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कौन है PAK आर्मी की मेजर सामिया रहमान, Seema Haider से क्यों जुड़ रहे इसके तार? हर सवाल का जानिए जवाब

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 17, 2023, 10:37 PM IST

Seema Haider Case: सोशल मीडिया पर यह भी कहा जा रहा है कि सीमा हैदर का असली नाम सामिया रहमान है और वह पाकिस्तानी सेना में मेजर के पद पर तैनात है। आइए जानते हैं सीमा हैदर और सामिया के बीच कनेक्शन क्या है और यह पूरा मामला पुलिस के पास कब पहुंचा।

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Seema Haider Sachin Love Story

Photo : Twitter

Seema Haider Case: पाकिस्तान से अपना प्यार पाने के लिए चार देशों के बॉर्डर क्रॉस कर भारत आई सीमा हैदर की कहानी काफी दिलचस्प है। जैसे-जैसे यह केस चर्चा में आ रहा है, नए-नए एंगल भी निकल कर सामने आ रहे हैं। कोई सीमा हैदर को ISI एजेंट बता रहा है तो कोई उसे पाकिस्तानी सेना का मेजर बता रहा है।

फिलहाज यूपी एटीएस ने सीमा को ग्रेटर नोएडा स्थित उसके घर से हिरासत में लिया है। सीमा के साथ उसके पति सचिन और उसके चार बच्चों को भी डिटेन किया गया है। जानकारी के मुताबिक, एटीएस सीमा हैदर और सचिन से किसी सीक्रेट जगह पर पूछताछ कर रही है। सीमा हैदर के इस केस के बीच एक और नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है तो वह पाकिस्तान आर्मी में मेजर सामिया रहमान का। कहा जा रहा है कि सीमा हैदर का असली नाम सामिया रहमान है और वह पाकिस्तानी सेना में अधिकारी है। सच क्या है, यह तो जांच में पता चलेगा। आइए जानते हैं सीमा हैदर पुलिस और खुफिया एजेंसियों के जाल में कैसे फंसी? सामिया रहमान कौन है? और सीमा हैदर व सामिया के बीच क्या कनेक्शन है...

पहले जानिए पूरी कहानी

पाकिस्तानी की रहने वाली सीमा को 2019 में ऑनलाइन पबजी गेम खेलते हुए ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा में रहने वाले सचिन मीणा से प्यार हो गया था। हालांकि, दोनों के प्यार के बीच भारत और पाकिस्तान की सरहद खिंची हुई थी। ऐसे में सीमा हैदर ने शारजहां से भारत का सफर शुरू किया। वह नेपाल के रास्ते भारत पहुंची और सचिन के साथ रहने लगी।

पुलिस के हत्थे कब चढ़ी सीमा हैदर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीमा हैदर नेपाल के पोखरा से दिल्ली पहुंची। यहां से वह ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा में पहुंची। जानकारी के मुताबिक, सचिन ने सीमा को रबूपुरा के एक कमरे पर लाने के तीन से चार दिन बाद पूरी बात अपने पिता नेत्रपाल को बताई। इसके बाद उनके पिता नेत्रपाल ने दोनों की कोर्ट मैरिज कररने की बात कही। इसके लिए दोनों ने बुलंदशहर में एक वकील से बात की। जब मामला वकील के पास पहुंचा ओर उन्होंने सीमा की पाकिस्तानी नागरिकता देखी, तो शादी कराने से इंकार कर दिया। यहीं से मामला पुलिस तक पहुंचा और उसकी तलाश शुरू हो गई।

सामिया रहमान से क्या है कनेक्शन

सीमा हैदर का मामला सामने आने के बाद उसके बारे में कई बातें निकल कर सामने आ रही हैं। कोई उसे पाकिस्तानी जासूस कह रहा है तो कई ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं, जिसमें लोगों ने उसका प्रेमी होने का दावा किया है। कथित तौर पर सीमा की एक बचपन की सहेली का भी वीडियो सामने आया है, जिसमें उसने सीमा हैदर को धोखेबाज बताया। सोशल मीडिया पर यह भी कहा जा रहा है कि सीमा हैदर का असली नाम सामिया रहमान है और वह पाकिस्तानी सेना में मेजर के पद पर तैनात है।

अब जानिए कौन है सामिया रहमान

सामिया रहमान पाकिस्तानी सेना में मेजर के पद पर तैनात हैं। 2022 में सामियान ने आईएसपीआर के टीवी सीरियल सिंफ ए अहान में मेजर सामिया की भूमिका अदा की थी। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में भी सामिया अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। उनका एक दो साल का बेटा भी है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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