Basant Panchami Shayari: बसंत पंचमी 2026 पर पढ़ें पतझड़ बसंत शायरी, यहा देखें बसंत पर शायरी
- Authored by: Suneet Singh
- Updated Jan 23, 2026, 07:33 AM IST
Basant Panchami Shayari in Hindi, Basant Shayari in Hindi (बसंत पंचमी शायरी): आज बसंत पंचमी (Basant Panchami 2026) का पर्वहै। इस खास दिन के साथ ही बसंत ऋतु का आगमन हो जाता है। ठंड कम होने लगती है। बसंत रितु (Basant Ritu Quotes in Hindi) का खुमार हर किसी पर नजर आने लगता है। बसंत पर शायरों ने हिंदी और ऊर्दू में शेर भी लिखे हैं। यहां देखें बसंत रितु पर शायरी(Basant Ritu Par Shayari):
बसंत पर शायरी (Photo: iStock)
Basant Panchami Shayari in Hindi (बसंत पंचमी पर शायरी), Basant Par Shayari: बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। यह वह समय होता है जब प्रकृति अपनी पूरी सुंदरता और जीवंतता के साथ सामने आती है। ठंड की कठोरता धीरे-धीरे कम होने लगती है और मौसम सुहाना, हल्का और खुशनुमा हो जाता है। चारों ओर हरियाली छा जाती है, पेड़ों पर नई कोपलें फूटने लगती हैं और खेतों में सरसों के पीले फूल लहराने लगते हैं। ये नजारे हमेशा से शायरों की कलम के शब्द बनते रहे हैं। जहां तमाम कवियों ने बसंत पर कविताएं लिखीं तो वहीं बहुत से शायरों ने बसंत को अपने शब्दों से सजा शायरी के रूप में पेश किया है। तो आइए पढ़ते हैं बसंत पर शायरी हिंदी में:
Basant Ritu Par Shayari (बसंत पर शेर)| Basant Ritu Quotes in Hindi
1. आया बसंत फूल भी शोलों में ढल गए
मैं चूमने लगा तो मिरे होंट जल गए
- कुमार पाशी
2. क़ुदरत की बरकतें हैं ख़ज़ाना बसंत का
क्या ख़ूब क्या अजीब ज़माना बसंत का
- जितेन्द्र मोहन सिन्हा रहबर
3. हम-रंग की है दून निकल अशरफ़ी के साथ
पाता है आ के रंग-ए-तलाई यहाँ बसंत
- मुनीर शिकोहाबादी
4. टेसू के फूल दश्ना-ए-ख़ूनी हुए उसे
ब्रिहन के जी कूँ है ये कसाई बसंत रुत
- आबरू शाह मुबारक
5. दिल को बहुत अज़ीज़ है आना बसंत का
'रहबर' की ज़िंदगी में समाना बसंत का
- जितेन्द्र मोहन सिन्हा रहबर
6. तू ने लगाई अब की ये क्या आग ऐ बसंत
जिस से कि दिल की आग उठे जाग ऐ बसंत
- इंशा अल्लाह ख़ान इंशा
7. साकी कुछ आज तुझ को ख़बर है बसंत की
हर सू बहार पेश-ए-नज़र है बसंत की
- उफ़ुक़ लखनवी
8. सरसों जो फूली दीदा-ए-जाम-ए-शराब में
बिंत-उल-अनब से करने लगा शोख़ियां बसंत
- मुनीर शिकोहाबादी
9. कुंज कुंज नग़्मा-ज़न बसंत आ गई
अब सजेगी अंजुमन बसंत आ गई
- नासिर काज़मी
10. तस्वीर-ए-रू-ए-यार दिखाना बसंत का
अटखेलियों से दिल को लुभाना बसंत का
- जितेन्द्र मोहन सिन्हा रहबर
11. कोयल नीं आ के कूक सुनाई बसंत रुत
बौराए ख़ास-ओ-आम कि आई बसंत रुत
- आबरू शाह मुबारक
12. हर शाख़ ज़र्द ओ सुर्ख़ ओ सियह हिज्र-ए-यार में
डसते हैं दिल को आन के जूँ नाग ऐ बसंत
- इंशा अल्लाह ख़ान इंशा
13. आएगी जब बसंत-पूर्निमा
मैं किसी का 'शबाब' लिक्खूंगा
- मुईन शादाब
14. बसंत आई है मौज-ए-रंग-ए-गुल है जोश-ए-सहबा है
ख़ुदा के फ़ज़्ल से ऐश-ओ-तरब की अब कमी क्या है
- मह लक़ा चंदा
15. इश्क़ के आते ही मुंह पर मिरे फूली है बसंत
हो गया ज़र्द ये शागिर्द जब उस्ताद आया
- दाग़ देहलवी
16. मिल कर सनम से अपने हंगाम-ए-दिल-कुशाई
हंस कर कहा ये हम ने ऐ जां बसंत आई
- नज़ीर अकबराबादी
17. बात तो जब है कि तुम कहने लगो उस को बसंत
गुल-ओ-गुलज़ार पे जो आने लगी है ज़र्दी
- कर्रार नूरी
18. ख़ाली हाथ अब के गुज़रने न दी पेड़ों ने बसंत
पतझड़ आई तो किसी शाख़ पे पत्ता न मिला
- बिमल कृष्ण अश्क
19. आते नज़र हैं दश्त-ओ-जबल ज़र्द हर तरफ़
है अब के साल ऐसी है ऐ दोस्ताँ बसंत
- इंशा अल्लाह ख़ान इंशा
20. जब नबी-साहिब में कोह-ओ-दश्त से आई बसंत
कर के मुजरा शाह-ए-मर्दां की तरफ़ धाई बसंत
- मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
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