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क्या होता है एनालॉग पनीर, इस राज्य में होटल वालों को परोसने से पहले देनी होगी जानकारी, कैसे होता है ये असली पनीर से अलग

Analog Paneer: महाराष्ट्र में FDA ने निर्देश दिया है कि रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट्स एनालॉग पनीर यूज करते हैं तो ग्राहक को बताना होगा कि पनीर असली है या नकली पनीर। यहां से आप एनालॉग पनीर के बारे में जानें।

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क्या होता है एनालॉग पनीर (pc: canva)

Analog Paneer: महाराष्ट्र में अब ‘नकली’ पनीर को असली पनीर या चीज बताकर नहीं बेचा जा सकेगा। राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने रेस्टोरेंट्स और फास्ट फूड आउटलेट्स को निर्देश जारी किए हैं। ये नए नियम 1 मई से लागू होंगे। नियमों के मुताबिक, अब मेनू, डिस्प्ले बोर्ड और यहां तक कि बिल पर भी यह साफ-साफ लिखा होना चाहिए कि किसी डिश में ‘चीज एनालॉग’ का इस्तेमाल किया गया है या ‘पनीर' का। अगर आप नहीं जानते हैं कि एनालॉग पनीर क्या है तो यहां से जान सकते हैं। यहां एनालॉग पनीर के बारे में विस्तार से बताया गया है।

एनालॉग पनीर क्या है?

एनालॉग पनीर, जिसे नकली पनीर या सिंथेटिक पनीर भी कहा जाता है, पाम तेल, स्टार्च, और दूध पाउडर या सोया प्रोटीन जैसे गैर-डेयरी पदार्थों को मिलाकर बनाया गया एक सस्ता विकल्प है। यह स्वाद और बनावट में असली पनीर जैसा लगता है, लेकिन इसमें पोषक तत्वों की कमी होती है और यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

असली और एनालॉग पनीर में क्या अंतर है?

पनीर असली है या नकली, यह जानने के लिए उसकी बनावट, गंध और पानी या आयोडीन के साथ उसकी प्रतिक्रिया की जांच करें। असली पनीर नरम और भुरभुरा होता है, उसमें दूधिया सुगंध होती है और पानी या आयोडीन के साथ जांच करने पर वह घुलता नहीं है या उसका रंग नहीं बदलता है। नकली पनीर रबर जैसा हो सकता है, उसमें रासायनिक गंध आ सकती है और जांच करने पर वह घुल सकता है या नीला पड़ सकता है।

एनालॉग पनीर के साइड इफेक्ट्स क्या हैं?

एनालॉग पनीर में मिलाए जाने वाले स्टार्च, इमल्सीफायर और स्टेबिलाइजर कई लोगों के लिए पचाने में मुश्किल हो सकते हैं, जिससे उन लोगों को पेट फूलना, एसिडिटी या अन्य पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है जो इन खाद्य योजकों के प्रति संवेदनशील हैं।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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