लाइफस्टाइल

Phuchka vs Golgappa: दिल्ली के गोलगप्पे से कितना अलग है बंगाल का फुचका, जानिए कैसे बनता है फुचका

Phuchka vs Golgappa: बंगाल का फुचका और दिल्ली के गोलगप्पे दिखने में लगभग एक जैसे लगते हैं, लेकिन इनके स्वाद, बनाने के तरीके और परोसने के अंदाज में काफी फर्क होता है।

Image

बंगाल का फुचका कैसे बनता है, दिल्ली के गोलगप्पे से है कितना अलग

Phuchka Vs Golgappa: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव परिणाम (West Bengal Election Results 2026) 4 मई को आ रहे हैं। कौन जीतेगा और कौन हारेगा कुछ समय बाद पता चल जाएगा। इस चुनावी जंग से इतर एक चीज को लेकर भी अकसर चर्चा होती रहती है कि बंगाल का फुचका बेस्ट है या फिर दिल्ली के गोलगप्पे। क्या ये दोनों एक हैं या फिर दोनों के बीच कुछ अंतर है। आइए जानते हैं बंगाल का फुचका दिल्ली के गोलगप्पों से कितना अलग होता है:

फुचका और गोलगप्पे में अंतर

बंगाल का फुचका और दिल्ली के गोलगप्पे दिखने में लगभग एक जैसे लगते हैं, लेकिन इनके स्वाद, बनाने के तरीके और परोसने के अंदाज में काफी फर्क होता है।

स्वाद

दोनों के स्वाद में काफी अंतर होता है। फुचका का स्वाद ज्यादा तीखा, खट्टा और मसालेदार होता है। इसमें इमली का गाढ़ा पानी, हरी मिर्च, धनिया और खास मसालों का इस्तेमाल होता है, जो इसे काफी चटपटा फ्लेवर देता है। वहीं, दिल्ली के गोलगप्पों में स्वाद थोड़ा हल्का और संतुलित होता है। गोलगप्पे का पानी पुदीना, धनिया और हींग के फ्लेवर वाला होता है, जो थोड़ा तीखा और थोड़ा खट्टा-मीठा हो सकता है।

गोलगप्पे से काफी अलग होता है फुचका का स्वाद (AI Image)

गोलगप्पे से काफी अलग होता है फुचका का स्वाद (AI Image)

फिलिंग

दिल्ली के गोलगप्पों में उबले हुए आलू के टुकड़ों के साथ अक्सर उबले हुए सफेद मटर या चने डाले जाते हैं। कई जगहों पर इसमें मीठी सोंठ की चटनी का भी इस्तेमाल होता है। फुचके की असली जान उसका मसाला है। इसमें मैश किए हुए उबले आलू के साथ काला चना, हरी मिर्च, और ढेर सारे खास मसाले (जैसे भुना जीरा और काला नमक) मिलाए जाते हैं। इसमें सोंठ का इस्तेमाल कम ही होता है।

बनावट

गोलगप्पे की पूरियां आमतौर पर सूजी या आटे से बनी होती हैं। ये आकार में थोड़ी छोटी और रंग में हल्की पीली होती हैं। सूजी के गोलगप्पे काफी कुरकुरे और मुंह में जाते ही घुल जाने वाले होते हैं। वहीं फुचके की पूरियां अकसर गेहूं के आटे से तैयार की जाती हैं। ये गोलगप्पों की तुलना में थोड़ी बड़ी, गहरे रंग की और अधिक सख्त होती हैं, ताकि ये भारी मसाले को संभाल सकें।

बंगाल के फुचके का स्वाद उसे दिल्ली के गोलगप्पे या फिर कहीं और के पानीपुरी से अलग बनाता है। तभी ना जाने कितने ही सालों से फुचका बंगाली स्ट्रीट फूड की जान भी है। अगर आप असली पानीपुरी में तीखेपन और देसी मसालों का भारी स्वाद चाहते हैं, तो फचका आपकी पहली पसंद होना चाहिए।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

और पढ़ें
End of Article