Life Lessons from Mahabharat : भगवान कृष्ण को जगतगुरु की उपाधि से नवाजा गया है। यही कारण है कि आपने "कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्" जैसे वाक्य को जरूर सुना होगा। जिसका अर्थ है कि "मैं ब्रह्मांड के गुरु भगवान कृष्ण को नमन करता हूँ"। महाभारत जैसे भीषण युद्ध के दौरान भी गीता जैसा महान ज्ञान हम सभी को देने वाले भगवान कृष्ण के जीवन से हम ऐसे तो हम अनगिनत चीजें सीख सकते हैं। लेकिन आज हम आपको महाभारत की एक ऐसी खास बात के बारे में बताएंगे, जो आपके जीवन की कठिन राह को आसान बना सकती है। आइए जानते हैं ऐसे ही एक सुविचार के बारे में...
आज का सुविचार - "शठे शाठ्यम समाचरेत"
अर्थ - दुष्ट के साथ दुष्टता का ही व्यवहार करना चाहिये।
हालांकि मूल रूप से यह विचार ‘विदुर नीति’ से लिया गया है, लेकिन भगवान कृष्ण ने इस वाक्य को जीवन में प्रयोग कर शानदार उदाहरण पेश किए। "शठे शाठ्यम समाचरेत" के भाव को अपनाते हुए श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध में कर्ण का वध अर्जुन के द्वारा कराया। इसके अलावा दुर्योधन वध भी "शठे शाठ्यम समाचरेत" का एक पक्का उदाहरण था। जब भीम और दुर्योधन के युद्ध में भगवान ने दुर्योधन की जंधा पर वार करने का इशारा किया था।
आधुनिक जीवन में उपयोग
आज के आधुनिक जीवन में भी यह सीख उतनी ही प्रासंगिक है। कार्यस्थल, समाज या निजी रिश्तों में कई बार लोग हमारी सरलता, ईमानदारी और भलाई का गलत फायदा उठाते हैं। हर स्थिति में चुप रहना या सहन करते जाना न तो आत्मसम्मान के लिए ठीक है और न ही न्याय की दृष्टि से। ऐसे में भगवान कृष्ण की यह सीख हमें बताती है कि सज्जनों के साथ सज्जनता और शठों (दुष्टों) के साथ सतर्कता ही जीवन का संतुलन है।
सही निर्णय की ताकत
अंत में भगवान कृष्ण से मिली यह सीख हमें बताती है कि जीवन की कठिन राह तब आसान हो जाती है, जब हम आदर्शों को समझदारी और विवेक के साथ अपने जीवन में उतारते हैं। "शठे शाठ्यम् समाचरेत्" केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक प्रभावी नीति है, जो हमें हर परिस्थिति में सही निर्णय लेने की शक्ति देती है।
