पेरेंटिंग का सफर हर माता-पिता के लिए अलग और अनोखा होता है। कई बार घर में बच्चों की परवरिश को लेकर होने वाली बातें सिर्फ सोने के रूटीन या स्क्रीन टाइम तक ही सीमित नहीं होतीं। बच्चों की थाली में परोसी जाने वाली छोटी-छोटी चीजों पर भी लंबी चर्चाएं छिड़ जाती हैं। बॉलीवुड के पॉपुलर कपल ऋचा चड्ढा और अली फजल की पेरेंटिंगसे जुड़ा कुछ ऐसा ही मजेदार और दिलचस्प किस्सा सामने आया है, जो हर नए माता-पिता को जानना चाहिए।
हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने अपने पति और अभिनेता अली फजल के फादरहुड यानी पितृत्व के अंदाज पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि अली अपनी बेटी जुनेरा इदा फजल की देखभाल को लेकर बेहद गंभीर और सक्रिय रहते हैं। वैसे तो वह अली के इस प्यार और जुड़ाव की सराहना करती हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई बार उनका यह अति-उत्साह और फिक्र माइक्रोमैनेजमेंट यानी हर छोटी बात पर नजर रखना जैसी लगने लगती है।
ऋचा ने एक बेहद मजेदार वाकया शेयर करते हुए बताया कि एक बार जब अली काम के सिलसिले में घर से दूर श्रीनगर गए हुए थे, तब भी वह लगातार यह जानने के लिए उत्सुक रहते थे कि उनकी बेटी की खिचड़ी में कद्दू डाला गया है या नहीं। दूर शहर में होने के बावजूद बेटी के खाने-पीने की इतनी बारीक जानकारी रखना यह दिखाता है कि वह अपनी बेटी को लेकर कितने समर्पित हैं, लेकिन दूसरी तरफ घर पर अकेले सब संभाल रही ऋचा के लिए बार-बार ऐसे सवाल होना हद से ज्यादा दखल देने जैसा लग सकता है।
ऋचा ने यह भी बताया कि घर पर नैनी और उनकी अपनी सक्रिय देखरेख के बावजूद अली हर एक छोटी चीज को लेकर बहुत ज्यादा सतर्क रहते हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा कि अली इस मामले में थोड़ा एक्स्ट्रा हैं, जो कभी-कभी उन्हें चिढ़ा भी देता है। हालांकि, उनकी यह बातचीत पूरी तरह से हल्के-फुल्के और प्यार भरे अंदाज में थी, जो यह दर्शाती है कि कैसे सेलिब्रिटी कपल्स भी आम माता-पिता की तरह पेरेंटिंग के दौरान छोटी-छोटी उलझनों और खूबसूरत पलों का सामना करते हैं।
साल 2022 में शादी के बंधन में बंधे ऋचा और अली जुलाई 2024 में माता-पिता बने थे. तब से लेकर अब तक वे अपने करियर और पर्सनल लाइफ के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं। पेरेंटिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चे की परवरिश के दौरान दोनों पार्टनर का शामिल होना अच्छी बात है, लेकिन एक-दूसरे के निर्णयों पर भरोसा करना भी उतना ही जरूरी है ताकि देखभाल का यह सफर तनावपूर्ण न बने।
