों में खासतौर से जयपुर तो गुजरात में बहुत ही सस्ती कीमतों में और अच्छी क्वालिटी में मिलती है। बांधनी कला भारत में पिछले 5000 सालों से फॉलों की जा रही है। और अचानक इस तरह विदेशी ब्रांड्स इसका लुक कॉपी कर अपना कहें, तो ये काफी खराब लगने वाली बात है।

बांधनी क्या है और क्यों खास है

बांधनी भारत की पारंपरिक टाई-डाई कला है, जो मुख्य रूप से गुजरात और राजस्थान में प्रचलित है। इसमें कपड़े को छोटे-छोटे बिंदुओं में धागों से बांधकर रंगा जाता है, जिससे खूबसूरत पैटर्न बनते हैं। यह कला सदियों पुरानी है और हर डिज़ाइन हाथ से तैयार होता है, इसलिए हर पीस यूनिक होता है। बांधनी को शुभ, रंगीन और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है, जो खास अवसरों पर पहनी जाती है।

बड़ा सवाल: इंस्पिरेशन या चोरी?

फैशन में प्रेरणा लेना गलत नहीं माना जाता, लेकिन बिना श्रेय दिए पारंपरिक डिज़ाइन का इस्तेमाल करना नैतिक सवाल जरूर खड़े करता है। यह मामला दिखाता है कि अब लोग सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि उसके पीछे की कहानी और क्रेडिट को भी महत्व देने लगे हैं।

Avni Bagrola
अवनी बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और आधुनिक जीवनशैली से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें युवा और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 2,500 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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