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कैसे बनते हैं सुपरमैसिव ब्लैक होल? क्या लगातार तेजी से हो रहा Black Hole का विकास?

Supermassive Black Holes: अनंत ब्रह्मांड में पुख्तातौर पर ब्लैक होल की संख्या बता पाना कठिन है, लेकिन ब्लैक होल के विकसित होने की क्षमता का अनुमान जरूर लगाया जा सकता है। ब्लैक होल के भीतर एक सूर्य को भी निगलने की क्षमता है। साथ ही यह प्रकाश को भी खुद में समा लेता है और दिखता है तो सिर्फ और सिर्फ अंधकार। ब्लैक होल के अंदर काला घना अंधेरा ही मौजूद है।

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सुपरमैसिव ब्लैक होल

Photo : iStock
KEY HIGHLIGHTS
  • ब्रह्यांड का दैत्य है ब्लैक होल।
  • सूर्य को भी खाने की रखता है क्षमता।
  • प्रकाश को भी खुद मा समा लेता है ब्लैक होल।

Supermassive Black Holes: ब्रह्मांड की सबसे ज्यादा रहस्यमयी वस्तुओं में से एक ब्लैक होल (Black Hole) के बारे में जानने की हर किसी की चाहत होती है, क्योंकि यह एक ऐसा ब्रह्मांडीय दैत्य है, जो सूर्य को भी निगलने की क्षमता रखता है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक ब्लैक होल के बारे में जानकारी साझा की थी जिसने एक पूरे तारे को ही निगल लिया। ऐसे में आज हम विशालकाय ब्लैक होल के बनने की प्रक्रिया को समझेंगे।

कैसे बनते हैं विशालकाय ब्लैक होल?

ब्लैक होल एक ऐसी रहस्यमयी वस्तु है जिनका गुरुत्वाकर्षण इतना प्रबल होता है कि कोई भी वस्तु उससे बच नहीं सकती है। कोई भी वस्तु यानी प्रकाश भी। ब्लैक होल में प्रकाश भी अंधकार में तब्दील हो जाता है। विशालकाय ब्लैक होल, जिन्हें सुपरमैसिव ब्लैक होल के नाम से जाना जाता है, का द्रव्यमान लाखों से अरबों सूर्य के बराबर हो सकता है। ब्लैक होल मरते हुए तारों से जन्म लेते हैं।

अनोखा ब्रह्मांडीय इतिहास

द कन्वर्सेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विशालकाय ब्लैक होल कैसे बनते हैं? यह समझने के लिए खगोलविदों ने 13.8 अरब साल पुराने ब्रह्मांड के इतिहास से लेकर वर्तमान तक को खंगाला और पाया कि शुरुआती दिनों में ब्लैक होल तेजी से विकसित हो रहे थे, लेकिन अब उनकी क्षमता कमजोर हुई है और धीरे-धीरे विकसित होते हैं।

खगोलविदों ने पिछले लगभग 12 अरब वर्षों में सुपरमैसिव ब्लैक होल के समग्र विकास इतिहास का एक मॉडल तैयार किया और उसकी मदद से इसके बारे में समझाने की कोशिश की।

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ब्लैक होल (प्रतीकात्मक तस्वीर)

गैस कंज्यूम करते हैं ब्लैक होल

सुपरमैसिव ब्लैक होल मुख्यत: दो तरीकों से विकसित होते हैं। पहला- ब्लैक होल अपनी मेजबान आकाशगंगाओं से गैस को कंज्यूम करते हैं यानी आकाशगंगाओं की गैस को खुद में समा लेते हैं, जिसे अभिवृद्धि (Accretion) कहा जाता है और दूसरा-जब आकाशगंगाएं आपस में टकराती हैं तो ब्लैक होल एक-दूसरे में विलीन हो सकते हैं।

बकौल रिपोर्ट, खगोलविदों की शोध टीम ने यह अनुमान लगाया कि सुपरमैसिव ब्लैक होल गैस को कंज्यूम करके कितनी तेजी के साथ विकसित होते हैं। दरअसल, एक सुपरमैसिव ब्लैक होल हर साल सूर्य के द्रव्यमा के बराबर गैस को कंज्यूम करने की क्षमता रखता है। उदाहरण के लिए इसे इस प्रकार समझ सकते हैं कि एक ब्लैक होल की वृद्धि दर लाखों सालों में औसतन उसकी मेजबान आकाशगंगा के सभी तारों के द्रव्यमान से जुड़ी होती है।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ता author

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स ... और देखें

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