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अब सीमा हैदर का क्या होगा... भारत सरकार के फैसले के बाद जाना पड़ेगा पाकिस्तान? वकील ने बताया सबकुछ

भारत द्वारा पाकिस्तानी नागरिकों को जारी सभी मौजूदा वैध वीजा 27 अप्रैल से रद्द माने जाएंगे। ये घोषणा विदेश मंत्रालय ने की है। ऐसे में सवाल ये भी है कि क्या भारत सरकार के इस फैसले के बाद सीमा हैदर भारत में रहेगी या वो भी पाकिस्तान रवाना होगी? इस मामले में उनके वकील एपी सिंह का बयान सामने आया है।

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क्या अब सीमा हैदर को भी जाना पड़ेगा पाकिस्तान?

Will Seema Haider also have to go to Pakistan: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। भारत में रह रहे सभी पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए गए हैं और उन्हें 48 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है। इस फैसले के बाद सीमा हैदर का नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

भारत में ही रहेगी सीमा हैदर या जाना पड़ेगा पाकिस्तान?

सीमा हैदर के वकील एडवोकेट एपी सिंह ने इस मामले में बयान जारी करते हुए कहा कि पहलगाम में पाकिस्तान की साजिश के तहत टूरिस्टों पर किया गया हमला बेहद दुखद और निंदनीय है। सीमा हैदर भी अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद इस खबर से बेहद आहत और व्यथित हुई हैं।

विदेश मंत्रालय ने ये घोषणा की है कि सरकार ने सुरक्षा पर कैबिनेट समिति के फैसले के अनुरूप पाकिस्तानी नागरिकों की वीजा सेवा तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया है। भारत द्वारा पाकिस्तानी नागरिकों को जारी सभी मौजूदा वैध वीजा 27 अप्रैल से रद्द माने जाएंगे।

गृह मंत्रालय और एटीएस के पास जमा हैं सीमा के दस्तावेज

एपी सिंह ने बताया कि सीमा हैदर पाकिस्तान छोड़कर सनातन धर्म अपनाकर नेपाल के रास्ते भारत आई थीं। उन्होंने सचिन मीणा से विवाह किया और हाल ही में भारत में एक बच्ची को जन्म दिया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा शार्क वीजा-टू के तहत जो फैसले लिए गए हैं, वे सराहनीय हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सीमा हैदर का मामला अलग है क्योंकि उनके सभी दस्तावेज गृह मंत्रालय और एटीएस के पास जमा हैं। साथ ही, माननीय राष्ट्रपति के पास उनकी याचिका भी लंबित है। उत्तर प्रदेश की अदालत ने उन्हें जमानत दी थी और वह सभी शर्तों का पालन करते हुए रघुपुर स्थित अपने ससुराल में रह रही हैं।

'सीमा हैदर और उनके परिवार को लगातार मिल रही हैं धमकियां'

एपी सिंह ने दावा किया कि सीमा हैदर और उनके परिवार को पाकिस्तान समर्थित तत्वों से लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, यहां तक कि उन्हें टुकड़े-टुकड़े कर देने की धमकी भी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में शिकायतें समय-समय पर दर्ज कराई गई हैं और अब तक की स्थिति में सीमा, सचिन और उनका परिवार पूरी तरह से भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार पर भरोसा रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा भारत में शरण के आधार पर रह रही हैं और कानून का पालन कर रही है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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