Basant Panchami Poem in Hindi (बसंत पंचमी पर कविता): बसंत पंचमी का पर्व दस्तक दे रहा है। यह पर्व माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल 23 जनवरी को मां सरस्वती की वंदना का यह खास पर्व बनाया जाएगा। हिंदू धर्म में खास महत्व रखने वाली बसंत पंचमी ऋतुराज वसंत के आगमन का प्रतीक भी है। इस दिन प्रकृति में एक नई ऊर्जा दिखाई देती है। खेतों में सरसों के पीले फूल खिल उठते हैं, पेड़ों पर नई कोपलें आने लगती हैं और वातावरण में उल्लास घुल जाता है।
बसंत पंचमी के साथ ही जब सर्दी की चादर हटा माहौल में सूरज की गर्माहट घुलने लगती है तो यह समा हमेशा से कवियों, शायरों और नगमानिगारों को को आकर्षित करता रहा है। तभी तो बसंत पर ना जाने कितनी कविताएं और शायरियां लिखी गई हैं। आइए पढ़ते हैं बसंत पंचमी की कविताएं हिंदी में। आप देख सकते हैं बसंत पंचमी के लिए कविता, बसंत पंचमी पर कविताएं हिंदी में।
Poem on Basant Panchami in Hindu | Basant ritu par Kavita | बसंत पंचमी की कविता
1. रग-रग में इतना रंग भरा,
कि रंगीन चुनरिया झूठी है !
क्या होड़ करें चन्दा तेरी,
काली सूरत धब्बे वाली !
कहने को जग को भला-बुरा,
तू हँसती और लजाती !
मौसम सच्चा तू सच्ची है,
यह सकल बदरिया झूठी है!
- गोपाल सिंह नेपाली
2. देखो-देखो बसंत ऋतु है आयी
अपने साथ खेतों में हरियाली लायी
किसानों के मन में हैं खुशियाँ छाई
घर-घर में हैं हरियाली छाई
हरियाली बसंत ऋतु में आती है
गर्मी में हरियाली चली जाती है
हरे रंग का उजाला हमें दे जाती है
यही चक्र चलता रहता है
नहीं किसी को नुकसान होता है
देखो बसंत ऋतु है आयी।
3. धरा पे छाई है हरियाली
खिल गई हर इक डाली डाली
नव पल्लव नव कोपल फुटती
मानो कुदरत भी है हँस दी
छाई हरियाली उपवन मे
और छाई मस्ती भी पवन मे
उडते पक्षी नीलगगन मे
नई उमन्ग छाई हर मन मे
लाल गुलाबी पीले फूल
खिले शीतल नदिया के कूल
हँस दी है नन्ही सी कलियाँ
भर गई है बच्चो से गलियाँदेखो नभ मे उडते पतन्ग
भरते नीलगगन मे रंग
देखो यह बसन्त मसतानी
आ गई है ऋतुओ की रानी।
4. टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर
पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात
कोयल की कुहुक रात
प्राची में अरुणिम की रेख देख पाता हूं
गीत नया गाता हूं
- अटल बिहारी वाजपेयी
5. आया वसंत आया वसंत
छाई जग में शोभा अनंतसरसों खेतों में उठी फूल
बौरें आमों में उठीं झूल
बेलों में फूले नये फूल
पल में पतझड़ का हुआ अंत
आया वसंत आया वसंत।
लेकर सुगंध बह रहा पवन
हरियाली छाई है बन बन,
सुंदर लगता है घर आँगन
है आज मधुर सब दिग दिगंत
आया वसंत आया वसंत।
भौरे गाते हैं नया गान,
कोकिला छेड़ती कुहू तान
हैं सब जीवों के सुखी प्राण,
इस सुख का हो अब नही अंत
घर-घर में छाये नित वसंत।
6. पतझर ही पतझर था मन के मधुबन में
गहरा सन्नाटा-सा था अंतर्मन में
लेकिन अब गीतों की स्वच्छ मुंडेरी पर
चिंतन की छत पर, भावों के आँगन में
बहुत दिनों के बाद चिरैया बोली हैं
ओ वासंती पवन हमारे घर आना!
- कुंअर बेचैन
7. कौन रंग फागुन रंगे, रंगता कौन बसंत?
प्रेम रंग फागुन रंगे, प्रीत कुसुंभ बसंत।
चूड़ी भरी कलाइयाँ, खनके बाजू-बंद,
फागुन लिखे कपोल पर, रस से भीगे छंद।
- दिनेश शुक्ल
8. कलिका के चुम्बन की पुलकन
मुखरित जब अलि के गुंजन में
तब उमड़ पड़ा उन्माद प्रबल
मेरे इन बेसुध गानों में;
ले नई साध ले नया रंग
मेरे आंगन आया बसंत
- भगवतीचरण वर्मा
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