सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एयर इंडिया की सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य संबंधित पहलुओं की जांच के लिए शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की नियुक्ति का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि केवल एयर इंडिया को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है, जो हाल ही में एक “दुर्भाग्यपूर्ण त्रासदी” का शिकार हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछे तीखे सवाल
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता वकील नरेन्द्र कुमार गोस्वामी को सुझाव दिया कि वे अपनी जनहित याचिका वापस लें और यदि कोई शिकायत है तो उचित मंच का सहारा लें। पीठ ने कहा- “ऐसी धारणा न बने कि आप अन्य एयरलाइंस के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। केवल एयर इंडिया को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है, जबकि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण त्रासदी का शिकार हुई है? यदि आप नियामक व्यवस्था चाहते हैं तो आपने अन्य एयरलाइंस को अपनी याचिका में क्यों शामिल नहीं किया?”
याचिकाकर्ता का दावा
याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि वे एयरलाइन के साथ हुई किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के प्रभावित हैं। इस पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा,
“हम भी नियमित रूप से यात्रा करते हैं और जानते हैं कि स्थिति क्या है। एक त्रासदी हुई है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। यह किसी एयरलाइन की आलोचना करने का समय नहीं है।”
याचिका में क्या
गोस्वामी ने जुलाई में दायर अपनी जनहित याचिका में एयर इंडिया की सुरक्षा व्यवस्था, रखरखाव प्रक्रियाओं और परिचालन प्रोटोकॉल की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने का निर्देश देने का आग्रह किया था। उन्होंने यह भी मांग की थी कि इस समिति को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ता ने अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) द्वारा मान्यता प्राप्त एक अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा एजेंसी से एयर इंडिया के पूरे बेड़े का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने का आदेश देने का अनुरोध किया था। इसके तहत 2024 ICAO ऑडिट रिपोर्ट में पहचानी गई कमियों को दूर किया जाना था, और यह ऑडिट छह महीने के भीतर पूरा किया जाना था।
