उत्तर कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। अदालत ने पीड़िता के कथित तौर पर जल्दबाजी में किए गए अंतिम संस्कार और साक्ष्य नष्ट किए जाने से संबंधित राज्य पुलिस की जांच को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को ट्रांसफर करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि एक ही घटना या साजिश से जुड़े मुद्दे पर राज्य पुलिस और CBI जैसी दो अलग-अलग एजेंसियां एक साथ समानांतर जांच आगे नहीं बढ़ा सकतीं।
खरदह थाने की FIR और परिजनों के गंभीर आरोप
उल्लेखनीय है कि पीड़िता के पिता की शिकायत पर 8 अगस्त को उत्तर 24 परगना जिले के खरदह थाने में एक अलग FIR दर्ज की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि घटना के तुरंत बाद आपराधिक साजिश के तहत साक्ष्यों को नष्ट किया गया और शव का बहुत जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करवा दिया गया ताकि महत्वपूर्ण फोरेंसिक सबूत मिटाए जा सकें। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अब निर्देश दिया है कि खरदह थाने का जांच अधिकारी इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं करेगा। मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड, दस्तावेज और केस डायरी तुरंत सीबीआई की विशेष जांच टीम (SIT) को सौंप दिए जाएं। यदि खरदह पुलिस द्वारा इस सिलसिले में किसी आरोपी को हिरासत में लिया गया है, तो CBI SIT तय करेगी कि उसे आगे हिरासत में रखना जरूरी है या नहीं, और तदनुसार संबंधित कोर्ट में अर्जी दाखिल करेगी।
पुलिस अधिकारियों के स्पष्टीकरण से असंतुष्ट दिखा कोर्ट
समानांतर जांच शुरू होने पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट ने 24 सितंबर को ही खरदह थाने के प्रभारी निरीक्षक और जांच अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया था। पीठ जानना चाहती थी कि जब उच्च न्यायालय पहले से ही मुख्य साजिश की सीबीआई जांच की निगरानी कर रहा है, तो राज्य पुलिस ने अलग से जांच कैसे शुरू की। गुरुवार को सुनवाई के दौरान अधिकारियों के रुख पर असंतोष व्यक्त करते हुए पीठ ने कहा हम पुलिस अधिकारियों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से कतई संतुष्ट नहीं हैं। हम उन्हें भविष्य में अधिक सावधानी बरतने की सख्त चेतावनी देते हैं।
CBI की 3-सदस्यीय SIT कर रही है विस्तृत घटनाक्रम की पड़ताल
उच्च न्यायालय ने 21 मई को सीबीआई के तहत तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। इस SIT को 9 अगस्त 2024 की रात प्रशिक्षु डॉक्टर द्वारा भोजन करने के बाद से लेकर उसके अंतिम संस्कार तक के पूरे घटनाक्रम की गहनता से जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है।
