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क्या होते हैं ग्लेशियर? क्या है इनके बनने का रहस्य और कैसे डालते हैं ये जीवन पर असर?

प्रकृति के अद्भुत निर्माणों में से एक हैं ग्लेशियर, जो अपनी विशालता और शक्ति के लिए जाने जाते हैं। ये पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं और वर्षों में धीरे-धीरे आकार लेते हैं। इनके बारे में समझना न सिर्फ रोचक है बल्कि हमारे जीवन और पर्यावरण के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में आइए जानें इनके बारे में।

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जानें क्या है Glaciers की दुनिया का रहस्य?

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

What is a Glacier: अधिकांश लोग ग्लेशियर के बारे में ज्यादा नहीं जानते। ग्लेशियर को “हिमनद” या Rivers of Ice के नाम से भी जाना जाता है। वास्तव में, ये पहाड़ी इलाकों में पाई जाने वाली गतिशील बर्फ की परत होती है। इस चलती हुई बर्फ की परत को ही ग्लेशियर कहा जाता है। इस खबर के माध्यम से हम जानेंगे कि ग्लेशियर क्या होते हैं, कितने प्रकार के होते हैं और ये दुनिया के किन-किन क्षेत्रों में पाए जाते हैं। साथ ही, हम यह भी समझेंगे कि ग्लेशियर कैसे बनते हैं और इनके पिघलने से जीवन पर किस तरह का असर पड़ता है।

ग्लेशियर आकार में विशाल और बेहद शक्तिशाली होते हैं, लेकिन ये छोटे-छोटे हिम कणों से शुरू होते हैं। प्रत्येक बर्फ के क्रिस्टल का आकार और संरचना अलग होती है। सोचिए, एक पूरा ग्लेशियर बनने के लिए कितने बर्फ के कणों की जरूरत होती है, क्योंकि बर्फ धीरे-धीरे और वर्षों में ग्लेशियर में बदलती है। हिमनद बर्फ, हिम, चट्टान, तलछट (Sediment) और पानी का एक बड़ा मिश्रित पिंड होते हैं। ये जमीन पर बनते हैं और अपने भारी वजन और गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के कारण ढलानों की ओर धीरे-धीरे बढ़ते हैं। हर ग्लेशियर अपनी खासियत रखता है और इसका वातावरण भी अलग होता है।

How Glaciers are Formed?

ग्लेशियर कैसे बनते हैं?

ग्लेशियर कैसे बनते हैं?

ज्यादातर ठंडे इलाकों में हर साल बर्फ गिरती रहती है। नई बर्फ गिरने के साथ ही पहले से जमा हुई बर्फ ऊपर दबने लगती है, जिससे उसका घनत्व बढ़ जाता है। धीरे-धीरे छोटे-छोटे बर्फ़ के कण आपस में जुड़कर ग्लेशियर का रूप लेने लगते हैं। इस प्रक्रिया को फर्न कहा जाता है। लगातार बर्फ जमा होने से यह बर्फ का विशाल ठोस पिंड बन जाता है। ग्लेशियर का पिघलना नदियों के लिए पानी का मुख्य स्रोत बनता है। जब ग्लेशियर का बर्फ पानी के साथ मिलती है, तो यह और भी शक्तिशाली रूप ले लेती है और इसे टाइटवाटर ग्लेशियर कहा जाता है। पानी में तैरते हुए बर्फ के टुकड़े, जिन्हें केल्विन कहा जाता है, पानी के बहाव को तेज कर देते हैं।

ग्लेशियर कितने तरह के होते हैं?

पृथ्वी पर मुख्य रूप से दो प्रकार के ग्लेशियर पाए जाते हैं। पहला है अल्पाइन ग्लेशियर या घाटियों में पाए जाने वाला ग्लेशियर और दूसरा है पर्वतीय ग्लेशियर, जो पर्वतों की ऊंचाइयों पर स्थित होते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, तापमान कम होता जाता है और हवा में नमी जमा हो जाती है। जब यह नमी पर्वतों से टकराती है, तो यह बर्फ में बदल जाती है और इसी प्रक्रिया से ग्लेशियर बनते हैं। भारत में श्रीनगर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में विशाल ग्लेशियर पाए जाते हैं। मौसम बदलने पर जब तापमान बढ़ता है, तो ये ग्लेशियर पिघलते हैं और नदियों को पानी का प्रमुख स्रोत प्रदान करते हैं।

World's Biggest Glacier Name

दुनिया का सबसे बड़ा ग्लेशियर

सबसे बड़े ग्लेशियर कौन-सा है?

दुनिया का सबसे बड़ा ग्लेशियर लैम्बर्ट ग्लेशियर (Lambert Glacier) है, जो अंटार्कटिका में स्थित है और इसकी लंबाई 400 किलोमीटर से अधिक है। भारत का सबसे विशाल ग्लेशियर सियाचिन ग्लेशियर (Siachen Glacier) है, जो काराकोरम पर्वतमाला में स्थित है। यह दुनिया के सबसे बड़े गैर-ध्रुवीय ग्लेशियरों में से एक माना जाता है और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के अंतर्गत आता है। सियाचिन ग्लेशियर सिंधु नदी प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण जल स्रोत भी है।

ग्लेशियर पिघलने से क्या होता है?

ग्लेशियर के अत्यधिक पिघलने से आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है, जिससे खेती और स्थानीय जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। वहीं, अगर कोई ग्लेशियर किसी गर्म इलाके के पास पिघलता है, तो वहां के लोग इसका लाभ उठा सकते हैं। बहुत अधिक ग्लेशियर पिघलने पर पूरे विश्व के मौसम पर असर पड़ता है और जलवायु संतुलन बिगड़ जाता है। पर्यावरण की सुरक्षा के प्रयासों में कई देशों ने कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने का निर्णय लिया है। ग्लेशियर पृथ्वी पर पानी का सबसे बड़ा भंडार हैं और नदियों के मुख्य स्रोत के रूप में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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