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'न गोडसे गांधी को समाप्त कर पाया, न आप...', राज्यसभा में कांग्रेस बोली- सत्ता में आए तो मनरेगा को वापस लाएंगे

G RAM G Bill: राज्यसभा में गुरुवार को कांग्रेस के कई सांसदों ने मनरेगा का स्थान लेने के लिए सरकार की ओर से लाये गये विधेयक के नाम को बदलने के पीछे सत्तारूढ़ दल द्वारा देश से महात्मा गांधी का नाम मिटाने का प्रयास करार दिया और इसे संसद की प्रवर समिति को भेजने की मांग की।

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कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी (फोटो साभार: @INCIndia)

Photo : Twitter

G RAM G Bill: राज्यसभा में गुरुवार को कांग्रेस के कई सांसदों ने मनरेगा का स्थान लेने के लिए सरकार की ओर से लाये गये विधेयक के नाम को बदलने के पीछे सत्तारूढ़ दल द्वारा देश से महात्मा गांधी का नाम मिटाने का प्रयास करार दिया और इसे संसद की प्रवर समिति को भेजने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब उनकी पार्टी सत्ता में आयेगी तो विधेयक को मूल स्वरूप में लागू करेगी।

BJP पर बरसे दिग्विजय सिंह

उच्च सदन में ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस योजना के तहत मजदूरों की मजदूरी को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा के राज में सबसे ज्यादा नुकसान मजदूरों को हुआ है।

उन्होंने कहा कि इस योजना में सरकार ने रोजगार के दिनों को बढ़ाकर 125 दिन करने का ‘लालीपॉप’ दिया है क्योंकि राज्य सरकारों के पास पैसा ही नहीं है कि वह इस योजना के लिए पैसा दें। सिंह ने कहा कि यह विधेयक ग्राम स्वराज की मूल भावना के विपरीत लाया गया है। उन्होंने इस विधेयक का मूल नाम बरकरार रखने की मांग की।

प्रमोद तिवारी का बड़ा वादा

चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने कहा कि सरकार ने इस विधेयक के जरिये ऐसी शर्त लगा दी हैं जिससे मनरेगा को खत्म कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकसभा में अपने एक भाषण में इस योजना को लेकर अपनी मंशा जता चुके थे। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में अपने एक भाषण में मनरेगा को कांग्रेस की विफलता का स्मारक बताया था।

तिवारी ने कहा कि इस विधेयक के जरिये मनरेगा को मांग के बदले आपूर्ति आधारित योजना बना दिया है।

उन्होंने कहा, ‘इनके (भाजपा के) अंदर एक ललक और एक भावना है कि कैसे गांधी के नाम को समाप्त कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि न गोडसे गांधी को समाप्त कर पाया न आप कभी गांधी को समाप्त कर पाएंगे।’’ तिवारी ने कहा, ‘‘यह हमारा वचन है कि जिस दिन हम सत्ता में लौटकर आएंगे, गांधी का नाम भी होगा और मनरेगा उसी स्वरूप में आएगी।’’

इससे पहले उच्च सदन में विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक ने कहा कि राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून वर्ष 2005 में सर्वसम्मति से पारित किया गया था और उससे पहले इस संबंध में व्यापक विचार विमर्श किया गया था। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या उसने नये विधेयक पर सहमति बनाने का कोई प्रयास किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसे राजनीतिक हथियार बनाकर लाया गया है।

'इतनी जल्दबाजी में क्यों है सरकार'

वासनिक ने कहा कि मनरेगा मांग आधारित योजना थी, जिसमें पूरे साल काम की गारंटी थी और इसमें केंद्र की ओर से पैसे की कोई सीमा नहीं थी, लेकिन प्रस्तावित कानून में इसे बदल दिया गया है। उन्होंने इसे प्रवर समिति में भेजने की मांग करते हुए कहा कि सरकार इतनी जल्दबाजी में क्यों है, क्या उसे सत्ता खोने का डर है। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के समय राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और मनरेगा से आम लोगों को काफी राहत मिली, लेकिन प्रधानमंत्री ने मनरेगा कानून को कांग्रेस की नाकामी का स्मारक बताया था, जबकि यह कांग्रेस की उपलब्धियों का प्रतीक है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को गांधीजी के नाम से नफरत है, इसलिए योजनाओं से उनका नाम हटा रही है, किताबों से हटा रही है, लेकिन गांधी हमेशा जिंदा रहेंगे। उन्होंने कहा कि गांधीजी देश की मिट्टी के कण-कण में हैं। उन्होंने कहा कि गांधी जी याद दिलाते हैं कि सत्ता का मतलब सेवा है, जिससे इस सरकार को कोई मतलब नहीं है।

'मजदूरों के कार्य दिवस में लगातार आ रही कमी'

कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने चर्चा में भाग लेते हुए आरोप लगाया कि ‘‘जी राम जी’’ विधेयक मजदूरों को सामाजिक न्याय से वंचित करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि यह साजिश लगातार 10 साल से चल रही है ताकि मजदूरों को सामाजिक न्याय से वंचित किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 में ही मनरेगा योजना को कांग्रेस की नाकामियों का जीता-जाता स्मारक बताकर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी थी।

उन्होंने इस विधेयक पर व्यापक विचार-विमर्श किए जाने की जरूरत पर बल देते हुए इसे प्रवर समिति में भेजने की मांग की और सवाल किया कि क्या सरकार ने विभिन्न समूह से विचार-विमर्श किया है। सुरजेवाला ने कहा कि इस योजना के तहत मजदूरों के कार्य दिवस में लगातार कमी आ रही है और पहले यह 50 दिन के आसपास था, जो इस साल घटकर 36 दिन रह गया है।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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