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भाग्यनगर या हैदर का शहर...आखिर कब और कैसे पड़ा हैदराबाद का नाम? जानें इसका दिलचस्प इतिहास

हैदराबाद एक ऐसा शहर है जहां सदियों पुरानी संस्कृतियां, परंपराएं और राजवंशों की विरासत एक साथ मिलकर इसकी पहचान बनाती हैं। भाग्यनगर से हैदराबाद बनने तक की इसकी यात्रा प्रेम, इतिहास और सत्ता परिवर्तन की अनोखी कहानी कहती है। चारमीनार से लेकर बिरयानी तक, यह शहर आज भी अपने समृद्ध अतीत और जीवंत वर्तमान का खूबसूरत संगम है। तो आइए जानें इस शहर के नाम का इतिहास।

Hyderabad Name History

हैदराबाद के नाम का इतिहास

Old Name of Hyderabad: हैदराबाद की संस्कृति बेहद विविध और समृद्ध है। यह शहर वर्षों से कई सभ्यताओं और परंपराओं का मेल रहा है, जिसे इसकी ऐतिहासिक धरोहर और विरासत में साफ-साफ देखा जा सकता है। आसफ जाही वंश के लंबे शासनकाल के कारण इसे "निजामों का शहर" के रूप में पहचान मिली। इस वंश के पतन के बाद मुगल सत्ता के प्रभाव ने यहां की सांस्कृतिक सोच और सामाजिक ढांचे में बड़े परिवर्तन किए।

आज भी हैदराबाद अपनी अनोखी सांस्कृतिक पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। दिलचस्प तथ्य यह है कि शहर का प्राचीन नाम भाग्यनगर माना जाता है। माना जाता है कि यह नाम कुतुब शाही वंश के पांचवें सम्राट मुहम्मद कुली कुतुब शाह के प्रेम संबंध से जुड़ा है। कहा जाता है कि वह भागमती नामक महिला से प्रेम करते थे और उनके सम्मान में शहर का नाम पहले भाग्यनगर रखा गया। समय बीतने के साथ शहर का नाम बदलकर हैदराबाद कर दिया गया, जिसके पीछे यही प्रेम कथा प्रमुख कारण मानी जाती है।

Hyderabad City (Photo: Canva)
हैदराबाद शहर (फोटो: शहर)

क्यों बदला गया हैदराबाद का नाम?

ऐसा कहा जाता है कि, भागमती ने मुहम्मद कुली कुतुब शाह से विवाह के बाद इस्लाम स्वीकार किया और उन्हें हैदर महल का नाम दिया गया। उनके सम्मान में शहर का नाम भाग्यनगर से बदलकर हैदराबाद रखा गया, जिसका अर्थ है “हैदर का नगर।” कुछ इतिहासकारों का यह भी मत है कि शहर का नया नाम इसके इस्लामी महत्व को ध्यान में रखते हुए चुना गया था। 1591 में स्थापित हैदराबाद, कुतुब शाही शासकों के दौर में कला, संस्कृति और वास्तुकला का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा। बाद में निजामों के शासनकाल में यह हैदराबाद राज्य की राजधानी बना और दक्कन क्षेत्र की राजनीति, व्यापार और संस्कृति पर गहरी छाप छोड़ता गया।

Construction of Charminar (Photo: Canva)
चारमीनार का निर्माण (फोटो: Canva)

चारमीनार का निर्माण

हैदराबाद की स्थापना 1591 में मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने गोलकुंडा में बढ़ती पानी की कमी को देखते हुए की थी। जल संकट से निपटने के लिए उन्होंने मूसी नदी के तट पर एक नए और सुव्यवस्थित शहर की नींव रखी। इसी नई बस्ती के केंद्र में बाद में चारमीनार का निर्माण हुआ, जिसे शहर में फैले एक भीषण प्लेग से मुक्ति मिलने की खुशी में बनाया गया था। समय के साथ यह स्मारक हैदराबाद की पहचान बन गया। शहर आज दुनिया के सबसे बड़े फिल्म स्टूडियो, रामोजी फिल्म सिटी, का घर भी है, जहां तेलुगु, हिंदी और कई भारतीय भाषाओं की फिल्मोंं की शूटिंग होती है। हैदराबादी बिरयानी, जो आज वैश्विक स्तर पर मशहूर है, मूल रूप से निजामों के शाही रसोईघरों में विकसित हुई थी और यह मुगलई तथा दक्षिण भारतीय स्वादों का खूबसूरत संगम है। भारत में शामिल होने से पहले, निजाम का हैदराबाद राज्य न केवल सबसे संपन्न बल्कि क्षेत्रफल के लिहाज से भी कई यूरोपीय देशों, यहां तक कि फ्रांस से बड़ा था।

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 Nilesh Dwivedi
Nilesh Dwivedi Author

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अप... और देखें

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