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10 साल का रिकॉर्ड टूटेगा? बाजार में आने वाली है बड़ी तबाही, किसने दी डराने वाली चेतावनी?

भारतीय शेयर बाजार पिछले 10 साल से लगातार आगे बढ़ रहा है। लेकिन, यह साल बाजार के लिए भारी पड़ता दिख रहा है। एक रिसर्च रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि इस साल बाजार गिरावट में रह सकता है।

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बाजार में आएगी बड़ी गिरावट

भारतीय शेयर बाजार की लगातार 10 साल की शानदार तेजी अब सवालों के घेरे में है। Ambit Institutional Equities का अनुमान है कि 2026 में भारतीय शेयर बाजार में अभी और ज्यादा नेगेटिव रिटर्न देखने को मिल सकते हैं। ब्रोकरेज ने खासतौर पर मिडकैप (Midcap) और स्माल कैप (Smallcap) शेयरों में बड़ा करेक्शन आने की आशंका जताई है। यानी जिस तेजी ने निवेशकों को लंबे समय तक अच्छा रिटर्न दिया, उसके बाद अब बाजार के सामने कई बड़े रिस्क एक साथ उभर रहे हैं।

10 साल का रिकॉर्ड कैसे टूटा?

Sensex ने 2016 से 2025 तक लगातार 10 कैलेंडर वर्ष में पॉजिटिव एनुअल रिटर्न दिया है। 2025 इस सिलसिले का 10वां साल रहा और यह 1985 के बाद सेंसेक्स (Sensex) की सबसे लंबी लगातार पॉजिटिव रिटर्न स्ट्रीक बनी। लेकिन, एंबिट का मानना है कि 2026 में यह रिकॉर्ड टूट सकता है।

ब्रोकरेज के मुताबिक बाजार के सामने इस समय कई चुनौतियां (Headwinds) हैं। क्रूड ऑयल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें, ऊंच Bond Yields, कमजोर PMI, धीमी इकोनॉमिक ग्रेाथ और खासकर हाई वैल्यूएशन बाजार पर दबाव डाल सकते हैं।

मिडकैप-स्मालकैप में सबसे बड़ा खतरा

एंबिट की चिंता का सबसे बड़ा हिस्सा SMID यानी स्माल और मिडकैप स्टॉक्स हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2024 से इन शेयरों का मीडियन वैल्यूएशन करीब 35-40 गुना रहा है। मार्च 2026 के बाद इस सेग्मेंट में जो रिकवरी आई, उसे एंबिट ने काफी हद तक मीन रिवर्सन ट्रेड बताया है।

ब्रोकरेज का तर्क है कि इन कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ भले ही बेहतर रही हो, लेकिन निवेशक जिस ऊंची वैल्यूएशन पर इन शेयरों में दाखिल हुए हैं, उसने संभावित रिटर्न को सीमित किया है। एंबिट का कहना है कि आने वाले महीनों में बाजार में बड़े करेक्शन का रिस्क बना हुआ है।

विदेशी बेच रहे घरेलू निवेशक संभाल रहे बाजार

भारतीय बाजार में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर (FII) यानी की लगातार बिकवाली भी चिंता का कारण है। एंबिट के मुताबिक इस अवधि में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब $56 अरब के शेयर बेचे हैं। इसके उलट डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर (DII) यानी DIIs ने करीब $175 अरब का निवेश किया। मार्च 2026 में पहली बार भारतीय शेयरों में में DII ऑनरशिप बढ़कर 16.7% हो गई, जो FII ऑनरशिप के 15.3% से ज्यादा थी। इसके बावजूद बाजार में बड़ी तेजी नहीं बन सकी और इंडेक्स काफी हद तक रेंजबाउंड रहे।

किन शेयरों का क्या हाल?

एंबिट के मुताबिक 2026 में अब तक लार्जकैप स्टॉक्स में करीब 15% करेक्शन आया है। इसके मुकाबले मिडकॅप स्टॉक्स लगभग सपाट रहे, जबकि स्मालकैप सेग्मेंट करीब 7% ऊपर रहा। यही डायवर्जेंस एंबिट की चिंता बढ़ाता है, क्योंकि ब्रॉडर मार्केट में वैल्यूएशन अब भी ऊंचे हैं। ब्रोकरेज का कहना है कि लंबे समय तक किसी भी कंपनी या बाजार से उसकी कॉस्ट ऑफ इक्विटी से लगातार ज्यादा रिटर्न की उम्मीद करना मुश्किल होता है। ऐसे में जब वैल्यूएशन ऊंचे हों और इकोनॉमिक ग्रोथ पर सवाल उठ रहे हों, तो मार्केट मल्टीपल में गिरावट का दबाव बन सकता है।

किन वजहों से और लुढ़क सकता है बाजार?

एंबिट के मुताबिक आने वाले समय में पश्चिम एशिया में जारी US-Iran युद्ध की स्थिति और क्रूड के दाम के साथ ही, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों के साथ AI से जुड़ी अनिश्चितता से प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा इनपुट कॉस्ट बढ़ने से कंपनियों के ग्रॉस मार्जिन पर दबाव आ सकता है। अगर अर्निंग एस्टिमेट्स में भी कमी आती है और वैल्यूएशन ऊंचे रहते हैं, तो मार्केट में मल्टीपल डी-रेटिंग देखने को मिल सकती है। हालांकि, एंबिट ने यह भी कहा है कि बेंचमार्क इंडेक्स के लिए 200-डे मूविंग एवरेज से करीब 10% नीचे के स्तर अतीत में मजबूत सपोर्ट का काम करते रहे हैं और यह सपोर्ट आगे भी अहम हो सकता है।

एंबिट किन सेक्टरों पर दे रहा है जोर?

ब्रोकरेज के मॉडल पोर्टफोलियो में डिफेंसिव सेक्टर्स को प्राथमिकता दी गई है। इसमें FMCG, फार्मा, टेलीकॉम और IT शामिल हैं। इसके अलावा Auto को भी ओवरवेट स्टांस दिया गया है। बैंक पर इक्वल वेट है, जबकि सीमेंट और IT में टेक्टिकल कॉल्स का उल्लेख किया गया है। पोर्टफोलियो अलोकेशन में करीब 71% लार्जकैप, 23% मिडकैप और 7% स्मालकैप रखा गया है, जबकि कैश अलोकेशन सिर्फ 0.2% है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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