Science News: भौतिक विज्ञान की दुनिया से एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खबर है कि यूरोपियन ऑर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (CERN) ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली और विशाल पार्टिकल एक्सीलेटर 'लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर' (LHC) के हिस्सों को डिस्कनेक्ट और अलग करने का काम आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया है। यह कदम LHC को बंद करने के लिए नहीं, बल्कि इसे एक बेहद शक्तिशाली महा-यंत्र 'हाइ-ल्यूमिनोसिटी LHC' (HiLumi LHC) में बदलने के उद्देश्य से उठाया गया है। CERN की यह महा-परियोजना विज्ञान को ब्रह्मांड के उन अनसुलझे रहस्यों तक ले जाएगी, जिन्हें अब तक सुलझाना असंभव माना जा रहा था।
क्या है लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर और क्यों है यह इतना खास?
स्विट्जरलैंड और फ्रांस की सीमा के नीचे 100 मीटर की गहराई पर बनी 27 किलोमीटर लंबी गोलाकार सुरंग में फैला LHC इंसान द्वारा बनाई गई सबसे जटिल वैज्ञानिक मशीनों में से एक है। यह कैसे काम करता है? LHC प्रकाश की गति के बेहद करीब पहुंचकर प्रोटॉन या उप-परमाणुक कणों की दो बीम को एक-दूसरे के विपरीत दिशा में दौड़ाता है और उन्हें आपस में टकराता है। इन शक्तिशाली टक्करों के जरिए वही परिस्थितियां पैदा की जाती हैं जो बिग बैंग यानी ब्रह्मांड के निर्माण के ठीक बाद बनी थीं। इसी LHC की मदद से साल 2012 में प्रसिद्ध 'गॉड पार्टिकल' (हिग्स बोसॉन) की खोज हुई थी, जिसने ब्रह्मांड में द्रव्यमान के अस्तित्व को स्पष्ट किया था।
बदले जाएंगे 28 विशाल सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट
LHC के 27 किमी के दायरे में हजारों मैग्नेट लगे हैं (जैसे- डाइपोल, क्वाड्रुपोल, सेक्सटुपोल आदि) जो पार्टिकल बीम को मोड़ने और नियंत्रित करने का काम करते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण होते हैं 'इनर ट्रिपलेट्स', यह तीन क्वाड्रुपोल मैग्नेटों का एक समूह होता है, जो डिटेक्टरों के अंदर टकराने से ठीक पहले पार्टिकल बीम को अत्यधिक कंप्रेस और फोकस करते हैं। जितनी कसकर बीम कंप्रेस होगी, कणों के आपस में टकराने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी। इस दर को वैज्ञानिक भाषा में 'ल्यूमिनोसिटी' कहते हैं। CERN की टीमों ने ATLAS और CMS प्रयोगों के दोनों ओर से हार्डवेयर हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लगभग दो दशकों तक (2005-2007 से) निर्बाध सेवा देने के बाद, अब 28 सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट (इनर ट्रिपलेट्स सहित) को हमेशा के लिए निकाला जा रहा है।
नाइओबियम-टाइटेनियम से नाइओबियम-टिन तक का सफर
पुराने मैग्नेट नाइओबियम-टाइटेनियम (Niobium-Titanium) से बने थे। लेकिन HiLumi LHC के लिए वैज्ञानिक सालों की रिसर्च के बाद एक नई तकनीक लेकर आए हैं।
नाइओबियम-टिन (Niobium-Tin): नए मैग्नेट में नाइओबियम-टिन सुपरकंडक्टिंग कॉइल्स का इस्तेमाल किया जाएगा।
40% अधिक चुंबकीय क्षेत्र: नए मैग्नेट 11.3 टेसला (Tesla) का मैग्नेटिक फील्ड उत्पन्न करने में सक्षम होंगे, जो कि मौजूदा मैग्नेट से लगभग 40% अधिक शक्तिशाली है।
यह शक्तिशाली उपकरण मुख्य रूप से ATLAS और CMS डिटेक्टरों के पास स्थापित किए जाएंगे, जहां टक्करों की उच्च दर की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। हालांकि, ALICE और LHCb डिटेक्टरों के इनर ट्रिपलेट्स को बदला नहीं जाएगा, बल्कि उन्हें अपग्रेड किया जाएगा।
HiLumi LHC से क्या बदलेगा?
जब यह अपग्रेड पूरा हो जाएगा और लगभग वर्ष 2030 के आसपास HiLumi LHC चालू होगा, तो यह मौजूदा क्षमता से 10 गुना अधिक डेटा और पार्टिकल टकराव (Collisions) पैदा करेगा। इससे वैज्ञानिकों को डार्क मैटर, डार्क एनर्जी, हिग्स बोसॉन की सूक्ष्म विशेषताओं और ब्रह्मांड के ऐसे दुर्लभ भौतिक नियमों का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा, जो अब तक की तकनीक के लिए अदृश्य थे।
