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Psychology: कैसे होते हैं अपने जन्मदिन को आम दिन की तरह बिताने वाले लोग

Psychology: मनोविज्ञान मानता है कि अपने जन्मदिन को साधारण दिन की तरह मनाने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति दुखी है या जीवन से खुश नहीं है।

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केसे होते हैं अपना जन्मदिन ना मनाने वाले लोग

Psychology of Birthday: हममें से ज्यादातर लोग जन्मदिन को खास दिन मानते हैं। केक, पार्टी और शुभकामनाएं इस दिन को यादगार बनाने का हिस्सा होते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने जन्मदिन को बिल्कुल सामान्य दिन की तरह बिताते हैं। न कोई उत्साह, न कोई खास खुशी। इनमें से कुछ लोग तो अपना जन्मदिन दूसरों से छिपाने तक की कोशिश करते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों करते हैं लोग। मनोविज्ञान के अनुसार इसके पीछे कई कारण होते हैं:

जब बार-बार मिली हो निराशा

कुछ लोगों ने बचपन या युवावस्था में अपने जन्मदिन पर उपेक्षा या निराशा का सामना किया होता है। कई बार उम्मीदें पूरी नहीं होने पर व्यक्ति खुद को भावनात्मक रूप से बचाने के लिए उम्मीद करना ही छोड़ देता है। मनोविज्ञान में इसे लर्न्ड हेल्पलेसनेस कहा जाता है। ऐसे लोग जन्मदिन को महत्व नहीं देते क्योंकि उन्हें लगता है कि अपेक्षाएं रखने से केवल दुख मिलेगा।

कुछ और होती है प्राथमिकता

कुछ लोगों की जिंदगी इतनी व्यस्त हो जाती है कि जन्मदिन जैसी तारीखें भी उनके लिए सामान्य दिनों जैसी लगने लगती हैं। काम, जिम्मेदारियां और रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच वे उत्सव मनाने के बजाय अपनी दिनचर्या को प्राथमिकता देते हैं।

मान्यता की जरूरत ना महसूस होना

एक वर्ग ऐसा भी है जो अपनी खुशी और आत्मसम्मान के लिए दूसरों की प्रशंसा या ध्यान पर निर्भर नहीं रहता। ऐसे लोग अपनी कीमत केक, गिफ्ट या सोशल मीडिया शुभकामनाओं से नहीं जोड़ते। उनके लिए आत्मसंतोष और आत्मस्वीकृति ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।

फोकस से रहते हैं दूर

कुछ लोगों को अपने ऊपर सबका ध्यान केंद्रित होना असहज लगता है। जन्मदिन अक्सर व्यक्ति को समारोह का केंद्र बना देता है, जबकि अंतर्मुखी या निजी स्वभाव के लोग इससे बचना पसंद करते हैं।

जश्न के अलग मायने

कई लोगों के लिए उम्र बढ़ने के साथ जन्मदिन का मतलब बदल जाता है। वे बड़े समारोहों की बजाय आत्ममंथन, परिवार के साथ शांत समय या अपने जीवन की समीक्षा को अधिक महत्व देने लगते हैं। उनके लिए जीवन का हर दिन महत्वपूर्ण होता है, सिर्फ जन्मदिन नहीं।

कुल मिलाकर मनोविज्ञान मानता है कि अपने जन्मदिन को साधारण दिन की तरह मनाने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति दुखी है या जीवन से खुश नहीं है। कई बार यह सिर्फ उसकी व्यक्तिगत पसंद और व्यक्तित्व का हिस्सा होता है। हर व्यक्ति खुशी मनाने का अपना तरीका चुनता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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