नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण और विश्वसनीय तरीके से विधानसभा चुनाव कराने में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की भूमिका के लिए वह (कुमार) ’’देश के सर्वोच्च सम्मान के हकदार’’ हैं।
एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर असंतोष से जुड़ी एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के बाद विपक्ष द्वारा सीईसी की आलोचना की जा रही है। इस बीच, एनसीपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्योति प्रकाश चटर्जी ने कुमार के नेतृत्व वाले निर्वाचन आयोग की सराहना की और कहा कि 2026 के पश्चिम बंगाल चुनाव बिना किसी खून-खराबे, डराने-धमकाने या चुनावी धांधली के संपन्न हुए। प्रधानमंत्री को बुधवार को भेजे पत्र में चटर्जी ने राज्य में राजनीतिक हिंसा के इतिहास और चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों का जिक्र किया तथा कहा कि इस बार के चुनावों ने चुनावी प्रक्रिया में मतदाताओं का विश्वास बहाल करने में मदद की है।
'ज्ञानेश कुमार ने संविधान की नींव को मजबूत किया'
उन्होंने पत्र में कहा, ’’निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता, तटस्थता और अनुशासन को बनाए रखकर, कुमार ने संविधान की नींव को मजबूत किया है और मतदान प्रक्रिया में एक अरब से अधिक नागरिकों के विश्वास को सुदृढ़ किया है।’’
चटर्जी ने कहा, ’’इन योगदानों के लिए, मैं विनम्रतापूर्वक निवेदन करता हूं कि ज्ञानेश कुमार देश के सर्वोच्च सम्मान के हकदार हैं। उन्हें सम्मानित करने से देशभर के निर्वाचन अधिकारियों को यह संदेश भी जाएगा कि निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा के प्रति समर्पण को गणराज्य द्वारा महत्व दिया जाता है।’’
हालांकि, नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) गुट के नेता युसूफ पठान ने कहा है कि उन्होंने इस चिट्ठी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "बंगाल, मुर्शिदाबाद, बहरामपुर और पूरे देश के लोग अपने मताधिकार के लिए आवाज उठा रहे हैं। ऐसे समय में क्या मैं किसी को पुरस्कार के लिए सिफारिश करूंगा? मैंने ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा है। मेरे नाम से झूठी कहानियां गढ़ने वालों से मैं बस इतना ही कहना चाहता हूं: अगर ऐसा कोई पत्र मौजूद है, तो उसकी प्रति सार्वजनिक करें। सबूत पेश करें, अन्यथा इसे फर्जी और मेरे नाम का दुरुपयोग मानें। आज अफवाहों की नहीं, बल्कि सच्चाई की आवाज और जनता के अधिकारों की जरूरत है।"
क्यों सवालों के घेरे में हैं ज्ञानेश कुमार?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर है। विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं। इन्हीं आरोपों को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर रोक की मांग उठ रही है।
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि संस्थागत निर्णय प्रक्रिया में अलग-अलग राय और आपत्तियां होना सामान्य है। इसी मुद्दे पर 2 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और इलाके में सुरक्षा बढ़ाकर बैरिकेडिंग की गई है।
