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Diwali Shayari: और भी रोशन हो जाएगी दीपावली, पढ़ें दिल को छू लेने वाली दिवाली शायरी

Dipawali per Shayari, Diwali par Shayari, Diwali Shayari in Hindi (दिवाली शायरी): आज की रात दिवाली है दिए रौशन हैं, आज की रात ये लगता है मैं सो सकता हूं..अज्म शाकरी ने ये शेर लिखा है। दिवाली पर बहुत से शायरों ने बेहतरीन नज्में लिखी हैं। आइए पढ़ें दिवाली पर लिखे चंद मशहूर शेर।

Diwali Shayari in Hindi

दिवाली पर शायरी

Diwali par Shayari in Hindi, Diwali par Shayariyan: खुशियों का पर्व दीवाली अपने साथ ढेर सारा उमंग लेकर एक बार फिर से आ गया है। दीवाली को बस एक त्योहार कहना गलत होगा। यह तो उम्मीद और उजाले का भी उत्सव है। दीवाली का असली मतलब ही अंधेरे पर उजाले की जीत, अज्ञान पर ज्ञान का उजाला और निराशा पर उम्मीद की विजय है। दिवाली हमें साफ संदेश देती है कि हर अंधेरी रात के बाद सुबह जरूर होती है। इसी दिवाली को बहुत से शायरों ने अपने शेर में उतारा है। आइए पढ़ते हैं दिवाली पर शायरी:

Diwali par Shayari | Diwali ki Shayari

1. रौशनी आधी इधर आधी उधर

इक दिया रक्खा है दीवारों के बीच

- उबैदुल्लाह अलीम

2. आज की रात दिवाली है दिए रौशन हैं

आज की रात ये लगता है मैं सो सकता हूँ

- अज़्म शाकरी

3. है दसहरे में भी यूं गर फरहत-ओ-जीनत 'नजीर'

पर दिवाली भी अजब पाकीजा-तर त्यौहार है

- नजीर अकबराबादी

Diwali Urdu Shayari In Hindi

4. घर पलट कर जो मिरी रौशन-ख़याली आई है

शोर है शहर-ए-सुख़न में फिर दिवाली आई है

- मिराश

5. ये रौशनी यूंही आग़ोश में नहीं आती

चराग बन के मुंडेरों पे जलना पड़ता है

- हसन जमील

6. खिड़कियों से झांकती है रौशनी

बत्तियां जलती हैं घर घर रात में

- मोहम्मद अल्वी

7. हर तरफ फैली हुई थी रौशनी ही रौशनी

वो बहारें थीं कि अब के बाग़ में रस्ता न था

- शहजाद अहमद

Diwali Shayari 2 line

8. रौशन है दरख़्शाँ है हर अश्क ग़रीबों का

बस इन की बदौलत ही हर घर में दिवाली है

- मेहर ज़र्रीं

9. शरार-ए-ग़म से तिरे अलम में ये मेरे दिल के हैं दाग़ रौशन

करे दिवाली को जैसे आलम तमाम घर में चराग़ रौशन

- इशरत बरैल्वी

10. इक अमावस ही तो थी अपनी हयात

मिल गए तुम तो दिवाली हो गई

- नीरज गोस्वामी

11. जो सुनते हैं कि तिरे शहर में दसहरा है

हम अपने घर में दिवाली सजाने लगते हैं

- जमुना प्रसाद राही

12. कुछ गरीबों की गली में भी दिए जल जाएं

इस से बेहतर भी दिवाली का उजाला क्या है

- अजय सहाब

13. मैं इतनी रौशनी फैला चुका हूं

कि बुझ भी जाऊं तो अब गम नहीं है

- महशर बदायूंनी

14. सभी के दीप सुंदर हैं हमारे क्या तुम्हारे क्या

उजाला हर तरफ है इस किनारे उस किनारे क्या

- हफीज बनारसी

15. दोस्तो क्या क्या दिवाली में नशात-ओ-ऐश है

सब मुहय्या है जो इस हंगाम के शायाँ है शय

- नज़ीर अकबराबादी

उम्मीद करते हैं कि दिवाली पर लिखे ये शेर आपको जरूर पसंद आए होंगे। आप चाहे तो दीवाली के दिन इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर भी कर सकते हैं।

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Suneet Singh
Suneet Singh Author

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे ... और देखें

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