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अक्ष कुमार को देसी थाली के आगे फीके लगते हैं विदेशी व्यंजन, जानिए क्यों कम नहीं होता ट्रेडिशनल फूड्स का जादू

दुनिया चाहे कितनी भी आधुनिक क्यों न हो जाए, घर के बने खाने और हमारी अपनी थाली का सुकून हमेशा सबसे ऊपर रहता है।

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अक्ष कुमार को देसी थाली के आगे फीके लगते हैं विदेशी व्यंजन, जानिए क्यों कम नहीं होता ट्रेडिशनल फूड्स का जादू

खान-पान की दुनिया इन दिनों दो अलग-अलग हिस्सों में बंटी नजर आती है। एक तरफ हमारी पुरानी और पारंपरिक पाक कला है, तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया और ग्लोबल कल्चर से उपजे फैंसी फूड ट्रेंड्स। हाल ही में बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार और डिजिटल क्रिएटर विराज गेहलानी के बीच हुई एक मजेदार बातचीत ने इसी बहस को फिर से जिंदा कर दिया है। इस बातचीत में अक्षय कुमार ने महंगे ग्लोबल फूड्स पर खुलकर बात करते हुए यह साबित कर दिया कि देसी खाने और पारंपरिक थाली के आगे दुनिया की कोई भी फैंसी डिश फीकी है।

गुजराती खान-पान का अनोखा जादू

बातचीत के दौरान जब विराज गेहलानी ने अपने घर के पारंपरिक गुजराती खान-पान का जिक्र किया तो अक्षय कुमार खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने बड़े ही अपनापन भरे अंदाज में कहा- यार गुजराती खाना मेरे को बहुत मजा आता है। मेरे को तो गुजराती थाली भी बहुत सही लगती है।

अक्षय ने आगे कहा कि जो मजा तुअर की दाल, उंधियू और हमारी अपनी देसी थाली में है, वह किसी भी एडामामे या महंगे विदेशी व्यंजन में नहीं मिल सकता। उनका यह बयान इस बात की गवाही देता है कि फिटनेस के मामले में कितने भी सख्त नियम क्यों न हों, लेकिन बात जब स्वाद और सुकून की आती है, तो देसी खाने का कोई मुकाबला नहीं है।

जब महंगे ट्रफल पास्ता और एवोकाडो पर निकले ठहाके

इस बातचीत का सबसे मजेदार हिस्सा तब आया जब विराज ने शादी के बाद अपनी डाइट में आए बदलावों का जिक्र किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब उन्हें महंगे और ट्रेंडी ग्लोबल फूड्स खाने पड़ते हैं। विराज ने हंसते हुए बताया- मैं ट्रफल मशरूम पास्ता खाता हूं, सर। यह इतना महंगा होता है… मुझे पसंद भी नहीं है, लेकिन पत्नी कहती है कि खाना ही पड़ेगा।

इस पर अक्षय कुमार ने चुटकी लेते हुए पूछा- तो इसे खाने का फायदा क्या है? जवाब में विराज ने हंसते हुए कहा- सर, यह बहुत महंगा है, मुझे नहीं पता इसे खाने का क्या फायदा है। इसके बाद दोनों ने इस बात पर भी खूब मजे लिए कि कैसे एक वक्त था जब लोग 'एवोकाडो' जैसे सुपरफूड्स से पूरी तरह अनजान थे और उसे पहली बार देखने पर अजीब प्रतिक्रिया देते थे। अक्षय ने खुद स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्हें भी नहीं पता था कि एवोकाडो क्या होता है, बाद में समझ आया कि यह एक कमाल का फल है।

क्यों आज भी दिलों पर राज करती है पारंपरिक थाली?

फूड एक्सपर्ट्स का मानना है कि मॉडर्न लाइफस्टाइल और ग्लोबलाइजेशन की वजह से आज लोग भले ही नए-नए विदेशी व्यंजनों और सुपरफूड्स की तरफ आकर्षित हो रहे हों, लेकिन पारंपरिक भारतीय थाली का आकर्षण कभी कम नहीं होता। एक क्लासिक इंडियन थाली में पोषण, स्वाद और मौसम के हिसाब से संतुलन का जो मेल होता है, वह किसी भी सिंगल-डिश ग्लोबल ट्रेंड में मिलना मुश्किल है।

यही वजह है कि दुनिया चाहे कितनी भी आधुनिक क्यों न हो जाए, घर के बने खाने और हमारी अपनी थाली का सुकून हमेशा सबसे ऊपर रहता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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