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Child Pocket Money: बच्चों को कब और कितनी देनी चाहिए पॉकेट मनी? जानें बच्चों के लिए क्यों जरूरी है जेब खर्च

What is the right age of pocket money for kids: बच्चों की पॉकेटमनी को लेकर कई पेरेंट्स कन्फ्यूज रहते हैं। उन्हें समझ में नहीं आता कि बच्चों को कब से जेब खर्च देना शुरू करना है। उनके मन में ये भी सवाल रहता है कि बच्चों को कितनी पॉकेट मनी दें। यहां ऐसे सभी सवालों का जवाब देने की कोशिश की गई है।

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बच्चों को कब और कितना दें जेब खर्च (Photo: Pexels)

How much pocket money should be given to child: बढ़ती उम्र के माता-पिता के लिए पेरेंटिंग में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं चुनौतियों में से एक है पॉकेट मनी। उनके सामने अकसर ये सवाल खड़ा रहता है कि बच्चों को कितनी पॉकेट मनी दी जाए। वह अकसर इस बात को लेकर भी असमंजस में रहते हैं आखिर बच्चों को पॉकेट मनी देना किस उम्र से शुरू कर देना चाहिए। इन सवालों का कोई सटीक जवाब नहीं है, क्योंकि बच्चों की पॉकेट मनी परिवार सहित दूसरी चीजों पर निर्भर करता है। फिर भी आइए समझते हैं बच्चों को कब और कितना पॉकेट मनी देना है और बतौर पेरेंट्स किन बातों का ध्यान रखना है:

बच्चों के लिए पॉकेट मनी क्यों जरूरी है?

बच्चों को जेब खर्च पर विशेषज्ञों के अलग-अलग मत हैं। लेकिन अगर सबकी बातों का निचोड़ निकालें तो एक चीज समझ में आती है कि बच्चों को पॉकेट मनी देने का सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि वह पैसे की कीमत को समझ पाता है। वह पैसों की अहमियत के साथ ही यह भी सीख पाता है कि बचत कैसे की जाती है।

बच्चों को कितनी पॉकेट मनी देनी चाहिए?

जेब खर्च बच्चे को बना और बिगाड़ भी सकती है। बच्चों को सोच-समझ कर जेब खर्च देना चाहिए। जेब खर्च की रकम तय करते वक्त बतौर पेरेंट्स पहले ये जानें कि आपका बच्चा किस पर उस पैसे को खर्च करता है। उसके वाजिब खर्च को देखते हुए पॉकेट मनी तय करें। अगर बच्चा पॉकेट मनी बढ़ाने के लिए कहे तो उसे तुरंत मना ना करें। उसकी जरूरतों को समझें। अगर उसकी मांग अनायास है तो उसे पैसे की कीमत समझाएं।

किस उम्र से बच्चों को देना शुरू कर दें जेब खर्च

बच्चों को जेब खर्च देने का कोई संबंध उनकी उम्र से नहीं है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चे जब से चीजें खरीदना और जोड़ घटाव करना सीख जाएं तब से उन्हें पॉकेट मनी दी जा सकती है। अगर बच्चे को जेब खर्च देना बहुत जरूरी है तो उसे पहले पैसे का सही इस्तेमाल सिखाएं। पैसों को लेकर उसकी समझ विकसित होने के बाद ही उसे जेब खर्च देना शुरू करें।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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