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डेंगू-मलेरिया के अलावा इन 3 वायरस से भी हो सकता है इंसेफेलाइटिस, ICMR ने किया अलर्ट

Encephalitis virus India: भारत में इंसेफेलाइटिस यानी दिमाग में सूजन का खतरा केवल डेंगू और मलेरिया तक सीमित नहीं है। ICMR की नई रिपोर्ट में तीन और वायरस को इस गंभीर बीमारी से जुड़ा पाया गया है। ये वायरस अचानक तेज बुखार, सिरदर्द और दिमागी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। ऐसे में लोगों के लिए इनके लक्षण, कारण और बचाव के तरीकों को समझना बेहद जरूरी है ताकि समय रहते इलाज कराया जा सके और गंभीर स्थिति से बचा जा सके।

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वायरस जो बन सकते हैं इंसेफेलाइटिस की वजह

Encephalitis virus India: भारत में जब भी इंसेफेलाइटिस यानी दिमाग में सूजन की बीमारी की बात होती है तो आमतौर पर लोग इसे डेंगू, मलेरिया या जापानी इंसेफेलाइटिस से जोड़कर देखते हैं। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस बीमारी को लेकर एक नई चेतावनी दी है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में इंसेफेलाइटिस के मामलों के पीछे तीन और वायरस भी जिम्मेदार पाए गए हैं। इन वायरस के कारण अचानक तेज बुखार, उलझन, दौरे और दिमाग से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते पहचान और इलाज बेहद जरूरी है, क्योंकि कई मामलों में यह बीमारी जानलेवा भी बन सकती है।

इंसेफेलाइटिस क्या है और क्यों है खतरनाक

इंसेफेलाइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें दिमाग में सूजन आ जाती है। यह आमतौर पर किसी वायरस के संक्रमण के कारण होता है। जब वायरस शरीर में प्रवेश करता है तो वह सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है।

इस बीमारी में मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, मानसिक भ्रम, बोलने में परेशानी और कई बार दौरे भी पड़ सकते हैं। गंभीर मामलों में मरीज कोमा में भी जा सकता है। इसलिए डॉक्टर इसे बेहद गंभीर बीमारी मानते हैं और समय पर इलाज को सबसे जरूरी बताते हैं।

ICMR ने किन तीन वायरस को लेकर दी चेतावनी

ICMR की रिपोर्ट के अनुसार, इंसेफेलाइटिस के मामलों में तीन नए वायरस की भूमिका सामने आई है। इनमें सबसे प्रमुख चांदीपुरा वायरस (Chandipura virus) है, जो पहले भी भारत में कुछ जगहों पर फैल चुका है और खासकर बच्चों में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है।

इसके अलावा दो अन्य वायरस भी सामने आए हैं जो मस्तिष्क से जुड़ी सूजन और इंसेफेलाइटिस जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन वायरस की पहचान से यह समझने में मदद मिलेगी कि इंसेफेलाइटिस के कई मामलों का असली कारण क्या है।

बच्चों में ज्यादा खतरा क्यों माना जाता है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इन वायरस से होने वाला इंसेफेलाइटिस खासतौर पर बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है। कई मामलों में यह बीमारी अचानक तेज बुखार से शुरू होती है और कुछ ही घंटों या दिनों में दिमाग पर असर डाल सकती है।

बच्चों की इम्यूनिटी पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए वायरस का असर उनके शरीर पर ज्यादा तेजी से हो सकता है। इसी वजह से डॉक्टर किसी भी बच्चे को अचानक तेज बुखार, उल्टी, बेहोशी या दौरे जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल ले जाने की सलाह देते हैं।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

इंसेफेलाइटिस के लक्षण शुरू में सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये गंभीर हो सकते हैं। मरीज को तेज बुखार, तेज सिरदर्द, उल्टी, गर्दन में जकड़न और शरीर में कमजोरी महसूस हो सकती है।

कुछ मामलों में मरीज को भ्रम होने लगता है, बोलने में दिक्कत होती है या दौरे पड़ सकते हैं। अगर ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि देर होने पर स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है।

बचाव और सावधानी क्यों है जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए सबसे जरूरी है संक्रमण से बचना और समय पर इलाज कराना। साफ-सफाई का ध्यान रखना, मच्छरों से बचाव करना और बुखार या न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को नजरअंदाज न करना बेहद जरूरी है।

डॉक्टरों का मानना है कि अगर मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाया जाए तो कई मामलों में गंभीर स्थिति से बचाया जा सकता है। इसलिए लोगों को इस बीमारी के लक्षणों और कारणों के बारे में जागरूक रहना बहुत जरूरी है।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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