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15 अगस्त नहीं, 16 अगस्त को मनता है यहां आजादी का जश्न, जानें इस राज्य के अनोखे स्वतंत्रता दिवस की पूरी दास्तान

भारत में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है, लेकिन देश में एक ऐसी जगह भी है जहां यह खास दिन 16 अगस्त को मनाने की परंपरा है। आखिर यहां स्वतंत्रता दिवस की तारीख अलग क्यों है, जानिए इसके पीछे की पूरी वजह।

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16 अगस्त को क्यों मनाया जाता है यहां आजादी का पर्व? (AI फोटो)

Independence Day: भारत हर साल 15 अगस्त को आजादी का जश्न मनाता है और देशभर में तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किए जाते हैं। लेकिन देश में एक ऐसी जगह भी है, जहां आजादी का यह पर्व 15 अगस्त के बजाय 16 अगस्त को मनाया जाता है। इसके पीछे भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और उस क्षेत्र के इतिहास से जुड़ी एक बेहद खास और दिलचस्प वजह है। यह परंपरा कई दशकों से चली आ रही है और आज भी यहां स्वतंत्रता दिवस का आयोजन एक अलग तारीख पर किया जाता है। आखिर ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे की ऐतिहासिक कहानी क्या है, आज हम आपको इसी के बारे में बताएंगे।

Puducherry Independence Day

यहां देश के बाकी हिस्सों से कुछ अलग है स्वतंत्रता दिवस की परंपरा

'डी ज्यूर ट्रांसफर डे' का उत्सव

भारत में पुडुचेरी एक ऐसा केंद्र शासित प्रदेश है, जहां स्वतंत्रता दिवस से जुड़ी परंपरा देश के बाकी हिस्सों से कुछ अलग है। यहां 16 अगस्त को 'डी ज्यूर ट्रांसफर डे' (De Jure Transfer Day) यानी के रूप में मनाया जाता है। दरअसल, 15 अगस्त 1947 को भारत ब्रिटिश शासन से आजाद हो गया था, लेकिन पुडुचेरी, कराइकल, माहे और यनम तत्काल भारत में शामिल नहीं हुए थे। इन क्षेत्रों पर उस समय फ्रांस का नियंत्रण था।

1 नवंबर को मनता है 'मुक्ति दिवस'

लंबे समय तक चले आंदोलनों और स्थानीय स्वतंत्रता समर्थकों के दबाव के बाद फ्रांस ने 1 नवंबर 1954 को इन क्षेत्रों का प्रशासनिक नियंत्रण भारत को सौंप दिया। इसी ऐतिहासिक घटनाक्रम की वजह से 1 नवंबर को पुडुचेरी में 'मुक्ति दिवस' के तौर पर मनाया जाता है।हालांकि फ्रांस द्वारा 1954 में पुडुचेरी का प्रशासनिक नियंत्रण भारत को सौंप दिया गया था, लेकिन कानूनी तौर पर इस हस्तांतरण को पूरा होने में कई साल और लग गए।

Puducherry Independence Day

1962 में हुआ कुछ ऐसा

16 अगस्त को पुडुचेरी में 'कानूनी स्वतंत्रता दिवस'

फ्रांस की संसद में 'ट्रीटी ऑफ सेशन' (Treaty of Cession) को मंजूरी मिलने के बाद ही पुडुचेरी का भारत में औपचारिक विलय संभव हो सका। आखिरकार 16 अगस्त 1962 को फ्रांसीसी संसद ने इस संधि को अंतिम स्वीकृति दे दी। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय और कानूनी स्तर पर पुडुचेरी को आधिकारिक रूप से भारत का हिस्सा माना गया। इसी ऐतिहासिक घटना की याद में 16 अगस्त को पुडुचेरी में 'कानूनी स्वतंत्रता दिवस' या 'डी ज्यूर ट्रांसफर डे' मनाया जाता है। इस मौके पर पुडुचेरी में सरकारी अवकाश रहता है और कीजूर गांव में मुख्य समारोह आयोजित किया जाता है, जहां राष्ट्रीय ध्वज फहराकर इस ऐतिहासिक दिन को याद किया जाता है। कीजूर का इस पूरे घटनाक्रम में खास महत्व है, क्योंकि 1954 के जनमत संग्रह में 178 निर्वाचित प्रतिनिधियों में से 170 ने भारत के साथ विलय के पक्ष में मतदान किया था।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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