देश

Mid-Day Meal: बच्चों को मिड-डे मील में क्यों नहीं दे रहे चिकन-मटन, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated May 10, 2023, 04:26 PM IST

एएसजी ने दलील दी कि यह एक नीतिगत फैसला है जो विभिन्न पहलुओं जैसे आइटम की मौसमी उपलब्धता, आर्थिक कारकों को देखने के बाद लिया जाता है।

Image

बच्चों को मिड-डे मील में क्यों नहीं दे रहे चिकन-मटन

Photo : ANI

Chicken Mutton in Mid-day Meal: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को लक्षद्वीप प्रशासन से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें द्वीप केंद्र शासित प्रदेश में मिड-डे मील योजना से मटन और चिकन को हटाने को चुनौती दी गई थी। जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ केरल हाई कोर्ट के सितंबर 2021 के फैसले के खिलाफ दायर एक विशेष अवकाश याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाई कोर्ट ने लक्षद्वीप प्रशासन के मिड-डे मील से चिकन और मांस को बाहर करने और आसपास के डेयरी फार्म को बंद करने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया था।

बच्चों को इससे वंचित क्यों कर रहे हैं?

खंडपीठ ने पूछा, आप बच्चों को इससे वंचित क्यों कर रहे हैं? बेंच सवाल पूछ रही थी तभी अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अपनी बात रखते हुए कहा, एक बेहतर चीज दी गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, क्या बेहतर है? चिकन और मटन के बजाय, वे सूखे मेवे खाएंगे?

इस पर कहा गया कि मटन और चिकन सप्लीमेंट्री आइटम के तौर पर दिया जाता है। तब बेंच ने कहा, फिर इन्हें देना जारी रखें। एएसजी ने दोहराया कि यह एक नीतिगत फैसला है जो विभिन्न पहलुओं जैसे आइटम की मौसमी उपलब्धता, आर्थिक कारकों सहित अन्य पहलुओं को देखने के बाद लिया जाता है। एएसजी ने कहा कि पौष्टिक पहलुओं में गड़बड़ी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

बेंच ने अगली सुनवाई के लिए 11 जुलाई की तारीख तय की है। साथ ही कहा कि सरकारी स्कूलों में बच्चे मिड-डे मील की वजह से ही आते हैं। हमें मिड-डे मील योजना पर बात कर रहे हैं।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (News in Hindi) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और (आज की ताजा खबर) के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।

अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडल author

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर... और देखें

End of Article