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रोमांस की राजधानी बनने से पहले कैसा था पेरिस? कभी कहलाता था 'ल्यूटेशिया', फिर कैसे बदला नाम

Paris: माना जाता है कि करीब 2000 साल पहले 8 जुलाई की तारीख को ही पेरिस की नींव पड़ी थी। सालों से ये शहर रोमांस, कला, फैशन, शिक्षा और इतिहास का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे हुआ इस शहर का जन्म और क्या पड़ा ये नाम।

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कहानी पेरिस की: कैसे बसा ये शहर, क्यों मिला ये नाम (Photos: iStock)

History of Paris: आज अगर दुनिया के सबसे खूबसूरत शहरों का जिक्र किया जाए, तो पेरिस का नाम उसमें जरूर होगा। फैशन की राजधानी, कला का केंद्र और रोमांस का शहर माना जाने वाला पेरिस अपने अंदर ना जाने कितनी ही खूबियां छिपाए बैठा है। तभी तो हर साल करोड़ों की संख्या में सैलानी हर साल यहां पहुंचते हैं। पेरिस जितना खूबसूरत शहर है उतना ही रोमांचक इसका इतिहास भी है। आइए जानते हैं कि आखिर दुनिया के नक्शे पर कब और कैसे उभरा ये शहर और इसका नाम पेरिस कैसे पड़ा:

छोटे से आइलैंड से हुई शुरुआत

आज का आधुनिक पेरिस कभी इतना विशाल नहीं था। इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि इसकी नींव करीब 2000 साल पहले पड़ी थी। उन दिनों यहां सीन नदी के बीच एक छोटे से द्वीप पर एक खास जनजाति के लोग रहते थे। यह आइलैंड आज आइल द ला सिते के नाम से जाना जाता है। इसे ही पेरिस शहर का जनक भी माना जाता है।

ये आइलैंड व्यापार और सुरक्षा, दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण था। चारों ओर नदी होने की वजह से दुश्मनों से बचाव आसान था और नावों के जरिए व्यापार भी तेजी से होता था। यही कारण था कि धीरे-धीरे यहां आबादी बढ़ने लगी और ये द्वीप विकसित विकसित होने लगा। विकसित होने के क्रम में इसे नाम मिला पेरिसि।

छोटे से आइलैंड से निकला दुनिया का सबसे दिलचस्प शहर (Photo: Wikipedia)

छोटे से आइलैंड से निकला दुनिया का सबसे दिलचस्प शहर (Photo: Wikipedia)

कैसे पड़ा पेरिस नाम

पेरिसि नाम एक सेल्टिक जनजाति से जुड़ा है। ईसा के करीब 250 साल पहले ये जनजाति सीन नदी के आसपास रहती थी। इन लोगों ने ही यहां बस्तियां बसाईं और व्यापार शुरू किया। उन्होंने स्थानीय संस्कृति को बचाने और बढ़ाने का भी खूब काम किया था। इसी जनजाति के नाम पर द्वीप पर बसी बस्ती को पेरिसि नाम दिया गया। यही पेरिसि आगे चलकर पेरिस कहलाया जाने लगा।

रोमन साम्राज्य में सजा शहर

पहली शताब्दी से पहले इस बस्ती पर रोमन साम्राज्य का कब्जा हो गया। उन्होंने इसका नाम पेरिसि से बदलकर ल्यूटेशिया कर दिया। पहली शताब्दी ईस्वी में रोमन शासकों ने यहां सड़कें बनाईं, पुल बनवाए और आलीशान भवनों का निर्माण कराया। पेरिसि नाम का छोटा-सा कस्बा एक व्यवस्थित शहर में बदलने लगा।

रोमन साम्राज्य में सजा शहर (Photo: iStock)

रोमन साम्राज्य में सजा शहर (Photo: iStock)

यहां शिक्षा, कला, फैशन, संस्कृति और इतिहास का ऐसा संगम हुआ कि शहर दुनिया भर में चर्चा का केंद्र बनने लगा। दूर-दूर से व्यापारी यहां पहुंचते। उनके साथ उनकी कला और संस्कृति भी पहुंचती। हमेशा यहां कुछ ना कुछ सार्थक और नया होता रहा। इन सबके बीच हर समय, काल और परिस्थिति में स्थानीय लोगों की पहचान ज्यादा मजबूत रही। इसी कारण ल्यूटिशिया फिर से 'पेरिस' कहलाया जाने लगा।

जब फ्रांस की राजधानी बनी पेरिस

पांचवीं शताब्दी में फ्रैंकिश राजा क्लोविस प्रथम ने पेरिस को अपनी राजधानी बनाया। यहीं से इस शहर की राजनीतिक अहमियत तेजी से बढ़ने लगी। मध्यकाल आते-आते पेरिस यूरोप का प्रमुख धार्मिक, शैक्षणिक और व्यापारिक केंद्र बन चुका था।

12वीं और 13वीं शताब्दी में यहां दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में से एक सोरबोन यूनिवर्सिटी बनाई गई। इसके बाद तो दुनियाभर के विद्वान, कलाकार और लेखकों यहां बड़ी तादाद में पहुंचने लगे। इन लोगों को भी पेरिस का शिल्पकार माना जाता है।

क्रांति से फैशन की राजधानी बनने तक का सफर

1789 की फ्रांस की क्रांति हुई। इसने पेरिस को पूरी दुनिया में नई पहचान दिलाई। इसी शहर की गलियों से राजशाही के खिलाफ आवाज उठी, जिसने न सिर्फ फ्रांस बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति को नई दिशा दी। दूसरे देशों ने भी राजशाही के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की। फ्रांस की क्रांति ने पूरे विश्व के इतिहास को बदलकर रख दिया।

पेरिस की धरती ने बदला दुनिया का इतिहास (Photo: Wikipedia)

पेरिस की धरती ने बदला दुनिया का इतिहास (Photo: Wikipedia)

19वीं शताब्दी में बहुत ज्यादा बदल गया पेरिस। शहर का बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण हुआ। चौड़ी सड़कें, सुंदर बुलेवार्ड, पार्क और भव्य इमारतें बनाई गईं। यही वह दौर था, जब आधुनिक पेरिस का स्वरूप आकार लेने लगा। धीरे-धीरे यहां फैशन, कला, साहित्य और संस्कृति का ऐसा विकास हुआ कि पेरिस दुनिया की सांस्कृतिक राजधानी कहलाने लगा।

'सिटी ऑफ लाइट'क्यों कहलाया पेरिस

बहुत से लोग मानते हैं कि पेरिस को 'सिटी ऑफ लाइट' इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये रात में ये शहर अपनी जगमगाती रोशनी से बेहद आकर्षक नजर आता है। लेकिन ऐसा नहीं है। इसके पीछे भी एक खास वजह है।

दरअसल 18वीं शताब्दी के एज ऑफ एनलाइटनमेंट के दौरान यह शहर विज्ञान, दर्शन और विचारों का प्रमुख केंद्र बन चुका था। यहां के बुद्धजीवियों का ज्ञान और शहर की रोशनी ने मिलकर पेरिस को सिटी ऑफ लाइट नाम से मशहूर कर दिया।

दुनियाभर की संस्कृति का केंद्र है पेरिस (Photo: iStock)

दुनियाभर की संस्कृति का केंद्र है पेरिस (Photo: iStock)

आज भी पेरिस पूरी दुनिया की सांस्कृतिक धरोहर है। यहां सदियों पुराने चर्च, महल और म्यूजियम आधुनिक फैशन, डिजाइन और तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। तो कुछ इस प्रकार से सीन नदी के किनारे बसी छोटी सी बस्ती आज पेरिस बनकर दुनियाभर के लोगों को अपनी ओर खींच रही है।

Suneet Singh
सुनीत सिंह author

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे ... और देखें

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