Yamuna Expressway Bus Fire: यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीवर एसी बस में आग लगने से 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में 8 पुरुष और एक महिला शामिल है। हादसे के बाद बस के संचालन और उसके दस्तावेजों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
नोएडा पुलिस की जांच में कई खामियां सामने आईं। दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही मध्य प्रदेश के 'राजकल्पना ट्रैवल्स' की बस का रजिस्ट्रेशन बिहार में हुआ था, जबकि बस का फिटनेस सर्टिफिकेट राजस्थान और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट हरियाणा से जारी किया गया। इसके अलावा 19 चालान जारी हो चुके हैं और 1.75 लाख रुपये का जुर्माना लगा है।
AC में चिंगारी के चलते लगी आग?
ग्रेटर नोएडा के पुलिस उपायुक्त रवि शंकर निम के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में बस के एयर कंडीशनर में चिंगारी निकलने के बाद आग लगने की बात सामने आई है। हालांकि, पुलिस घटना के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है और आग लगने की वास्तविक वजह की विस्तृत जांच जारी है।
हादसे के समय बस में 35 यात्री सवार थे। बकौल पुलिस, 26 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया गया है।
भरोसा डगमगाया, जांच का दायरा बढ़ा
ऐसी घटनाएं यात्रियों का बस सर्विसेस पर विश्वास कमजोर करती हैं। अक्सर लंबी दूरी की यात्राओं के लिए लोग हवाई मार्ग, रेलवे इत्यादि का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन सुगम यात्रा की अनुभूति के लिए बस सर्विसेस पर भी लगातार भरोसा बढ़ रहा था। हालांकि, ऐसी घटनाएं भरोसे को कमतर करने का काम करती रही हैं।
ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है, क्योंकि आग का गोला बनी 'राजकल्पना ट्रैवल्स' की बस के दस्तावेजों ने जांच का दायरा बढ़ा दिया।
एक बस, चार राज्यों से जुड़े दस्तावेज
- बस का रजिस्ट्रेशन बिहार में हुआ।
- फिटनेस सर्टिफिकेट राजस्थान से जारी हुआ।
- पॉल्यूशन सर्टिफिकेट हरियाणा से जारी किया गया।
- बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से उत्तर प्रदेश महोबा के बीच चल रही थी।
कश्मीरी गेट से बस संचालन पर उठे सवाल
हादसे के बाद कश्मीरी गेट से लंबी दूरी की बसों के संचालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रवि शंकर निम ने कहा कि नोएडा पुलिस दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर यह जानकारी मांगेगी कि कश्मीरी गेट से इतनी बड़ी संख्या में बसों का कथित तौर पर अवैध संचालन किस तरह हो रहा है।
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इस अग्निकांड के बाद एक बात तो साफ हो गई कि जांच महज एक बस में लगी आग तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि यह देखा जा सकता है कि इस तरह की बसों का संचालन आखिर किस व्यवस्था के तहत हो रहा है? क्या बसों के पास वैध दस्तावेज हैं? और दस्तावेजों की किस स्तर पर जांच की जाती है।
'ड्राइवर ने नहीं रोकी बस'
इस अग्निकांड को लेकर एक हैरान कर देने वाली बात सामने आई। बताया जा रहा है कि ड्राइवर और कंडक्टर ने जलने की गंध को नजरअंदाज किया और यात्रियों के बार-बार कहने के बावजूद बस को नहीं रोका। एक यात्री की शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर में यह आरोप लगाए गए हैं।
एफआईआर के मुताबिक, जलने की गंध आने पर यात्रियों ने शोर मचाया और ड्राइवर से बस रोकने को कहा, लेकिन ड्राइवर और कंडक्टर ने कथित तौर पर ऐसा करने से इनकार करते हुए कहा, ''अगर मरना है तो मर जाओ, हम बस नहीं रोकेंगे।''
