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इतवार शायरी: इस हफ्ते इतवार छिपा कर रखना तुम.., आपका दिन बना देंगी ये रविवार पर दो लाइन शायरी, पढ़ें संडे पर लिखे चुनिंदा शेर

Sunday Shayari in Hindi: इतवार जीवन की उस नमी का नाम है जो हफ्ते की तपती धूप में जरूरी बन जाती है। पूरे सप्ताह इस दिन का इंतजार होता है। इतवार अपने साथ ना सिर्फ काम धंधे से छुट्टी लेकर आता है बल्कि यह सुकून और नई शुरुआत करने का संकेत भी साथ लाता है।

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रविवार शायरी, इतवार पर शायरी (Sunday Shayari)

इतवार पर शायरी (Itwar Par Shayari): आज इतवार है। छुट्टी का यह दिन जिंदगी की दौड़ भाग को एक ठहराव देता है। रविवार की सुबह अलार्म के बिना होती है। चाय की चुस्कियों के साथ नींद के आखिरी कतरे भी धीरे-धीरे उतर जाते हैं। पूरे हफ्ते की थकान, भागदौड़ और उलझनों के बाद इतवार एक सुकूनभरी बालकनी है, जहां आदमी खुद से मिल पाता है। यह दिन घरवालों के साथ बैठने, किताबों में खो जाने, पुराने गानों में मुस्कुराने और बिना घड़ी देखे वक्त बिताने का होता है। इतवार दरअसल जीवन की उस नमी का नाम है जो हफ्ते की तपती धूप में जरूरी बन जाती है। इसी इतवार पर कई अजीम शायरों ने बेहद बेहतरीन शेर लिखे हैं। आइए पढ़ते हैं इतवार पर लिखे चंद मशहूर शेर:

इतवार शायरी (Sunday Shayari)

1. हुक्म दें ऐसे कैलन्डर के लिए

जिस में दो दिन बाद इक इतवार हो

- साहिर लुधियानवी

2. दुनिया में सदा चलती है चाहत की हुकूमत

आ जाओ मना लेंगे हम इतवार किसी दिन

- बद्र वास्ती

3. ये सच है वो हर हफ़्ते ही आता है

सब की क़िस्मत में इतवार नहीं होता

- प्रताप सोमवंशी

इतवार पर शेर (Sunday Shayari in Hindi)

4. रह कर ज़मीं पे चांद के दीदार के लिए

दफ़्तर में दिन गुज़रते हैं इतवार के लिए

- ओम अवस्थी

5. मुश्किल से आता है और उड़ जाता है

इस हफ़्ते इतवार छुपा कर रखना तुम

- भास्कर शुक्ला

6. नज़र उन से ये संडे को बाग़ीचे में मिली ऐसी

कि अब हफ़्ते के हर दिन को मुझे इतवार करना है

- आनंद वर्मा

7. आज मिलना है कहा पीर को उस ने 'काशिफ़'

मैं ने रिप्लाई किया जान ये इतवार नहीं

- काशिफ़ शकील

रविवार पर दो लाइन शायरी

8. दर्जनों क़िस्से-कहानी ख़ुद ही चल कर आ गए

उस से जब भी मैं मिला इतवार छोटा पड़ गया

- प्रताप सोमवंशी

9. अगर मैं वो ख़त न लिखता तो मेरे दोस्त नाराज़ हो जाते

और कहते हम इतवार के दिन तुम्हारे साथ

- ज़ीशान साहिल

10. हुक्म दें ऐसे कैलन्डर के लिए

जिस में दो दिन बाद इक इतवार हो

- साहिर लुधियानवी

11. हाकिम-ए-वक़्त यूँ मग़रूर न बन होश में आ

पीर आता है तो इतवार बदल जाता है

- आदिल राही

रविवार शायरी

12. कि आठों पहर मुझ को फ़ुर्सत नहीं

कहीं खो गया मेरा इतवार अब

- असग़र शमीम

13. ख़ुद को दफ़्तर में ये समझाते हैं

रोज़ इतवार नहीं हो सकता

- सपना मूलचंदानी

उम्मीद करते हैं इतवार पर लिखे ये शेर आपको जरूर पसंद आए होंगे। अगर इन शायरियों ने आपके दिल को छुआ तो आप इन्हें अपनों के साथ साझा कर सकते हैं या फिर अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर भी कर सकते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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