Aaina Shayari in Hindi: आईना भले कांच का साधारण सा एक टुकड़ा हो लेकिन इसमें बहुत गहरा दर्शन छिपा है। यह आईना हम इंसानों का वो साथी है जो हमें हर दिन देखता है, पर कभी कुछ कहता नहीं। आईना न तो झूठ बोलता है, न तारीफ करता है, बस सच दिखाता है। हम सब कभी न कभी आईने के सामने ठहरते हैं। जब मुस्कान सच्ची होती है तो आईना भी चमक उठता है और जब दिल भारी होता है तो उसी में थकान झलक जाती है। इसी आईने पर बहुत से शायरों ने कई खूबसूरत कलाम लिखें हैं। आइए पढ़ते हैं आइने पर लिखे चंद मशहूर शेर:
1. आईना क्यूं न दूं कि तमाशा कहें जिसे
ऐसा कहां से लाऊं कि तुझ सा कहें जिसे
- मिर्ज़ा ग़ालिब
2.आईना देख अपना सा मुंह ले के रह गए
साहब को दिल न देने पे कितना ग़ुरूर था
- मिर्ज़ा ग़ालिब
3. आईने में वो देख रहे थे बहार-ए-हुस्न
आया मिरा ख़याल तो शर्मा के रह गए
- हसरत मोहानी
4. कोई भूला हुआ चेहरा नज़र आए शायद
आईना ग़ौर से तू ने कभी देखा ही नहीं
- शकेब जलाली
5. देखना अच्छा नहीं ज़ानू पे रख कर आइना
दोनों नाज़ुक हैं न रखियो आईने पर आइना
- दाग़ देहलवी
6. चाहे सोने के फ़्रेम में जड़ दो
आइना झूट बोलता ही नहीं
- कृष्ण बिहारी नूर
7. मुश्किल बहुत पड़ेगी बराबर की चोट है
आईना देखिएगा ज़रा देख-भाल के
- अमीर मीनाई
8. देखिएगा संभल कर आईना
सामना आज है मुक़ाबिल का
- रियाज़ ख़ैराबादी
9. पहले तो मेरी याद से आई हया उन्हें
फिर आइने में चूम लिया अपने-आप को
- शकेब जलाली
10. न देखना कभी आईना भूल कर देखो
तुम्हारे हुस्न का पैदा जवाब कर देगा
- बेख़ुद देहलवी
हमें हीं भूलना चाहिए कि आईना हर पल हमें सिखाता है कि बाहरी सुंदरता क्षणिक है। असली चमक भीतर की होती है। यही आईना आत्ममंथन का भी प्रतीक है। तो आपको इसी आइने पर लिखे ये शेर भी जरूर पसंद आए होंगे।
