Manoj Jarange : महाराष्ट्र में समाजसेवी मनोज जरांगे ने अपना अनशन खत्म कर दिया है। मराठा आरक्षण के तहत कुनबी सर्टिफिकेट देने और युवाओं की रोजगार की मांग के साथ मुम्बई के लिए रवाना हुए मराठा नेता ने बुधवार सुबह 6 बजे सरकार के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात और चर्चा के बाद अपना अनशन स्थगित करने का निर्णय लिया। जरांगे द्वारा अनशन खत्म किए जाने से फडणवीस सरकार को बड़ी राहत मिली है।
तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में थे भर्ती
हालांकि, अपनी मांगें पूरी करने के लिए उन्होंने फड़णवीस सरकार को 3 महीने का समय दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने तीन महीने के अंदर यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की तो वह दोबारा मुंबई कूच करेंगे। जरांगे ने कहा कि अनशन भले ही खत्म हुआ है लेकिन आंदोलन जारी रहेगा। बता दें कि जरांगे जालना में अपने गांव अंतरावली सैराट से हजारों समर्थकों साथ मुम्बई के लिए रवाना हुए थे। अनशन के चलते बुधवार रात बीड़ में उनकी तबीयत खराब हुई थी जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
आंदोलन के समय पर फड़णवीस ने उठाए थे सवाल
जरांगे ने बीड जिले के पाटोदा में मंत्रियों राधाकृष्ण विखे पाटिल और दादा भुसे, विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) प्रसाद लाड, विधायक सुरेश धस तथा वरिष्ठ अधिकारियों वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के बाद यह घोषणा की। यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान के कुछ दिन बाद सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार किसी भी तरह की डराने-धमकाने की रणनीति को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने गणेश उत्सव के दौरान आंदोलन किए जाने पर भी सवाल उठाया था।
मुंबई कूच के दौरान पाटोदा में रुके थे जरांगे
पाटोदा में जरांगे से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने उन्हें मराठा आरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। जरांगे मुंबई कूच के दौरान पाटोदा में रुके थे। विखे पाटिल ने सुझाव दिया कि जरांगे अपनी मांगों पर विचार की प्रक्रिया की प्रगति पर नजर रखने के लिए तीन प्रतिनिधि नियुक्त करें। मंत्री ने कहा, 'महाधिवक्ता से लिखित राय मिलने के बाद कोल्हापुर और सातारा गजट पर काम करने में लगभग तीन-चार महीने का समय लगेगा।’उन्होंने जरांगे से अनशन वापस लेने का भी आग्रह किया।
...तो हम सीधे मुंबई जाएंगे
जरांगे ने कहा कि वह हैदराबाद गजट, सातारा गजट और औंध गजट जैसे ऐतिहासिक प्रशासनिक अभिलेखों को 'आधिकारिक मान्यता’देने संबंधी अपनी मांग पर कायम हैं, ताकि मराठा-कुनबी वंशावली साबित की जा सके और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण का उन्हें लाभ मिल सके।
उन्होंने कहा, 'सरकार को लिखित में देना चाहिए कि एक भी कुनबी अभिलेख की अनदेखी नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री को उस कागज पर हस्ताक्षर भी करने चाहिए।’ जरांगे ने कहा कि यदि सरकार इस आश्वासन से पीछे हटती है, आंदोलन मुंबई पहुंचेगा। उन्होंने कहा, 'अगर हमारे साथ विश्वासघात हुआ, तो हम सभी अपने बच्चों और महिलाओं के साथ सीधे मुंबई जाएंगे।’
