International Mountain Day: आज वैश्विक स्तर पर पर्वत दिवस मनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के इस विशेष दिवस को मनाने का उद्देश्य न केवल पर्वतों के सौंदर्य और उनके महत्व को रेखांकित करना है, बल्कि पर्वतों के संरक्षण, स्थानीय समुदायों के जीवन में सुधार और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने की दिशा में जागरूकता बढ़ाना भी है। पृथ्वी के लगभग 27 प्रतिशत हिस्से पर पर्वत स्थित है, जो दुनिया की करीब 1.1 अरब आबादी का घर भी है। न केवल ये बल्कि पर्वत ही जैव विविधता का केंद्र भी है। भारत जैसे देश के लिए हिमालय समेत अन्य विशाल पर्वतमालाएं केवल भौगोलिक सीमा नहीं नहीं बल्कि देश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय धरोहर है। इन्हीं पर्वतों के सरंक्षण के लिए ऐसे में हर साल अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्वत दिवस मनाया जाता है। हर साल इस दिन को एक खास थीम के साथ मनाया जाता है। देखें 2025 के पर्वत दिवस की थीम क्या है -
क्या है इस साल की थीम
अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस 2025 के लिए संयुक्त राष्ट्र ने खास थीम सेट की है। इस साल की थीम है - ग्लेशियर मायने रखते हैं: पर्वतों और उससे परे जल, भोजन और आजीविका के लिए..
ये थीम विशाल ग्लेशियर्स के महत्व और उनके तेजी से पिघलने से पैदा होने वाले गंभीर संकटों पर प्रकाश डालती है व जागरुकता फैलाती है।ग्लेशियर, जो सदियों से प्रकृति के जमे हुए जल भंडार रहे हैं, अब जलवायु परिवर्तन की वजह से एक ऐसे दर से सिकुड़ रहे हैं, जैसे पहले कभी नहीं हुआ है। यह केवल पर्वतीय क्षेत्रों के लिए ही नहीं, बल्कि समुद्र तटीय शहरों और मैदानी इलाकों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है।
क्यों है महत्वपूर्ण
ग्लेशियर पृथ्वी के ताजे पानी का लगभग 69 प्रतिशत हिस्सा संग्रहित करते हैं। भारत के हिमालयी क्षेत्र के हजारों ग्लेशियर प्रमुख नदियों जैसे गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र को पानी प्रदान करते हैं। जो एशिया की लगभग आधी से ज्यादा आबादी के लिए पानी का प्रमुख स्त्रोत है। और यही कारण है कि, इस दिवस को मनाना तो जनता के सामना जागरुकता फैलाना महत्वपूर्ण है।
