Hasrat Jaipuri Shayari in Hindi: उर्दू शायर और हिंदी सिनेमा के मशहूर गीतकार हसरत जयपुरी का असली नाम इकबाल हुसैन था। जयपुर में जन्मे, हसरत ने अपनी शायरी की शुरुआत मुशायरों से की, लेकिन उनकी प्रतिभा को असली पहचान राज कपूर की फिल्मों से मिली। 1949 में 'बरसात' के गीत "जिया बेकरार है" ने उन्हें रातोंरात मशहूर कर दिया। हसरत की लेखनी में उर्दू शायरी की गहराई और हिंदी की सरलता का अनूठा संगम था। उनके गीत, जैसे "ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर" और "पंछी बनूं उड़ता फिरूं", प्रेम और प्रकृति की खूबसूरती को दर्शाते हैं। उनकी शायरी में जयपुर की संस्कृति और प्रेम का रंग झलकता था। आइए नजर डालते हैं हसरत जयपुरी के चुनिंदा बेहतरीन शायरी पर एक नजर:
1. कहीं वो आ के मिटा दें न इंतिज़ार का लुत्फ़
कहीं क़ुबूल न हो जाए इल्तिजा मेरी
2. जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूं नहीं देते
ख़त किस लिए रक्खे हैं जला क्यूं नहीं देते
3. ख़ुदा जाने किस किस की ये जान लेगी
वो क़ातिल अदा वो क़ज़ा महकी महकी
4. किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा नाम
मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूं तो मिटा क्यूं नहीं देते
5. हम रातों को उठ उठ के जिन के लिए रोते हैं
वो ग़ैर की बांहों में आराम से सोते हैं
6. ये किस ने कहा है मिरी तक़दीर बना दे
आ अपने ही हाथों से मिटाने के लिए आ
7. दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे
हर रस्म-ए-मोहब्बत को मिटाने के लिए आ
8. ज़रा सामने तो आओ छुपने वाले,
कहां गए तुम हमें ढूंढते हैं ये नाले.
9. जाने बहारों शरमाओ ना, हमसे नज़रें चुराओ ना,
सब कुछ कहो दिल की जुबां से, कुछ भी छुपाओ ना
10. रात और दिन दीवाना फिरता है,
मधुबन में एक नग़मा गाता है
11. मैं प्यार का राही हूं, चलते रहना है
मंज़िल पे पहुंच कर भी, चलना मेरा काम है
12. आप यूं फ़ासलों से गुज़रते रहे,
दिल से क़दमों की आहट गुजरती रही
निजी जीवन में सादगी पसंद हसरत ने उर्दू साहित्य को भी समृद्ध किया। उनकी मृत्यु के बाद भी उनके गीत और ग़ज़लें आज भी दिलों को छूती हैं।
