Uttar Pradesh Panchayat Elections 2026 : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर स्पष्टता नजर नहीं आ रही है। लेट लतीफी के बावजूद अभी तक तारीखों को लेकर कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। वहीं, अब इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने में विलंब पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार को संविधान का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में निर्वाचित स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त होने से कम से कम दो वर्ष पूर्व चुनाव की तैयारियां शुरू करनी चाहिए।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने संजय कुमार शर्मा नामक व्यक्ति द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि काफी पहले से तैयारियां शुरू करने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि पंचायत चुनाव पांच साल के भीतर पूरे हो जाएं।पीठ ने कहा कि यद्यपि राज्य सरकार ने मई, 2025 में प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन 26 मई, 2026 को पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव नहीं कराए जा सके। राज्य सरकार के रिकॉर्ड तलब करते हुए अदालत ने कहा कि वह विलंब के कारणों की समीक्षा करेगी और यह देखेगी कि क्या ये सरकार के नियंत्रण के बाहर की परिस्थितियों के कारण हुआ या अधिकारियों की लापरवाही से हुआ। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 11 अगस्त निर्धारित की है।
ग्राम पंचायतों का कार्यकाल बढ़ा
हालांकि, ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया। इसके दृष्टिगत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ ही स्पष्ट किया गया है कि नई ग्राम पंचायतों के गठन अथवा अधिकतम छह माह की अवधि तक निवर्तमान प्रधान ही पंचायतों का सामान्य प्रशासनिक कार्य संभालेंगे।
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इधर, पंचायत चुनावों के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के गठन को मंजूरी मिल गई है। पंचायती राज विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा जारी प्रस्ताव के अनुसार पांच सदस्यीय आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। मसौदे के अनुसार आयोग में पांच सदस्यों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा ऐसे व्यक्तियों में से की जाएगी, जो पिछड़े वर्गों से संबंधित मामलों का ज्ञान रखते हों।
अब बात आगे बढ़ी है तो OBC आयोग के गठन के साथ ही आरक्षण की प्रक्रिय शुरू हो सकेगी। नया समर्पित आयोग प्रदेश में पिछड़ों का रैपिड सर्वे करेगा और इस सर्वे के जरिए वास्तविक आबादी का पता लगाया जाएगा और उसी के आधार पर सीटों का आरक्षण लागू होगा फिर कहीं जाकर पंचायत चुनाव होंगे। हालांकि, ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव तय समय पर अप्रैल-मई में संपन्न हो चाने चाहिए थे, लेकिन पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण प्रक्रिया इस पर बाधा बनी हुई थी।
कब हुए थे पंचायत चुनाव
पिछले पंचायत चुनाव अप्रैल-2021 में हुए थे, जिसके चलते माना जा रहा था कि इस साल अप्रैल में पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं, लेकिन ओबीसी आरक्षण प्रक्रिया के लिए समर्पित आयोग न होने से पेंच फंस हुआ था। मामले में हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने योगी सरकार को ओबीसी आयोग बनाने के दिशा-निर्देश दिए थे। इसी मद्देनजर सरकार ने ओबीसी आयोग गठन का फैसला लिया है, जिसके चलते ही पंचायत चुनाव की सबसे बड़ी बाधा खत्म हो गई है।
