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घड़ी के इनोवेशन से पहले कैसे चलता था वक्त का पता? हैरान कर देगा आपको ये अतीत

"समय की कद्र करो" यह बात हम अक्सर अपने बड़ों से सुनते आए हैं। समय की अहमियत हर दौर में मानी गई है, लेकिन तेज रफ्तार जिंदगी में हम कई कीमती पल गंवा देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि घड़ियों के आने से पहले लोग समय का अनुमान या पता कैसे लगाया करते थे? आज की घड़ी का सफर कैसे शुरू हुआ होगा? तो आइए जानते हैं इसके बारे में।

How Time Was Measured Before Modern Clocks

घड़ी से पहले ऐसे देखते थे टाइम

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

"एक घड़ी खरीदकर हाथ में क्या बांधली वक़्त पीछे ही पड़ गया मेरे....."! हमने अक्सर अपने घरों में बड़े-बुजुर्गों को ये कहते हुए सुना है कि, समय का सदुपयोग करो, या वक्त की कद्र करो, क्योंकि लौटा हुआ समय फिर कभी नहीं आता है। साहित्य, दर्शन और असल जिंदगी में वक्त के तकाजे को हमेशा अहमियत दी गई है। आज हम सभी के हाथों में घड़ी बंधी रहती है, लेकिन शायद इस दौड़-भाग भरी जिंदगी में हम कुछ अनमोल पल खो देते हैं। समय के इसी सिलसिले के बीच क्या आपने ये सोचा है कि, कलाई में पहनने वाली या दीवारों पर लटकाए जाने वाली घड़ी से पहले लोग समय का अंदाजा कैसे लगाया करते थे? या आज जिस घड़ी का मॉडल हम देखते हैं उसका ईजाद कब और कैसे हुआ होगा। आज हम आपको इन्हीं सवालों के जवाब देंगे। तो चलिए जानें समय के इस हैरतअंगेज कल के बारे में।

Ancient Methods of Time Measurement

समय मापने की प्राचीन विधियां

सबसे पुरानी घड़ी

आज भले ही हम दीवार पर टंगी या कलाई पर बंधी रिस्ट वॉच या स्मार्ट वॉच से रूबरू हो, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब इसका अंदाजा या इसे पता करने के लिए अलग-अलग तरीकों को इस्तेमाल होता था। इनमें सबसे पहला तरीका, सूरज की रोशनी था। जी हां! समय जानने के सबसे पुराने साधनों में सूर्य घड़ी या सन क्लॉक का खास स्थान था। इसमें एक सीधी छड़ी को जमीन में खड़ा किया जाता था और सूर्य की रोशनी से बनने वाली उसकी छाया के आधार पर समय का पता लगाया जाता था। सूर्योदय और सूर्यास्त को दिन के प्रमुख संकेत माना जाता था। इन दोनों के बीच की अवधि को कई छोटे हिस्सों में बांटकर समय का अनुमान लगाया जाता था।

जल घड़ियों का इस्तेमाल

पानी से भी समय का पता लगाया जाता था। इसमें एक बर्तन में बहुत छोटे छेद से धीरे-धीरे पानी बाहर निकलने दिया जाता था। बर्तन पर बने निशानों के आधार पर यह जाना जाता था कि कितना समय बीत चुका है। आगे चलकर जल घड़ियों को और उन्नत बनाया गया, जिनमें घंटियां और अन्य यांत्रिक हिस्से भी जोड़े गए।

Sand Clock History

सैंड क्लॉक क्या होता है?

सैंड क्लॉक भी था एक तरीका

सैंड क्लॉक को आज भी देखा जाता है। इसके ढांचे की बात करें तो, दो कांच के बल्बों के बीच एक छोटा सा रास्ता होता है। ऊपर वाले बल्ब में रेत भरकर उसे उलट दिया जाता है। रेत को नीचे पहुंचने में जितना समय लगता है, उसी से समय मापा जाता है। इस उपकरण को अंग्रेजी में सैंड क्लॉक कहा जाता है।

चांद-तारों से समय का अनुमान

चंद्रमा की विभिन्न अवस्थाओं (Moon Phases) को देखकर महीनों का अनुमान लगाया जाता था, जबकि तारों की स्थिति से रात के समय का पता लगाया जाता था। इसके अलावा जानवरों के सोने-जागने का समय, पक्षियों की आवाजें और पेड़ों से बनने वाली छायाएं भी दिन के समय का अंदाज लगाने में सहायक होती थीं।

Who Invented Clock? (Wikimedia Commons)

घड़ी का आविष्कार किसने किया? (फोटो: Wikimedia Commons)

कब और किसने किया घड़ी का आविष्कार?

दुनिया की पहली जेब में रखी जाने वाली घड़ी (Pocket Watch) का निर्माण जर्मनी के घड़ी निर्माता पीटर हेनलेन (Peter Henlein) ने लगभग 1505 से 1510 के बीच नूर्नबर्ग में किया था। इन प्रारंभिक घड़ियों को उनके अंडाकार आकार के कारण “नूर्नबर्ग एग्स” (Nuremberg Eggs) कहा जाता था। ये घड़ियां स्प्रिंग की सहायता से चलती थीं और आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाई जा सकती थीं, जिससे इन्हें शुरुआती पोर्टेबल घड़ियों में गिना जाता है।

History of Wrist Watches

कलाई घड़ियों का इतिहास

रिस्ट वॉच कब बनी?

रिस्ट वॉच या कलाई घड़ी का विकास खासतौर से 19वीं शताब्दी के शुरुआती सालों में माना जाता है, लगभग 1810 से 1812 के बीच। वर्ष 1810 में अब्राहम-लुई ब्रेगुएट ने नेपल्स की रानी कैरोलिन मूरत के लिए एक विशेष कलाई घड़ी तैयार की थी। वहीं 1868 में पाटेक फिलिप द्वारा बनाई गई कलाई घड़ी को भी इतिहास में शुरुआती उदाहरणों में गिना जाता है। प्रारंभ में कलाई घड़ियां महिलाओं के फैशन का हिस्सा मानी जाती थीं, लेकिन 20वीं शताब्दी के शुरुआती दौर में ये आम लोगों के बीच व्यापक रूप से प्रचलित हो गईं।

 Nilesh Dwivedi
Nilesh Dwivedi author

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अप... और देखें

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