Meteorite: आप लोगों ने रात के समय आसमान में कई बार टूटते हुए तारों को देखा होगा। हम बचपन में अक्सर इन टूटते हुए तारों को देखकर दुआ मांगते थे? क्योंकि हमें ऐसा लगता है कि टूटते हुए तारों से दुआ मांगने पर वह कबूल होती हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि आसमान दिखाई देने वाली यह चीज आखिर क्या होती है।
मेटियोरॉइड क्या है?
आसमान में अक्सर कई खगोलीय घटनाएं होती हैं, जिन्हें देखना बेहद रोमांचक होता है और जो टूटते हुए हमें आसमान में दिखाई देते हैं वह मेटियोरॉइड होते हैं, जिन्हें आसान शब्दों में उल्कापिंड कहा जाता है और यह मेटियोरॉइड पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल होते हैं।
वायुमंडल में दाखिल होते समय घर्षण की वजह से मेटियोरॉइड जलते हुए भी दिखाई दे सकते हैं, जिसकी वजह से चमकदार रोशनी दिखाई देती है। अंतरिक्ष में करोड़ो मेटियोरॉइट और एस्ट्रोरॉइड (Asteroid) हैं, जो सूर्य का चक्कर लगाते हैं।

उल्कापिंड
कितने प्रकार के होते हैं मेटियोरॉइड (Types of Meteorites)
| नंबर | Types of Meterorites |
| 1 | स्टोन मेटियोरॉइड (Stony Meteorites) |
| 2 | स्टोन-आयरन मेटियोरॉइड (Stony-Iron Meteorites) |
| 3 | आयरन मेटियोरॉइड (Iron Meteorites) |
मेटियोरॉइड से कैसे निकलती है रोशनी
सूर्य की चारों ओर घूमते-घूमते जब मेटियोरॉइट पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है तो गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से वह धरती की ओर खिंचा चला जाता है और घर्षण की वजह से गर्म हो जाता है और उससे चमकदार रोशनी निकलने लगती है।
अद्भुत चमक वाला मेटियोरॉइड
हाल ही में पुर्तगाल और स्पेन में नीले रंग की रोशनी वाला मेटियोरॉइड देखने को मिला जिसको देख सभी आर्श्चयचकित हो गए। नीले रंग की रोशनी वाले मेटियोरॉइड के कई वीडियो भी सामने आए हैं। जब मेटियोरॉइड दिखाई दिया तो रात में पूरा आसमान में नीले रंग की रोशनी में चमकने लगा और इस अद्भुत नजारे को शायद ही कोई भूल पाएगा।

मेटियोरॉइड
क्या राख हो जाते हैं मेटियोरॉइड?
लोग अक्सर यह सोचते हैं कि टूटते हुए तारे का क्या होता है? क्या यह जलकर राख हो जाता है या जमीन में गिर जाता है? दरअसल, वायुमंडल में दाखिल होने के बाद उल्का गर्म होने लगते हैं और जलकर राख हो जाते हैं, लेकिन कभी कभार ऐसा हो सकता है कि उसका कोई टुकड़ा जमीन तक पहुंच जाए तो उसे उल्कापिंड यानी मेटियोरॉइड कहा जाता है।
मेटियोरॉइड का साइज अलग-अलग हो सकता है। कभी कभार यह बेहद छोटे तो कभी कई मीटर चौड़े हो सकते हैं। लंबे समय से खगोलविद मेटियोरॉइड पर अध्ययन करते आए हैं, क्योंकि इससे उन्हें ग्रहों और एस्ट्रोरॉइड के बारे में जानकारी मिलती है।
