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Shayari of the Day: मोहब्बत के दर्द पर मरहम की तरह हैं जौन एलिया के ये मशहूर शेर, पढ़ें जौन एलिया की दर्द भरी शायरी

Jaun Elia Shayari in Hindi: जौन एलिया की जिंदगी भी उनकी शायरी की तरह ही उलझी और भावनात्मक रही। यही वजह है कि उनके अल्फाज सीधे दिल में उतर जाते हैं।

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आज की शायरी में पढ़ें जौन एलिया के दर्द भरे शेर

Jaun Elia Shayari in Hindi, Jaun Elia Breakup Shayari: जौन एलिया उर्दू अदब के सबसे अलग और बेबाक शायरों में गिने जाते थे। उत्तर प्रदेश के अमरोहा में जन्मे जौन विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए। जौन एलिया की शायरी में दर्द, तन्हाई, मोहब्बत और जिंदगी से गहरी नाराज़गी साफ झलकती है, जो उन्हें भीड़ से अलग बनाती थी।

उनकी शायरी की खासियत यह है कि वे बेहद सादा शब्दों में गहरी बात कह देते थे। वे परंपरागत शायरी से हटकर लिखते थे और अपने अंदाज़ में एक तरह की बगावत दिखाई देती है। उनका लहजा कभी-कभी तल्ख और सवालों से भरा होता था, जो समाज और रिश्तों की सच्चाई को उजागर करता है। उनकी शायरी पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे कोई अपने दिल की सबसे सच्ची बातें बिना किसी बनावट के कह रहा हो।

उनकी जिंदगी भी उनकी शायरी की तरह ही उलझी और भावनात्मक रही। यही वजह है कि उनके अल्फाज सीधे दिल में उतर जाते हैं। आज भी युवा पीढ़ी में उनकी शायरी बेहद लोकप्रिय है, क्योंकि उसमें सच्चाई, दर्द और एक अजीब सी ईमानदारी महसूस होती है। आज की शायरी में आइए पढ़ते हैं जौन एलिया के चंद मशहूर शेर:

Jaun Elia Sad Shayari | Jaun Elia Love Shayari

1. कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई

तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया

2. मुझ को ये होश ही न था तू मेरे बाज़ुओं में है

यानी तुझे अभी तलक मैंने रिहा नहीं किया

3. अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ पर

कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते

4. ज़िंदगी किस तरह बसर होगी

दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में

5. ऐ ख़ुदा जो कहीं नहीं मौजूद

क्या लिखा है हमारी क़िस्मत में

6. बहुत नज़दीक आती जा रही हो

बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या

7. मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है

उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी

8. तू भी चुप है मैं भी चुप हूँ ये कैसी तन्हाई है

तेरे साथ तेरी याद आई क्या तू सचमुच आई है

9. बिन तुम्हारे कभी नहीं आई

क्या मेरी नींद भी तुम्हारी है

10. सोचता हूँ कि उस की याद आख़िर

अब किसे रात भर जगाती है

11. ज़ख़्म-हा-ज़ख़्म हूं और कोई नहीं ख़ून का निशां

कौन है वो जो मेरे ख़ून में तर है मुझ में

12. इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊं

वरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैंने

13. मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूं कि बस

ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं

14. क्या सितम है कि अब तेरी सूरत

ग़ौर करने पर याद आती है

15. मिल रही हो बड़े तपाक के साथ

मुझ को यकसर भुला चुकी हो क्या

उम्मीद करते हैं जौन एलिया के ये चुनिंदा शेर आपके दिल को सुकून देंगे और जुदाई के दर्द को भुलाने में मरहम का काम करेंगे। अगर आपको जौन की ये शायरी पसंद आई हो तो आप इन्हें अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर भी कर सकते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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