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उरी हमला...फिर PoK में सर्जिकल स्ट्राइक...10 साल पहले की वो घटना जिसने बदल दिया आतंकवाद से निपटने का नजरिया

18 सितंबर 2016 की तड़के सुबह लगभग 5:30 बजे, जब ज्यादातर जवान सो रहे थे या अपनी ड्यूटी की अदला-बदली की तैयारी कर रहे थे। आतंकियों ने नियंत्रण रेखा (LoC) के पास स्थित 12वें ब्रिगेड मुख्यालय के प्रशासनिक क्षेत्र को निशाना बनाया था।

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Photo : PTI
उरी हमला और भारत की सर्जिकल स्ट्राइक
Authored by: अमित कुमार मंडल
Updated Sep 29, 2026, 14:49 IST
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18 सितंबर 2016 को जम्मू-कश्मीर के उरी (Uri) सैन्य शिविर पर हुआ आतंकी हमला भारतीय सेना के इतिहास का सबसे दर्दनाक दिन बन गया था, जिसमें 18 जवान शहीद हो गए थे। हालांकि, तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर द्वारा लिए गए साहसिक निर्णयों, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कड़े राजनीतिक नेतृत्व और सेना के रणनीतिक कौशल ने 28-29 सितंबर की रात पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया। 28-29 सितंबर की रात को भारतीय सेना के जांबांजों ने पीओके में घुसकर ऐसे साहसिक कार्य को अंजाम दिया जिसे जानकर पूरा भारत चकित रह गया। इस ऐतिहासिक कार्रवाई ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति, आतंकवाद-रोधी रणनीति और सामरिक दृष्टिकोण को हमेशा के लिए बदल दिया। कैसे दिया था इसे अंजाम और क्यों भारतीय सेना उठाया इतना सख्त कदम, विस्तार से जानते हैं।

उरी हमले का दर्द और मनोहर पर्रिकर की तत्परता

18 सितंबर 2016 की तड़के सुबह लगभग 5:30 बजे, जब ज्यादातर जवान सो रहे थे या अपनी ड्यूटी की अदला-बदली की तैयारी कर रहे थे। आतंकियों ने नियंत्रण रेखा (LoC) के पास स्थित 12वें ब्रिगेड मुख्यालय के प्रशासनिक क्षेत्र को निशाना बनाया। भारी हथियारों से लैस 4 जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) के आतंकवादी सीमा पार (पाकिस्तान) से घुसपैठ करके आए थे। आतंकियों ने बैरकों और तंबुओं पर एके-47 और ग्रेनेड से अंधाधुंध हमला बोला। हमले के दौरान ईंधन/एलपीजी सिलेंडरों और तंबुओं में आग लग गई, जो तेजी से फैल गई। इस हमले में भारतीय सेना के 18 जांबाज जवान शहीद हो गए (बाद में इलाज के दौरान कुछ और गंभीर रूप से घायल जवानों के दम तोड़ने से यह संख्या 19 हो गई) और 30 से अधिक जवान घायल हुए। हमले के तुरंत बाद सेना के कमांडोज और सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया।

लगभग 3 से 4 घंटे चली भीषण गोलीबारी के बाद भारतीय सेना ने चारों आतंकवादियों को मौके पर ही ढेर कर दिया। मारे गए आतंकियों के पास से 4 एके-47 राइफलें, अंडर-बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (UBGL), भारी मात्रा में हैंड ग्रेनेड, जीपीएस डिवाइस और पाकिस्तानी छापों वाले खाद्य पदार्थ बरामद हुए, जिनसे उनके तार पाकिस्तान से जुड़े होने के पुख्ता सबूत मिले।यह हमला खत्म भी नहीं हुआ था कि रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने खुद श्रीनगर पहुंचने का फैसला किया। सैन्य अधिकारियों द्वारा उरी क्षेत्र में सुरक्षा जोखिमों की चेतावनी देने के बावजूद पर्रिकर ने उरी सैन्य अस्पताल का दौरा किया और घायलों से मिले। इसी से अंदाजा लग गया कि वह इस हमले को लेकर कितने आहत हैं।

ऑपरेशन की गुप्त योजना, केवल 18 लोगों को थी खबर

उरी में ही पर्रिकर ने शीर्ष सैन्य कमांडरों को स्पष्ट संदेश दिया कि इस बार जवाब सिर्फ कूटनीतिक नहीं होगा, बल्कि सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद को उसके घर में घुसकर करारा जवाब दिया जाएगा। उरी हमले के बाद सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग, चिनार कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ और स्पेशल फोर्सेज के कमांडरों ने मिलकर इस गुप्त अभियान का खाका तैयार किया। इस पूरे मिशन की अंतिम योजना और समय-सारणी केवल 18 शीर्ष अधिकारियों तक सीमित रखी गई थी।

सुरक्षा में चूक रोकने के लिए ऑपरेशन्स रूम में कंप्यूटर और पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। सभी नक्शे हाथ से बनाए गए और बैठक के बाद नष्ट कर दिए गए। उधमपुर स्थित 9 पैरा (SF) और 4 पैरा (SF) के कमांडोज ने दिन में सामान्य गतिविधियां चालू रखीं और रात के अंधेरे में एलओसी पार करके आतंकी लॉन्च पैड्स की सटीक रेकी की।

28-29 सितंबर की रात: 5 घंटे, 7 लॉन्च पैड्स और पूरी सफलता

28 सितंबर की आधी रात के बाद भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेज के जवानों ने एलओसी पार की। दुश्मन की सीमा में प्रहार: कमांडोज ने एलओसी से 500 मीटर से 3 किलोमीटर भीतर घुसकर आतंकियों के 7 अलग-अलग लॉन्च पैड्स को पूरी तरह तबाह कर दिया। एक प्रमुख ठिकाने के पास स्थित ईंधन डिपो में रॉकेट लॉन्चरों से धमाका किया गया, जिसमें भारी संख्या में आतंकी और उनके आका मारे गए। करीब 5 घंटे चले इस ऑपरेशन के बाद सुबह 5 बजे से पहले सभी भारतीय पैरा-कमांडोज बिना किसी नुकसान के सुरक्षित भारतीय सीमा में लौट आए। जब मिशन की सफलता की पुष्टि हुई, तो मनोहर पर्रिकर ने चिनार कोर कमांडर को फोन कर केवल एक शब्द कहा— "Congratulations" (बधाई)।

वो 5 बड़े बदलाव जिसने सुरक्षा नीति को बदला- इस सैन्य कार्रवाई ने भारत के सामरिक दृष्टिकोण में पांच क्रांतिकारी बदलाव किए।

  • सामरिक धैर्य का अंत: भारत ने अपनी दशकों पुरानी उस नीति को त्याग दिया जिसमें आतंकी हमलों के बाद केवल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया जाता था।
  • न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग का खात्मा: पाकिस्तान द्वारा बार-बार दी जाने वाली परमाणु हथियारों की धौंसको भारत ने एक ही झटके में निरस्त कर दिया।
  • 'रेड लाइन' तय की: भारत ने विश्व स्तर पर स्पष्ट कर दिया कि 'आतंकवाद' और 'वार्ता' एक साथ नहीं चल सकते और सीमा पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • सैनिकों के मनोबल में ऐतिहासिक वृद्धि: उरी के घावों पर मरहम लगाते हुए इस कार्रवाई ने न केवल सशस्त्र बलों बल्कि पूरे देश के नागरिक मनोबल को अभूतपूर्व ऊंचाई दी।
  • भावी सैन्य कार्रवाई का आधार: इसी रणनीतिक संकल्प ने आगे चलकर 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान के प्रति कड़े रक्षा रुख का ढांचा तैयार किया।

भारतीय सेना का अद्वितीय साहत बना स्वर्णिम अध्याय

मनोहर पर्रिकर का साहसिक नेतृत्व, पीएम मोदी की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और भारतीय सेना की अद्वितीय वीरता का यह संगम भारत की रक्षा नीति का एक स्वर्णिम अध्याय बन चुका है। इसी इच्छाशक्ति के दम पर भारत ने बैसरन घाटी आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देकर पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। इसमें कई आतंकी मारे गए और पाकिस्तान को गहरी चोट पहुंची। पाकिस्तान ने सोचा भी नहीं था कि उसके अंदरुनी ठिकानों तक भारत की सटीक पहुंच है, उसने पलटवार की भी कोशिश की, लेकिन भारत की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और अलर्ट के कारण नाकाम ही रहा।

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