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चेहरे पर हावी नहीं हो पाएगी उम्र, प्लास्टिक सर्जन ने बताए स्किन को जवां रखने के 8 तरीके

एंटी-एजिंग का असली मतलब सही जीवनशैली, सुरक्षा और विशेषज्ञ सलाह के संयोजन से अपनी उम्र के हर पड़ाव पर स्वस्थ और आत्मविश्वासी दिखना है।

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चेहरे की चमक नहीं होगी कम, काम आएंगे ये 8 टिप्स (Photo: iStock)

बढ़ती उम्र के साथ त्वचा में बदलाव आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन सही देखभाल और सही उपचार से लंबे समय तक युवा और रिंकल फ्री स्किन पाई जा सकती है। स्किन एक्सपर्ट्स और प्लास्टिक सर्जनों के अनुसार, एंटी-एजिंग स्किन की ओवरऑल हेल्थ और नेचुरल बनावट को बनाए रखने से जुड़ा है। अगर आप भी बढ़ती उम्र के असर को कम करना चाहते हैं, तो कैलिफोर्निया के फेमस प्लास्टिक सर्जन डॉ. आमिर एम करम द्वारा शेयर किए गए ये 8 प्रमुख एंटी-एजिंग लेसन्स काफी काम के हैं:

सूरज की हानिकारक किरणों से सुरक्षा

एंटी-एजिंग का सबसे पहला और बुनियादी नियम है सूरज की अल्ट्रावायलेट रेज से स्किन की रक्षा करना। सूर्य की किरणें त्वचा में कोलेजन को तोड़ती हैं, जिससे समय से पहले झुर्रियां, फाइन लाइन्स और पिगमेंटेशन की समस्या होती है। डेली ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल त्वचा को ढलने से रोकता है।

सही स्किनकेयर इंग्रीडिएंट्स का चुनाव

केवल मॉइस्चराइज़र लगाना काफी नहीं है। अपनी दिनचर्या में रेटिनॉल, विटामिन C और हायालुरोनिक एसिड जैसे सक्रिय तत्वों को शामिल करें। रेटिनॉल कोशिका पुनर्निर्माण और कोलेजन उत्पादन को बढ़ाता है, जबकि विटामिन C एंटी-ऑक्सीडेंट के रूप में त्वचा की रंगत और चमक को सुधारता है।

लेस इज मोर का फंडा

चेहरे के उपचार में अति करने से बचें। जब बात फिलर्स या बोटॉक्स की आती है, तो प्राकृतिक रूप बनाए रखना ही सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए। बहुत ज्यादा फिलर्स का इस्तेमाल चेहरे को अस्वाभाविक और सूजा हुआ दिखा सकता है।

फिलर्स और बोटॉक्स में अंतर समझें

बोटॉक्स चेहरे की मांसपेशियों की गतिविधियों से बनने वाली झुर्रियों को रोकता है। वहीं डर्मल फिलर्स उम्र के साथ चेहरे से गायब हुए वॉल्यूम को भरता है और गालों या होंठों को सही आकार देता है। दोनों का सही संतुलन ही प्राकृतिक परिणाम देता है।

त्वचा की बनावट पर ध्यान दें

केवल त्वचा को कसना ही काफी नहीं है। त्वचा का टेक्सचर भी साफ और चमकदार होना चाहिए। इसके लिए केमिकल पील्स, माइक्रोनीडलिंग और लेजर थेरेपी जैसे उपाय मृत त्वचा को हटाकर नई और स्वस्थ त्वचा लाने में मदद करते हैं।

कोलेजन सपोर्ट और पोषण

30 की उम्र के बाद शरीर में कोलेजन का बनना कम हो जाता है। संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड और हाइड्रेशन (भरपूर पानी) के जरिए त्वचा की अंदरूनी मजबूती बनाए रखना बेहद जरूरी है।

रोकथाम इलाज से बेहतर है

जब गहरी झुर्रियां पड़ जाएं, तब उपचार शुरू करने के बजाय 20 और 30 की उम्र के अंत में ही एहतियाती स्किनकेयर और हल्के प्रिवेंटिव उपचार शुरू करना अधिक असरदार होता है।

पेशेवर की सलाह है जरूरी

हर किसी की त्वचा का प्रकार अलग होता है। किसी ट्रेंड या सोशल मीडिया सलाह को आंख मूंदकर अपनाने के बजाय हमेशा किसी प्रमाणित प्लास्टिक सर्जन या डर्मेटोलॉजिस्ट से परामर्श लें, जो आपकी त्वचा की ज़रूरत के अनुसार व्यक्तिगत योजना बना सकें।

एंटी-एजिंग का असली मतलब सही जीवनशैली, सुरक्षा और विशेषज्ञ सलाह के संयोजन से अपनी उम्र के हर पड़ाव पर स्वस्थ और आत्मविश्वासी दिखना है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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