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कौन थीं राजमाता जीजाबाई? जिनकी छत्रछाया में छत्रपति शिवाजी महाराज ने महान योद्धा बनकर रचा इतिहास?

Maratha Empire: जब बात मराठा साम्राज्य की होती है, तो छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज के नाम जहन में उभरते हैं। दो ऐसे वीर योद्धा, जिन्होंने स्वराज की स्थापना और उसके विस्तार को अपने रक्त और शौर्य से सींचा। लेकिन, इस गौरवशाली साम्राज्य की नींव में एक ऐसी महान नारी का योगदान शामिल है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। राजमाता जीजाबाई मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की माता और शाहजी भोंसले की पत्नी थीं।

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जीजाबाई ने शिवाजी को बचपन से ही वीरता, धर्म और स्वतंत्रता के आदर्श सिखाए।

नई दिल्ली: जब बात मराठा साम्राज्य की होती है, तो छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज के नाम जहन में उभरते हैं। दो ऐसे वीर योद्धा, जिन्होंने स्वराज की स्थापना और उसके विस्तार को अपने रक्त और शौर्य से सींचा। लेकिन, इस गौरवशाली साम्राज्य की नींव में एक ऐसी महान नारी का योगदान शामिल है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। राजमाता जीजाबाई मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की माता और शाहजी भोंसले की पत्नी थीं।

जीजाबाई एक ऐसी नारी थीं, जिन्होंने महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज को जन्म दिया और अदम्य साहस, बुद्धिमत्ता और धर्मनिष्ठा से मराठा साम्राज्य की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी मार्गदर्शन और शिक्षाओं ने शिवाजी को वह नजरिया और साहस प्रदान किया, जिसने मराठा साम्राज्य को अजेय बनाया और इस विरासत को संभाजी महाराज ने आगे बढ़ाया। जीजाबाई का जीवन मराठा गौरव का वह आधार स्तंभ है, जिसके बिना स्वराज की कहानी अधूरी है।

जीजाबाई का जन्म 12 जनवरी 1598 में हुआ

जीजाबाई का जन्म 12 जनवरी 1598 को महाराष्ट्र के सिन्दखेड़ में जाधव परिवार में हुआ था। उनके पिता लखुजी जाधव एक प्रभावशाली मराठा सरदार थे। बचपन से ही जीजाबाई में साहस, बुद्धि और धर्म के प्रति गहरी निष्ठा थी। उनकी शिक्षा-दीक्षा में युद्धकला, शास्त्रों का ज्ञान और प्रशासनिक कौशल शामिल थे, जो उस समय की महिलाओं के लिए असाधारण था। जीजाबाई की बहुत ही कम उम्र में शाहजी भोंसले के साथ शादी हुई, जो निजामशाही सल्तनत के एक प्रमुख सरदार थे। जीजाबाई ने आठ बच्चों को जन्म दिया, जिनमें से छह बेटियां और दो बेटे थे। इन्हीं बच्चों में से एक शिवाजी महाराज भी थे। जीजाबाई ने अपने बच्चों की परवरिश पर विशेष ध्यान दिया, खासकर शिवाजी को उन्होंने स्वराज की स्थापना के लिए तैयार किया। शाहजी के अधिकांश समय युद्धों और राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त रहने के कारण, जीजाबाई ने ही परिवार और शिवाजी के प्रारंभिक प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संभाली।

शिवाजी को सिखाए वीरता, धर्म और स्वतंत्रता के आदर्श

बताया जाता है कि जीजाबाई ने शिवाजी को बचपन से ही वीरता, धर्म और स्वतंत्रता के आदर्श सिखाए। उन्होंने रामायण, महाभारत और पुराणों की कहानियों के माध्यम से शिवाजी में देशभक्ति और नैतिकता के बीज बोए। जब शिवाजी ने मराठा साम्राज्य की स्थापना का संकल्प लिया, तो उस दौरान जीजाबाई न केवल उनकी प्रेरणा बनीं, बल्कि कठिन समय में उनकी सलाहकार भी रहीं। उन्होंने पुणे और आसपास के क्षेत्रों का प्रशासन संभाला और किलों की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जीजाबाई की हिंदू धर्म के प्रति अटूट निष्ठा थी

जीजाबाई धार्मिक थीं और हिंदू धर्म के प्रति उनकी अटूट निष्ठा थी। उन्होंने मंदिरों के निर्माण और धार्मिक कार्यों को प्रोत्साहन दिया। साथ ही, वह सामाजिक समानता और न्याय की पक्षधर थीं, जिसका प्रभाव शिवाजी के शासन में भी दिखाई देता है। जीजाबाई का निधन 17 जून 1674 को रायगढ़ किले में हुआ। उनकी मृत्यु के समय तक शिवाजी ने मराठा साम्राज्य को एक मजबूत साम्राज्य के रूप में स्थापित कर लिया था, जिसमें उनकी मां की शिक्षाओं और मार्गदर्शन का बड़ा योगदान था। (इनपुट- आईएएनएस)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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