भारत और ब्रिटेन के बीच हुए व्यापार समझौते का असर अब ऑटोमोबाइल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। विदेशी व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने ब्रिटेन से भारत में 642 कारों के आयात को मंजूरी दे दी है। इन गाड़ियों को भारत-UK व्यापार समझौते के तहत मिलने वाली रियायती कस्टम ड्यूटी के प्रावधानों का फायदा मिलेगा।
यह मंजूरी साल 2026 में बचे हुए समय के लिए टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत दी गई है। इसका मतलब है कि तय संख्या में ब्रिटेन से आने वाली कारों पर सामान्य दर की तुलना में काफी कम आयात शुल्क लगाया जाएगा।
2026 के लिए करीब 5,000 गाड़ियों का था कोटा
DGFT ने इसी साल जुलाई में ब्रिटेन से पूरी तरह बनी हुई (CBU) पैसेंजर कारों और कमर्शियल वाहनों के आयात के लिए आवेदन मांगे थे। सरकार ने 2026 के दौरान करीब 5,000 वाहनों के लिए कोटा निर्धारित किया था।
अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में आठ कंपनियों ने आवेदन किया। इनमें से सात कंपनियों के आवेदन स्वीकार किए गए और कुल 642 गाड़ियों के आयात की अनुमति दी गई है। यह 2026 के कोटा के तहत पहला आवंटन बताया जा रहा है।
110% तक की ड्यूटी घटकर 10% हो सकती है
भारत-UK व्यापार समझौते के तहत ब्रिटेन से आने वाली कारों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती का प्रावधान किया गया है। मौजूदा समय में कुछ कारों पर प्रभावी शुल्क करीब 110% तक पहुंच सकता है। समझौते के तहत तय कोटे के भीतर आने वाली गाड़ियों पर यह शुल्क धीरे-धीरे घटकर करीब 10% तक पहुंच सकता है। हालांकि, इसका फायदा हर ब्रिटिश कार को सीधे तौर पर नहीं मिलेगा। कम शुल्क वाली व्यवस्था केवल तय TRQ सीमा के अंदर आने वाले वाहनों पर लागू होगी।
15 साल में 3.78 लाख कारों के आयात की व्यवस्था
व्यापार समझौते के तहत भारत ने शुरुआती 15 वर्षों में ब्रिटेन से करीब 3.78 लाख पारंपरिक इंजन वाली यात्री कारों को रियायती शुल्क पर आयात करने की व्यवस्था की है। इसमें बड़े पैमाने पर बिकने वाली कारों का सेगमेंट भी शामिल है। इस व्यवस्था का मकसद दोनों देशों के बीच ऑटोमोबाइल व्यापार को बढ़ावा देना है। ब्रिटेन से भारत आने वाली योग्य गाड़ियों को निर्धारित कोटे के भीतर कम कस्टम ड्यूटी का लाभ मिल सकेगा।किन कंपनियों को मिलेगा फायदा?
TRQ व्यवस्था के तहत कम या रियायती शुल्क पर केवल तय संख्या में ही वाहन भारत लाए जा सकते हैं। 2026 के लिए आवेदन करने की पात्रता उन कंपनियों के पास थी, जो ब्रिटेन की वाहन निर्माता कंपनियों की अधिकृत OEM, डीलर या चैनल पार्टनर हों। इसलिए भारत में बिकने वाली हर ब्रिटिश कार अपने आप इस कम शुल्क वाली व्यवस्था में शामिल नहीं होगी। इसके लिए वाहन और उसे आयात करने वाली कंपनी को समझौते में तय शर्तों को पूरा करना होगा।642 कारों को मिली यह मंजूरी भारत-UK व्यापार समझौते के तहत ब्रिटिश ऑटोमोबाइल के लिए रियायती आयात व्यवस्था की शुरुआत का एक अहम कदम है। आने वाले समय में कोटे के आधार पर और भी वाहनों को इस सुविधा का लाभ मिल सकता है।
