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PM Modi के दौरे का सारा खर्चा क्यों उठा रहा है अमेरिका? अब तक सिर्फ तीन भारतीय नेताओं का हुआ है ऐसा स्वागत

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 21, 2023, 08:37 PM IST

PM Modi US Visit: अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, स्टेट विजिट को हाइ रैंकिंग वाला दौरा कहा जाता है, क्योंकि यह दौरा अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा तय किया जाता है। इस यात्रा का पूरा खर्च अमेरिका ही वहन करता है।

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पीएम मोदी का अमेरिका दौरा

Photo : ANI

PM Modi US Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा इन दिनों चर्चा का विषय है। यूं तो 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से यह उनकी छठा अमेरिका दौरा है, लेकिन इस बार की यात्रा सबसे खास और अलग है। दरअसल, पीएम मोदी पहली बार अमेरिका राजकीय यात्रा (स्टेट विजिट) पर हैं। वह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बुलावे पर 20 जून को अमेरिका पहुंचे थे। वह इस तरह अमेरिका की राजकीय यात्रा करने वाले पीएम मोदी तीसरे भारतीय नेता हैं। उनसे पहले डॉ. मनमोहन सिंह अमेरिका की राजकीय यात्रा पर गए थे। और 1963 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकष्णनन अमेरिका की राजकीय यात्रा पर गए थे।

अमेरिकी राष्ट्रपति के आमंत्रण पर हो रही यह राजकीय यात्रा कई मायनों में अलग होती है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, स्टेट विजिट को हाइ रैंकिंग वाला दौरा कहा जाता है, क्योंकि यह दौरा अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा तय किया जाता है। इस तरह की स्टेट विजिट के दौरान कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और खुद अमेरिकी राष्ट्रपति मेहमान नेता की मेजबानी करते हैं।

यात्रा का पूरा खर्च उठाएगा अमेरिका

स्टेट विजिट में एक चीज जो सबसे खास होती है, वह है मेहमान नेता की यात्रा पर होने वाला खर्च। इस यात्रा का पूरा खर्चा अमेरिका ही वहन करता है। लिहाजा पीएम मोदी के दौरे का पूरा खर्च भी अमेरिका ही उठाएगा। इसके अलावा स्टेट विजिट में व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर का भी आयेाजन किया जाएगा। इस दौरान राष्ट्रपति जो बाइडन, उनकी पत्नी जिल बाइडन और पीएम मोदी एक ही टेबल पर खाना खाएंगे। इस दौरे में एक और बात खास होती है। स्टेट विजिट पर आने वाले नेता को ब्लेयर हाउस में रुकवाया जाता है, यह अमेरिकी राष्ट्रपति का गेस्ट हाउस है। अपनी तीन दिन की यात्रा के दौरान पीएम मोदी इसी ब्लेयर हाउस में रुकेंगे।

बाइडन ने स्टेट विजिट पर किस-किस को बुलाया

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल की यह तीसरी स्टेट विजिट है। पीएम मोदी से पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक येओल भी जो बाइडन के बुलावे पर स्टेट विजिट पर आ चुके हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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