फ्रेंडशिप डे (Friendship Day) आते ही सोशल मीडिया दोस्ती के रंगों से भर जाता है। कहीं पुरानी तस्वीरें शेयर होती हैं, तो कहीं 'बेस्ट फ्रेंड' के लिए लंबे-लंबे पोस्ट लिखे जाते हैं। ऐसा लगता है मानो दोस्ती का मतलब सिर्फ साथ हंसना, घूमना और यादें बनाना भर हो। सच तो ये है कि मित्रता का असली मतलब मुश्किल समय में समझ आता है। यही बात मिर्जा गालिब अपने इस शेर में कहते हैं:
"ये कहां की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह
कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता.."
गालिब के इस शेर में यहां 'नासेह' का अर्थ है उपदेश देने वाला या हर समय नसीहत देने वाला शख्स। गालिब अपने दोस्त से शिकायत करते हैं कि अगर दोस्ती निभानी थी, तो केवल सलाह देने वाले क्यों बन गए? अगर सचमुच दोस्त होते, तो 'चारासाज' बनते, यानी मेरी तकलीफ का इलाज खोजते। या फिर 'गम-गुसार' बनते, यानी मेरे दुख को बांटने वाले साथी बनते। यही इस शेर की सबसे बड़ी खूबसूरती है। यह दोस्ती की परिभाषा बदल देता है।
हम सबके जिंदगी में ऐसे लोग होते हैं, जो मुश्किल आने पर सलाह देने लगते हैं। कोई कहता है तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। कोई कहता है मैंने पहले ही मना किया था। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं, जो बिना आपको जज किये सिर्फ आपके पास बैठ जाएं और कहें- मैं हूं, चिंता मत करो। गालिब का शेर इन्हीं दो तरह के लोगों के बीच का फर्क समझाता है।
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आज के समय में यह बात और भी प्रासंगिक हो जाती है। सोशल मीडिया ने दोस्तों की संख्या बढ़ा दी है, लेकिन क्या उसने गम-गुसार भी बढ़ाए हैं? हमारी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सैकड़ों नाम हो सकते हैं, लेकिन रात के दो बजे हम कितने लोगों को फोन कर सकते हैं? शायद यही सवाल दोस्ती की असली गहराई तय करता है।
कई बार किसी समस्या का समाधान तुरंत नहीं मिलता, लेकिन यह भरोसा कि कोई हमारे साथ खड़ा है, कठिन समय को थोड़ा आसान बना देता है। यही 'गम-गुसार' होने का अर्थ है। इसका मतलब यह नहीं कि दोस्त कभी सलाह न दें। सच्चा दोस्त गलत बात पर रोकता भी है और सच भी कहता है। लेकिन उसके शब्दों में निर्णय नहीं, अपनापन होता है। वह केवल यह नहीं बताता कि गलती कहां हुई, वह यह भी पूछता है कि अब इससे बाहर कैसे निकला जाए।
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शायद इसलिए गालिब का यह शेर दिखावे की दोस्ती के शोर में भी अलग सुनाई देता है। यह हमें बताता है कि दोस्ती केवल जन्मदिन की बधाई, सेल्फी या यादों का नाम नहीं है। दोस्ती का सबसे सुंदर रूप वह है, जब कोई व्यक्ति आपके दुख का बोझ हल्का करने की कोशिश करे।
फ्रेंडशिप डे पर अगर इस शेर से एक बात सीखनी हो, तो वह यही होगी कि अच्छा दोस्त वह नहीं, जो हर समय आपको सही-गलत समझाता रहे। अच्छा दोस्त वह है, जो आपके कठिन दिनों में आपके साथ खड़ा रहे। क्योंकि जिंदगी में नासेह बहुत मिल जाते हैं, लेकिन चारासाज़ और गम-गुसार बहुत कम।
