भारतीय संस्कृति में शादी ना सिर्फ दो लोगों के बीच होती है बल्कि इसमें दो परिवार भी एक साथ आते हैं। जी हां शादी दो परिवारों के बीच भी होती है। भारत में शादी किसी भी इंसान के जीवन का सबसे खास दिन होता है। लोग अपने-अपने रीति रिवाज से एक दूसरे का हाथ थामते हैं और सात जन्मों तक साथ रहने की कसम भी खाते हैं। लेकिन कई बार रिश्तों की डोर ऐसी उलझती है कि बड़े अरमानों से रचाई गई शादी टूट की कगार पर पहुंच जाती है। पति-पत्नी दोनों को शादी बोझ लगने लगती है। साथ रहना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दोनों के पास सिर्फ एक रास्ता नजर आता है। वह है तलाक। पति पत्नी तलाक लेकर अपने -अपने रास्ते चल देते हैं। इसी के साथ खत्म हो जाता है दो परिवारों का रिश्ता भी। लेकिन क्या आपने सोचा है कि लोग तलाक क्यों लेते हैं? कैसे तलाक जैसी स्थिति से बचा जा सकता है? भारत में तलाक के क्या है हालात? तलाक से जुड़े तमाम गंभीर मसलों का जवाब आपको आज यहां मिल जाएगा।

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क्या होता है तलाक (What is Divorce)
तलाक। यह अरबी भाषा का शब्द है। तलाक को अंग्रेज़ी में डिवोर्स कहते हैं। हिंदी में विवाह विच्छेद कहा जाता है। हालांकि जैसे कई उर्दू-अरबी भाषा के शब्दों को लोगों ने हिंदी मान जीवन में उतार लिया है उसी तरह से तलाक भी है। कानूनी तौर पर जब पति पत्नी अपनी वैध शादी को खत्म करने का ऐलान करते हैं उसे तलाक कहा जाता है। तलाक के लिए जरूरी है कोर्ट की मान्यता। कोर्ट तलाक की अर्जी पर सुनवाई करता है। मुकदमे को समझता है। कोशिश करता है कि दो लोगों का तलाक ना हो। अगर उसे लगता है कि तलाक ही दो लोगों के बीच विवाद का निपटारा करता है तो तलाक की इजाजत दे दी जाती है।
किस तरह होता है तलाक (How to get Divorce)
भारत में दो तरह से तलाक होते हैं। एक आपसी सहमति से और दूसरा विवादित तलाक। आपसी सहमति से जो तलाक होते हैं उनमें पति-पत्नी तलाक की अर्जी कोर्ट में डालते हैं। कोर्ट कम से कम 6 महीने का समय देता है विवाद सुलझाने के लिए। हालात ना सुधरने पर निर्धारित शर्तों को मानते हुए पति-पत्नी के तलाक पर मुहर लग जाती है।
अगर पति और पत्नी में से कोई एक तलाक के लिए राजी ना हो तो वह विवादित तलाक या एकतरफा तलाक कहलाता है। यहां दोनों पक्षों में संघर्ष होता है, कानूनी जटिलताएं होती हैं। आरोप प्रत्यारोप होते हैं। ऐसे तलाक के मामले लंबे चलते हैं।

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भारत में तलाक की स्थिति (Divorce Rate in India)
साल 2024 में जारी वर्ल्ड बैंक और OECD की रिपोर्ट्स बताती हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा तलाक की दर पुर्तगाल में है। वहां तलाक की दर 92% है। भारत में तलाक की दर 1 फीसदी के आसपास है। यानी, यहां होने वाली हजार शादियों में से महज एक फीसदी ही तलाक पर खत्म होती है। दुनियाभर की तुलना में भारत की तलाक दर भले ही बहुत कम है, लेकिन इस बात से भी आप इनकार नहीं कर सकते हैं कि देशभर में तलाक के आंकड़े भी तेजी से बढ़ रहे हैं। दिल्ली, मुंबई, और बेंगलुरु जैसे शहरों में तलाक की दर 30 फ़ीसदी से ज़्यादा है।
भारत में तलाक के मामले बढ़ने के कारण (Why Divorce rate growing in India)
भारत में हमेशा से संयुक्त परिवार की संस्कृति रही है। लेकिन समय के साथ ही यह परंपरागत संयुक्त परिवार की प्रथा टूटने लगी है। पहले महिलाएं पूरी तरह से पति पर ही आर्थिक रूप से डिपेंड रही थीं। लेकिन अब ऐसा नहीं है। महिलाएं काम पर जाने लगी हैं या फिर अपना बिजनेस कर रही हैं। भारतीय पतियों की भी सोच में बदलाव आया है। वह भी पहले जैसे पुरुषवादी सोच के नहीं रहें। वे भी घर के काम में हाथ बंटाने लगे हैं। लिंग भेद से जुड़े मामलों में बदलाव आया है। रिश्ते को संभालने की जिम्मेदारी जितनी पत्नी की होती है उतनी ही पति की भी। जब इसी सामंजस्य में समस्या आती है तो शादी तलाक के दहलीज पर खड़ी नजर आती है।

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तलाक के तीन बड़े कारक (Reasons of Divorce)
1. आर्थिक कारक: शादी में तलाक का एक बड़ा कारण आर्थिक होता है। इसमें कई बार ऐसा होता है कि पति के पास उतने पैसे नहीं होते जितना पत्नी की अपेक्षा होती है। हर बार खर्च और पैसों को लेकर दोनों में झिक-झिक होना तलाक जैसी स्थिति पैदा करता है। पत्नी से बार बार दहेज की मांग करना भी तलाक के आर्थिक कारक में शामिल है।
2. भावनात्मक कारक: पति पत्नी के बीच इमोशनल बॉन्डिंग की कमी भी तलाक का बड़ा कारण बनती है। कई बार पति भावनात्मक रूप से एक दूसरे के साथ खड़े नजर नहीं आते। वहीं कई बार दोनों के बीच एक दूसरे के प्रति असम्मान भी भावनात्मक दूरी पैदा करता है। यही भावनात्मक दूरी डिवोर्स का कारण बनती है।
3. संवाद की कमी: पति पत्नी के बीच संवाद की कमी भी तलाक का बड़ा कारण होती है। कई बार पति पत्नी एक दूसरे को इग्नोर करते हैं या फिर किसी भी मुद्दे पर एक दूसरे से संवाद नहीं करते हैं। बातचीत ना करना धीरे-धीरे रिश्ते को कमजोर करने लगता है। एक वक्त ऐसा आता है जब दोनों को लगता है कि हम झूठ-मूठ का ही शादी में हैं। इससे बेहतर तो तलाक लेकर अलग हो जाना है।
तलाक के अन्य कारण भी हो सकते हैं। जैसे रिश्ते में रहकर धोखा देना, घरेलू हिंसा करना, मजबूरी में शादी करना, अपेक्षाओं का पूरा ना होना इत्यादि..

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तलाक की नौबत से बचने के उपाय (Tips to Save Marriage)
शादी को बचाए रखना जितना जरूरी है उतना ही इसका उपाय भी है। आप इन बातों का ध्यान रख हमेशा अपनी शादी में प्रेम और लगाव को बनाए रख सकते हैं। इन बातों को अपने जीवन में उतार आप तलाक की संभावना को हमेशा के लिए दूर रख सकते हैं
1. पति या पत्नी को ये चाहिए कि वह अपने पार्टनर को एक दोस्त की तरह देखें। एक दूसरे के सुख दुख बांटे, लड़े झगड़े और फिर तुरंत एक हो जाएं।
2. पति हो या पत्नी, दोनों को एक दूसरे की पसंद और नापसंद का ख्याल रखना चाहिए। शादी में रहते हुए कोई ऐसा काम ना करें जो आपके पार्टनर को नापसंद है।
3. पति और पत्नी दोनों की शादीशुदा जिंदगी में अपनी कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। दोनों अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह समझें और उन्हें पूरी ईमानदारी से निभाएं।
4. काम के साथ ही निजी जिंदगी का भी ध्यान रखना होगा। आपको अपनी लाख व्यस्तता के बावजूद अपने पार्टनर को समय देना ही होगा।
5. किसी भी झगड़े को इस स्तर तक ना बढाएं कि नौबत हिंसा तक पहुंच जाए। शादीशुदा जिंदगी में मार-पीट की कोई जगह नहीं है।
6. शादी समझौते का नाम है। इसमें आपको कुछ चीजों से समझौता करना पड़ेगा। समय-समय पर अपने व्यवहार और विचार में आपको परिवर्तन लाना होगा। थोड़ा लचीला बनना होगा।
और अंत में..: पति से तलाक लेने वाली पहली भारतीय महिला (First Indian who get Divorced)
भारत की पहली कानूनी तौर पर तलाक लेने वाली महिला रुखमाबाई राउत थीं। साल 1885 में उन्होंने अपने इच्छा के विरूद्ध शादी के खिलाफ लड़ाई लड़ी और तलाक की मांग की थी। इस मामले में रानी विक्टोरिया को उनकी शादी को खत्म करना पड़ा था।
