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जोरावर टैंक की ताकत देख बढ़ेगी PAK-चीन की बेचैनी, सफलतापूर्वक दागा एंटी-टैंक मिसाइल Nag Mk II

इस हल्के टैंक जोरावर का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और निर्माण लॉर्जन एवं टुब्रो ने किया है। डीआरडीओ के अधिकारियों ने कहा कि रेंज, हमले के वक्त इसकी क्षमता, सटीकता सहित सभी वांछित लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरे हुए।

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भारतीय सेना का हल्का टैंक है जोरावर। तस्वीर-ANI

Photo : ANI

Zorawar light tank : भारतीय सेना के हल्के टैंक जोरावर ने अपनी ताकत दिखाई है। उसकी यह ताकत देख चीन और पाकिस्तान दोनों की सांसे फूलनी तय हैं। जोरावर टैंक ने शुक्रवार को एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल Nag Mk II को सफलतापूर्वक दागा। इस हल्के टैंक का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और निर्माण लॉर्जन एवं टुब्रो ने किया है। डीआरडीओ के अधिकारियों ने कहा कि रेंज, हमले के वक्त इसकी क्षमता, सटीकता सहित सभी वांछित लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरे हुए।

जोरावर टैंक को ऊंचाई वाले और दुर्गम इलाकों, विशेषकर लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में तैनात करने के लिए तैयार किया गया है। इसका नाम महान योद्धा महाराजा जोरावर सिंह के नाम पर रखा गया है, जो हिमालयी क्षेत्रों में अपने पराक्रम के लिए प्रसिद्ध थे।

जोरावर टैंक का वजन 25 टन

इस टैंक का वजन लगभग 25 टन है, जो इसे ऊंचाई वाले इलाकों में आसानी से तैनात करने योग्य बनाता है, जबकि पारंपरिक मुख्य युद्धक टैंक (जैसे अर्जुन या टी-90) का वजन लगभग 45–50 टन होता है। टैंक में 105 मिमी की कैनन गन, उन्नत फायर कंट्रोल सिस्टम, एंटी-टैंक मिसाइल क्षमता, और आधुनिक नेविगेशन एवं कम्युनिकेशन सिस्टम लगाए गए हैं। इसे हाइब्रिड पावर पैक के साथ डिजाइन किया गया है, जिससे यह कम ईंधन में अधिक शक्ति उत्पन्न करता है और पर्यावरण के अनुकूल भी है।

चीन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है इसे

जोरावर टैंक को खास तौर पर चीन की सीमा पर बढ़ती सैन्य गतिविधियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह भारतीय सेना को ऊंचाई वाले इलाकों में चीन के टाइप-15 हल्के टैंक के बराबर शक्ति प्रदान करेगा। इसके अलावा, इसकी गतिशीलता और मारक क्षमता इसे आधुनिक युद्धक्षेत्र में एक रणनीतिक बढ़त देती है। इस टैंक का उद्देश्य भारत को 'आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन' के लक्ष्य के करीब लाना है। आने वाले वर्षों में जोरावर टैंक के सैकड़ों यूनिट भारतीय सेना में शामिल किए जाएंगे, जिससे भारत की सीमा सुरक्षा और सामरिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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