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नोलन की टाई ने चुरा ली लाइमलाइट! आखिर क्या है गुजरात का 4000 साल पुराना अजरक, जो पहुंच गया हॉलीवुड रेड कार्पेट तक

क्रिस्टोफर नोलन की अजरक सिल्क टाई ने दुनिया का ध्यान भारत की इस 4000 साल पुरानी कला की ओर खींच लिया है। जानिए अजरक फैब्रिक का इतिहास, इसे बनाने की अनोखी प्रक्रिया और क्यों यह आज हॉलीवुड से बॉलीवुड तक फैशन का नया पसंदीदा बन गया है।

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अजरख प्रिंट: गुजरात की गलियों से क्रिस्टोफर नोलन के गले की टाई तक
Authored by: Avni Bagrola
Updated Aug 4, 2026, 17:59 IST
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कई बार किसी फिल्म से ज्यादा चर्चा उसके प्रीमियर में पहने गए एक छोटे से फैशन पीस की हो जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ जब मशहूर फिल्ममेकर क्रिस्टोफर नोलन न्यूयॉर्क में अपनी फिल्म 'The Odyssey' के प्रीमियर पर पहुंचे। उनका क्लासिक सूट तो हमेशा की तरह शानदार था, लेकिन लोगों की नजर जिस चीज पर सबसे ज्यादा ठहरी, वह थी उनकी अजरक सिल्क टाई।

क्रिस्टोफर नोलन ने पहनी अजरक टाई

क्रिस्टोफर नोलन ने पहनी अजरक टाई

दिलचस्प बात यह है कि पिछले कुछ समय में आलिया भट्ट समेत कई भारतीय सेलेब्स भी अजरक प्रिंट को अपने स्टाइल का हिस्सा बना चुके हैं। यानी जो फैब्रिक कभी कारीगरों की बस्तियों तक सीमित था, वही आज इंटरनेशनल रेड कार्पेट पर स्टाइल स्टेटमेंट बन चुका है। लेकिन आखिर अजरक है क्या? इसकी कहानी हजारों रंगों और सदियों पुरानी परंपरा से होकर गुजरती है।

सबसे पहले जानिए, अजरक आखिर है क्या?

अजरक सिर्फ एक प्रिंट नहीं, बल्कि कपड़े पर हाथ से की जाने वाली बेहद बारीक ब्लॉक प्रिंटिंग कला है। इसकी पहचान गहरे नीले (इंडिगो), लाल, काले और सफेद रंगों से होती है। कपड़े पर ज्यामितीय डिजाइन, सितारे, फूल और पारंपरिक पैटर्न बनाए जाते हैं। अजरक की खासियत यह है कि इसमें मशीन नहीं, बल्कि कारीगरों के हाथों का जादू दिखाई देता है।

अजरक प्रिंट

अजरक प्रिंट

हजारों साल पुराना है इतिहास

अजरक का इतिहास करीब 4000-4500 साल पुराना माना जाता है। भारत में इसका सबसे मजबूत संबंध गुजरात के कच्छ और राजस्थान के बाड़मेर से है। सिंध क्षेत्र की परंपरा से जुड़ी यह कला समय के साथ पश्चिम भारत में खूब विकसित हुई। आज भी कच्छ के कई परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी इसी कला को आगे बढ़ा रहे हैं।

कैसे तैयार होते हैं अजरक प्रिंट के रंग

कैसे तैयार होते हैं अजरक प्रिंट के रंग

खूबसूरत रंगों का मेल है - अजरक

अगर आपको लगता है कि यह सिर्फ एक प्रिंट है, तो आप हैरान रह जाएंगे। अजरक खूबसूरत प्राकृतिक रंगों का मेल है। इसमें पारंपरिक रूप से इंडिगो (नीला), मदर रूट से लाल, अनार के छिलके, लौह घोल और अन्य प्राकृतिक स्रोतों से बने रंगों का इस्तेमाल किया जाता रहा है।

साड़ी से लेकर टाई तक का सफर..

बदलते फैशन के दौर में हजारों साल पुराने अजरक के मायने भी बदल चुके हैं। पहले अजरक का इस्तेमाल दुपट्टों, साड़ियों और पगड़ियों तक सीमित था। अब यही प्रिंट टाई, ब्लेज़र, जैकेट, शर्ट, ड्रेस, बैग, स्कार्फ और यहां तक कि स्नीकर्स पर भी नजर आने लगा है।

हाल ही में मशहूर हॉलीवुड डायरेक्टर क्रिस्टोफर नोलन ने जो अजरक प्रिंट की सिल्क टाई पहनी थी। वो इसी बदलाव की एक खूबसूरत मिसाल है कि, कैसे भारत की हजारों साल पुरानी कलाएं आज दुनिया भर में नाम कमा रही हैं।

बॉलीवुड भी अजरक का फैन बन चुका है

पिछले कुछ समय में आलिया भट्ट, फातिमा शेख, नीता अंबानी, कंगना रनौत, तारा सुतारिया, नीतू कपूर सहित कई भारतीय कलाकार अजरक प्रिंट वाले आउटफिट्स में नजर आए हैं। कभी साड़ी, कभी को-ऑर्ड सेट, तो कभी जैकेट, अजरक अब सिर्फ ट्रेडिशनल नहीं, बल्कि स्मार्ट और मॉडर्न फैशन का हिस्सा बन चुका है।

अजरक सिर्फ फैशन नहीं

जब आप अजरक पहनते हैं, तो आप सिर्फ एक खूबसूरत कपड़ा नहीं पहन रहे होते, बल्कि उस कला को भी सम्मान दे रहे होते हैं जिसे कारीगरों ने पीढ़ियों तक संभालकर रखा है। हर ब्लॉक प्रिंट, हर रंग और हर पैटर्न के पीछे घंटों की मेहनत और सालों का अनुभव छिपा होता है।

आज अजरक इतना ट्रेंड में क्यों है?

आज की फैशन दुनिया में लोग ऐसी चीजें पसंद कर रहे हैं जिनकी अपनी कहानी हो। अजरक बिल्कुल वैसा ही फैब्रिक है। यह दिखने में स्टाइलिश है, हाथ से तैयार होता है, भारतीय विरासत से जुड़ा है और हर कपड़े को अलग पहचान देता है। शायद यही वजह है कि अब यह सिर्फ गुजरात या राजस्थान तक सीमित नहीं, बल्कि हॉलीवुड के रेड कार्पेट तक पहुंच चुका है।

असली अजरक कैसे पहचानें?

असली अजरक की पहचान उसके हाथ से बने प्रिंट, बारीक डिजाइन और प्राकृतिक रंगों से होती है। इसके रंग बहुत चमकीले नहीं, बल्कि गहरे और सॉफ्ट दिखाई देते हैं।

कई बार कपड़े के दोनों तरफ प्रिंट साफ नजर आता है, जो अच्छी कारीगरी की निशानी है। साथ ही, इसमें मशीन से बने कपड़ों जैसी एक जैसी फिनिश नहीं, बल्कि हाथ के काम की खूबसूरती साफ दिखाई देती है।

अजरक का सफर वाकई कमाल का है। कभी यह गुजरात और राजस्थान के कारीगरों की छोटी-सी बस्तियों तक सीमित था, लेकिन आज इसकी पहचान दुनिया के सबसे बड़े रेड कार्पेट तक पहुंच चुकी है। यह सिर्फ एक खूबसूरत फैब्रिक नहीं, बल्कि भारत की कला, मेहनत और परंपरा की कहानी है। अगली बार जब आप अजरक पहनें, तो याद रखिए कि आप सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि अपनी विरासत को भी आगे बढ़ा रहे हैं।

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