आजकल कारें सिर्फ इंजन, पहियों और ब्रेक के सहारे नहीं चलतीं, बल्कि इनमें कई कंप्यूटर, सेंसर और सॉफ्टवेयर भी काम करते हैं। आधुनिक कारों में इंटरनेट, ब्लूटूथ, वाई-फाई और मोबाइल ऐप जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। इनकी मदद से ड्राइवर फोन से ही कार को लॉक-अनलॉक कर सकते हैं, उसकी लोकेशन देख सकते हैं और कुछ मामलों में इंजन या एसी भी चालू कर सकते हैं। लेकिन यही डिजिटल सुविधाएं कारों को साइबर हमलों के खतरे में भी डाल सकती हैं।
स्वीडन की यूनिवर्सिटी ऑफ गोथेनबर्ग और चाल्मर्स यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने कनेक्टेड कारों के सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियों का अध्ययन किया है। यह रिसर्च सितंबर 2026 में Software Quality Journal में प्रकाशित हुई। इसमें जनवरी 2022 से सितंबर 2024 के बीच सामने आईं कारों से जुड़ी 413 सॉफ्टवेयर कमजोरियों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन खामियों का फायदा उठाकर हैकर्स कार के डिजिटल सिस्टम तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में इसका असर ब्रेक और स्टीयरिंग जैसे जरूरी सिस्टम पर भी पड़ सकता है।
क्या होती हैं कनेक्टेड कारें?
कनेक्टेड कार ऐसी गाड़ियां होती हैं जो इंटरनेट या दूसरे डिजिटल नेटवर्क से जुड़ी रहती हैं। इनमें GPS, टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, ब्लूटूथ, वाई-फाई और मोबाइल ऐप जैसी सुविधाएं मिलती हैं। कार के अलग-अलग हिस्सों को इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट यानी ECU नियंत्रित करती है। ये छोटे कंप्यूटर की तरह काम करते हैं और ब्रेक, इंजन, स्टीयरिंग तथा एयरबैग जैसे सिस्टम से जुड़े हो सकते हैं।
सॉफ्टवेयर की खामी से कैसे हो सकता है हमला?
रिसर्च के मुताबिक, कारों से जुड़े सॉफ्टवेयर में सबसे ज्यादा 36.2 फीसदी कमजोरियां बाहरी एप्लिकेशन, मोबाइल ऐप और वेब सर्विस से संबंधित थीं। वहीं, करीब 23.5 फीसदी खामियां चिप सिस्टम और एम्बेडेड सॉफ्टवेयर में मिलीं। अगर हैकर किसी कमजोर ऐप, ब्लूटूथ कनेक्शन या टेलीमैटिक्स सिस्टम के जरिए कार के नेटवर्क तक पहुंच बना लेता है, तो खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, किसी एक सिस्टम को हैक करने का मतलब यह नहीं है कि हैकर सीधे ब्रेक या स्टीयरिंग को नियंत्रित कर सकता है। इसके लिए कार के दूसरे सुरक्षा सिस्टम में भी खामी होना जरूरी है।
पहले भी हो चुकी है कार हैकिंग की घटना
साल 2015 में साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने जीप चेरोकी को दूर से हैक करके दिखाया था। उन्होंने कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम की कमजोरी का इस्तेमाल कर उसके कुछ जरूरी कंट्रोल सिस्टम तक पहुंच बनाई थी। इस घटना के बाद कंपनी ने अमेरिका में करीब 14 लाख गाड़ियों को सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए वापस बुलाया था।
किन कारों पर है खतरा और कैसे बचें?
भारत में मारुति सुजुकी, हुंडई, टाटा मोटर्स, महिंद्रा, किआ और एमजी जैसी कंपनियां अपनी कारों में कनेक्टेड फीचर्स दे रही हैं। हालांकि, रिसर्च में इन कंपनियों की किसी खास कार को हैकिंग के खतरे वाली गाड़ी घोषित नहीं किया गया है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि इन सभी कारों के ब्रेक या स्टीयरिंग हैक किए जा सकते हैं।
कार मालिकों को अपने मोबाइल ऐप में मजबूत पासवर्ड रखना चाहिए और कंपनी के सॉफ्टवेयर अपडेट समय पर इंस्टॉल करने चाहिए। अनजान ऐप या थर्ड पार्टी डिवाइस को कार से कनेक्ट करने से बचना चाहिए। वहीं, कार कंपनियों को भी नियमित सिक्योरिटी ऑडिट कराना चाहिए और मनोरंजन से जुड़े सिस्टम को ब्रेक व स्टीयरिंग जैसे जरूरी कंट्रोल सिस्टम से अलग सुरक्षा देनी चाहिए।
