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किताब कैफे: उतार फेंकेंगे कंफर्ट जोन का कंबल, इन 5 किताबें को बना लें अपनी सबसे बड़ी ताकत

Kitaab Cafe (किताब कैफे): ये किताबें सिखाती हैं कि डर का होना सामान्य है। फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ लोग डर के कारण रुक जाते हैं और कुछ लोग उसी डर के साथ आगे बढ़ जाते हैं।

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नई शुरुआत से पहले जरूर पढ़ें ये 5 बेस्टसेलर किताबें, डर खुद भाग जाएगा (AI Image)

Kitaab Cafe (किताब कैफे): नई नौकरी हो, नया बिजनेस शुरू करना हो या फिर जिंदगी में कोई बड़ा फैसला लेना हो, कई बार सबसे बड़ी रुकावट हमारा अपना डर बन जाता है। फेल होने का डर, लोगों के तानों का डर या फिर कम्फर्ट जोन छोड़ने की हिचक हमें आगे नहीं बढ़ने देती है। अगर आप भी कुछ नया करने से घबराते हैं, तो कुछ बेहतरीन किताबें आपकी सोच बदल सकती हैं। ये किताबें आपको प्रेरित करने के साथ डर को समझने और उससे पार पाने का रास्ता भी दिखाती हैं।

द करेज टू बी डिसलाइक्ड (The Courage to Be Disliked)

इचिरो किशिमी और फुमिताके कोगा की यह किताब बताती है कि दूसरों की राय के डर में जीना छोड़ना कितना जरूरी है। लेखक समझाते हैं कि जब तक आप लोगों को खुश करने में लगे रहेंगे, तब तक अपनी असली जिंदगी नहीं जी पाएंगे। अगर आपको हर फैसले पर दूसरों की मंजूरी चाहिए, तो यह किताब जरूर पढ़ें।

फील द फियर एंड डू इट एनीवे (Feel the Fear and Do It Anyway)

सुसान जेफर्स की इस किताब का सबसे बड़ा संदेश है कि डर कभी पूरी तरह खत्म नहीं होता, लेकिन उसके बावजूद आगे बढ़ना ही सफलता की कुंजी है। लेखिका आसान उदाहरणों के जरिए बताती हैं कि आत्मविश्वास कोई जन्मजात गुण नहीं, बल्कि अभ्यास से विकसित होने वाली आदत है।

माइंडसेट (Mindset)

क्या आप मानते हैं कि आपकी क्षमताएं तय हैं या मेहनत से बदली जा सकती हैं? यही सवाल – कैरल ड्वेक की इस किताब का आधार है। कैरल ड्वेक बताती हैं कि ग्रोथ माइंडसेट अपनाने वाले लोग नई चुनौतियों से नहीं डरते, उन्हें सीखने का अवसर मानते हैं।

हू मूव्ड माय चीज? (Who Moved My Cheese)

यह छोटी-सी लेकिन बेहद असरदार किताब बदलाव को स्वीकार करना सिखाती है। कहानी के माध्यम से लेखक स्पेंसर जॉनसन बताते हैं कि जो लोग समय के साथ खुद को बदल लेते हैं, वही आगे बढ़ते हैं। अगर बदलाव आपको असहज करता है, तो यह किताब आपके लिए है।

एटॉमिक हैबिट्स (Atomic Habits)

कई बार हम इसलिए नया काम शुरू नहीं कर पाते क्योंकि हमें लगता है कि एक ही दिन में सब बदलना होगा। जेम्स क्लियर की यह किताब सिखाती है कि छोटे-छोटे कदम भी बड़ी सफलता की नींव बन सकते हैं। रोज थोड़ा-सा सुधार आपको डर से बाहर निकाल सकता है।

डर के आगे जीत है

ये पांचों किताबें एक समान बात सिखाती है। वो ये कि डर होना सामान्य है। फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ लोग डर के कारण रुक जाते हैं और कुछ लोग उसी डर के साथ आगे बढ़ जाते हैं। नई शुरुआत करने के लिए सबसे पहले परफेक्ट होने की नहीं, पहला कदम उठाने की जरूरत होती है।

तो अगर आप लंबे समय से किसी नए सपने को सिर्फ डर की वजह से टाल रहे हैं, तो इन किताबों को अपनी रीडिंग लिस्ट में शामिल करें। हो सकता है कि एक पन्ना पढ़ने के बाद ही आपको एहसास हो जाए कि आपकी सबसे बड़ी बाधा बाहर नहीं, आपके अपने भीतर छिपा डर है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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